सांपों के बीच पली-बढ़ी पूजा सपेरा करेगी आतंककारियों से मुकाबला

राष्ट्रीय बालिका दिवस आज : बालिकाओं की आगे बढऩे की चाहत का नतीजा
सीआरपीएफ में सीडी चयनित

अलवर. कहते हैं कि बेटे घर का चिराग होते हैं लेकिन यह भी सही है कि बेटियां घर की रौनक होती है। यदि बेटियां कुछ करने की जिद कर ले और कुछ बनने की ठान ले तो उनके हौंसले को कोई हरा नहीं सकता। कुछ एेसा ही काम किया है अलवर के किशनगढ़बास के मोठुका गांव में पहाडी के पास ढाणी मेंे रहने वाली पूजा ने।
सांपों के बीच पली बढ़ी पूजा सपेरा का हाल ही में सीआरपीएफ में चयन हुआ है। ढाणी में करीब ४० से ५० परिवार हे जो परंपरागत रूप से सांपों को पकडऩे, सांप का खेल दिखाकर आटा मांगने आदि का ही काम करते थे लेकिन सरकार के इस काम में रोक लगाने के बाद परिवार को पेट भरने के भी लाले पड गए। इसके बाद आटा मांगकर घर चलाते हैं। कच्ची झोपडी मे ंरहने वाली पूजा के पास पढऩे के लिए भी पैसे नहीं थे, अभावों के बीच दूसरों की मदद से अपने सपने को पूरा करने में जुटी रही।
पूजा के पिता रमेश नाथ भी गांव गांव जाकर सांप का खेल दिखाते हैं। वो नहीं चाहते थे कि पूजा आगे पढे क्योंकि पढऩे के बाद शादी नहीं होती है, लेकिन पूजा की जिद के आगे उन्हें हार माननी पडी, पूजा की मां ब्रह्मा देवी ने दिन रात सिलाई करके बेटी के सपने को पूरा करने के लिए मेहनत की। गांव में पांचवी तक का ही स्कूल है आगे की पढ़ाई के लिए उसे किशनगढ़बास जाना पड़ता है यहां से उसने बीए किया और सीआरपीएफ की तैयारी में जुट गई और पहले ही प्रयास में सफलता मिल गई।

Pradeep Desk
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