Breaking: पूर्व मुख्यमंत्री खाली करेंगे बंगला, दो दिन में कार्रवाई करने के निर्देश
भोपाल। देशभर के कई दिग्गज नेताओं के बाद अब मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी सरकारी बंगले खाली करने पड़ेंगे। हाईकोर्ट की लताड़ के बाद इन पर बंगले खाली करने का दबाव बढ़ गया है। मध्यप्रदेश में दो दिनों में ही इसकी शुरुआत होने वाली है।
मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री उमा भारती जल्द ही सरकारी बंगला खाली करने वाली हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उमा भारती ने अपने सहयोगियों को दो दिनों के भीतर समाधान निकालने के निर्देश दिए हैं।
मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती का भोपाल स्थित श्यामला हिल्स पर सरकारी बंगला है। पहले पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला दिया जाता था। लेकिन, कोर्ट के फैसले के बाद अब सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को अपने-अपने सरकारी बंगले खाली करने पड़ रहे हैं।
उमा के बाद दिग्विजय भी तैयार
पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले खाली कराने को लेकर हाईकोर्ट के आए फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वे भी कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए सरकारी बंगला छोड़ने को तैयार हैं।
कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी
पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने कहा था कि वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह करेंगे। हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों से एक माह में सरकारी बंगले खाली कराने का फैसला सुनाया था।
इनके पास भी तो है बंगले
-प्रदेश में दो या इससे अधिक सरकारी बंगले वाले 11 सांसदों और 5 मंत्रियों से सरकारी आवास खाली कराने को लेकर सरकार अभी मौन है।
-पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधायक बाबूलाल गौर के पास भी पूर्व मुख्यमंत्री स्तर का बंगला है।
-जबकि पर्यटन मंत्री सुरेंद्र पटवा ने पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के नाम पर आवंटित सरकारी बंगले पर कब्जा जमा रखा है।
-मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास भी दो बंगले हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन कर मुख्यमंत्री को दो बंगले रखने की पात्रता दी है।
खाली कराएंगे बंगले
सूत्रों के अनुसार हाईकोर्ट के फैसले के अनुरूप सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों से एक माह में सरकारी बंगले खाली करवा सकती है। सरकार ने विधि विभाग के अफसरों से राय मशविरा किया। इसकी संभावना भी तलाशी कि क्या फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। अफसरों ने उत्तर प्रदेश केस का हवाला देते हुए ऐसा न करने की सलाह दी है। उन्होंने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने की संभावना कम है, बेहतर है बंगले खाली करवा लिए जाएं। इस बारे में अंतिम फैसला मुख्यमंत्री करेंगे।