अंबिकापुर

भतीजे से किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले चाचा-चाची व चचेरे भाइयों की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त, न्यायाधीश ने की ये टिप्पणी

Kidney transplant case: किडनी (Kidney) देने के बदले चाची व 2 चचेरे भाइयों ने जमीन (Land) देने व जीवनभर उसका व उसके परिवार (Family) की देखरेख करने का दिया था लालच (Greed), बाद में बदल गई नीयत
2 min read
भतीजे से किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले चाचा-चाची व चचेरे भाइयों की अग्रिम जमानत याचिका निरस्त, न्यायाधीश ने की ये टिप्पणी
Judgement

अंबिकापुर. वर्ष 2007 में भतीजे की किडनी (Kidney) लेकर अपनी जान बचाने वाले चाचा-चाची व 2 चचेरे भाइयों की मंगलवार को अग्रिम जमानत याचिका प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर ने निरस्त कर दी है। किडनी के बदले पीडि़त को जमीन देने, उसकी व उसके परिवार की जीवनभर देखरेख करने की बात वसीयतनामे में लिखी गई थी।

जब पीडि़त ने किडनी देकर (Kidney transplant) चाचा की जान बचा ली तो कुछ दिनों बाद उनकी नीयत बिगड़ गई और देखरेख से इनकार कर दिया। यही नहीं, वसीयतनामा भी निरस्त करा दिया। इसकी शिकायत पीडि़त ने थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में धारा 419, 420, 467, 468 एवं 120बी के तहत चाचा-चाची व 2 चचेरे भाइयों के खिलाफ अपराध दर्ज किया था।


गौरतलब है कि शहर के बौरीपारा निवासी राजेंद्र धर दुबे 70 वर्ष की किडनी खराब थी। 8 अक्टूबर को राजेंद्रधर दुबे अपनी पत्नी कौशिल्या दुबे 65 वर्ष, पुत्र अनिमेश दुबे 38 वर्ष व मिथलेश्वर प्रसाद दुबे 40 वर्ष के साथ अपने भतीजे रविंद्र कुमार धर दुबे के घर ग्राम अनरोखा पहुंचे।

इस दौरान पत्नी व पुत्रों ने कहा कि चाचा की किडनी खराब है, उनका बचना मुश्किल है और किसी की किडनी मैच नहीं हो रही है। यदि वह अपनी किडनी देगा तो उसके नाम जमीन कर देंगे और जीवनभर उसकी व उसके परिवार की देखरेख करेंगे। इसके बाद उन्होंने रविंद्र के पक्ष में 13 अक्टूबर को वसीयतनामा (Will) तैयार करा जमीन उसके नाम कर दिया।

फिर 8 या 9 जनवरी 2007 को संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट संस्थान लखनऊ में ले जाकर किडनी प्रत्यारोपण (Kidney transplant) करा लिया। किडनी प्रत्यारोपण के बाद कुछ दिनों तक तो उसकी देखरेख की लेकिन बाद में नियत बदल गई। इसके बाद उन्होंने उसकी देखरेख करने से इनकार करते हुए वसीयतनामा भी निरस्त करा दिया था।

इसकी शिकायत (Complaint) पीडि़त रविंद्र कुमार धर दुबे ने थाने में दर्ज कराई थी। इधर चारों आरोपियों ने प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर के न्यायालय (Court) में अग्रिम जमानत याचिका लगाई थी, जिसे न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया।


न्यायाधीश ने इस आधार पर निरस्त की जमानत
प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश अंबिकापुर जयदीप गर्ग ने कहा कि वसीयतनामा 13 अक्टूबर 2006 को लिखा गया था। इसमें उल्लेख था कि अभियुक्त राजेंद्र धर दुबे के पुत्रों मिथलेश धर दुबे व अनिमेश धर दुबे द्वारा किडनी देने से इनकार किया गया था।

ऐसे में रविंद्र धर दुबे से किडनी प्राप्त कर रहा है तथा उसके नाम अपनी संपत्ति का हस्तांतरण कर देगा तथा उसे अपना बड़ा पुत्र मिथलेश धर दुबे बताकर लखनऊ ले जाएगा। ऐसे में वसीयतनामा से साफ जाहिर है कि वह वसीयतनामा न होकर किडनी के क्रय-विक्रय किए जाने का दस्तावेज है,

क्योंकि किडनी के बदले जमीन दिए जाने, मकान बनाने एवं अनुकंपा नियुक्ति दिए जाने का भी लालच दिया गया है। यह भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत छल, दस्तावेजों की कूटरचना व कूटरचित दस्तावेजों के प्रयोग के अपराध किए गए हैं। साथ में यह 'द ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स एंड टिशु एक्ट' 1994 की धारा 19(ए) के अंतर्गत मानव अंगों के क्रय-विक्रय का अपराध किया है, इस पर रोक लगाया जाना अत्यंत आवश्यक है।

इसमें किडनी प्रत्यारोपण करने वाले चिकित्सालय, कर्मचारियों व डॉक्टरों की भूमिका की भी जांच किया जाना आवश्यक है। इस आधार पर आवेदकों का अग्रिम जमानत निरस्त (Advance bail canceled) किया जाता है।

Published on:
12 Jan 2021 07:20 pm
Also Read
View All
Ambikapur Snake Bite: मॉर्निंग वॉक पर जाने उठा किसान, आंगन में पहुंचते ही मचाने लगा शोर, बोला- मुझे करैत सांप ने डस लिया, हुई मौत

Ambikapur News: कुंडला वसुंधरा सिटी के नहीं टूटेंगे 110 मकान, हाईकोर्ट ने राज्य शासन और नगर निगम के आदेश किए निरस्त

Minister Rajesh Agrawal बोले- संगठन महामंत्री पवन साय ने मुझे भी डांटा, बोले- अगर जनता ही परेशान रहेगी तो नेतागिरी का क्या फायदा? See Video

Ambikapur News: मैनपाट में पत्नी और प्रेमी की हत्या करने वाला आरोपी गिरफ्तार, रात में दोनों को देख लिया था साथ

Surguja Double Murder Case: माता-पिता की हत्या कर बोरे में बांध दी थी लाश, कमरे में ताला मारकर फरार बेटा गिरफ्तार, बताया- क्यों मारा