फिटनेस विशेषज्ञों की परामर्श के अनुसार डाइट से लेकर शारीरिक कसरत तक कर रहे हैं। इनमें युवकों के साथ युवतियों की तादाद भी काफी है।
जयप्रकाश गहलोत/बीकानेर. एक-डेढ़ दशक पहले तक शहर में दो-तीन जिम होते थे। इनमें भी गिने-चुने लोग जाया करते थे। आज हालात बदल गए हैं। तेजी से महानगरीय जीवन शैली अपना रहे युवक-युवतियां अपनी फिटनेस के प्रति सचेत हो रहे हैं। वे जॉगिंग, जिम और योगा के सेंटरों पर जा रहे है। फिटनेस विशेषज्ञों की परामर्श के अनुसार डाइट से लेकर शारीरिक कसरत तक कर रहे हैं। इनमें युवकों के साथ युवतियों की तादाद भी काफी है।
यही वजह है कि शहर में अब महिलाओं के लिए अगल से जिम खुल गए हैं। प्रोफेशन योगा क्लासेज चलने लगी हैं।असल में युवाओं पर सबसे ज्यादा असर सोशल मीडिया प्लेटफार्म का पड़ रहा है। शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए बॉलीवुड सेलीब्रिटी, खिलाड़ी और प्रोफेशनल्स के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पॉपुलर हैं। इन्हें देखकर नई पीढ़ी भी अपनी फिटनेस तराशने के लिए जिम, योगा सेंटर और ड्रांस क्लासेज की तरफ मुड़ रही है।
बीकानेर में कोराना के बाद 40 से ज्यादा नए जिम, योगा सेंटर और डांस क्लासेंज खुल चुके हैं। आधुनिक मशीनों के साथ करोड़ों रुपए का इन्वेस्टमेंट कर युवा स्टार्टअप के रूप में भी यह काम शुरू कर रहे हैं। अभी शहर में 100 से ज्यादा जिम संचालित हो रहे हैं। महिलाओं के लिए विशेष तौर पर दो जिम खुल चुके हैं। युवक-युवतियों दोनों के लिए अलग-अलग टाइमिंग के बैच करीब-करीब सभी जगह संचालित हो रहे हैं।
कॉलेज स्टूडेंट गगन बताते हैं कि युवाओं में चाय-कॉफी की जगह विदेशों की तरह प्रोटीन शेक से दिन की शुरुआत करना भी तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसमें भी खासकर घर पर प्रोटीन शेक तैयार कर सेवन करने को ज्यादा तव्वजो दे रहे हैं। अब तक यह विदेशों का चलन था। परन्तु आज युवा विदेशों में नौकरी या पढ़ाई के लिए जाते हैं। कुछ के परिवार के सदस्य विदेशों में हैं। उनसे भी प्रभावित होकर ऐसा करने लगे हैं।
योगाचार्य दीपक शर्मा बताते हैं कि योग क्रियाएं व्यक्ति को समग्र रूप से स्वास्थ्य रखती हैं। मांसपेशियों को मजबूत बनाना, हृदय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना, वजन घटाना या फिर सिर्फ आनंद के लिए भी योगा करते हैं। योग विद्या प्राचीन है, परन्तु आज इसे लोग अपनी नियमित दिनचार्य में शामिल भी करने लगे हैं। कुछ लोग हृदय रोग, थायराइड, मधुमेह, मोटापा, रक्तचाप एवं मानसिक तनाव को दूर करने के लिए भी योग को अपनाते हैं।
महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय ने कुछ साल पहले योग का पाठ्यक्रम शुरू किया। इसमें शुरुआती सालों में बहुत कम विद्यार्थी प्रवेश लते थे। परन्तु कोरोना के बाद एकाएक तेजी आई है। अब तो मेरिट के आधार पर प्रवेश मिलने लगा है। सीटों से कहीं ज्यादा विद्यार्थी हर साल इसके लिए आवेदन करते हैं।
योगाचार्य विनोद जोशी ने बताया कि पिछले कुछ सालों में योग के प्रति जागरूकता बढ़ी है। हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाने लगा है। इससे भी एक दिन के लिए लोग योग की कक्षा में सामूहिक योग कार्यक्रम में शामिल होते हैं। बाद में इनमें से काफी लोग नियमित रूप से योग को अपना लेते हैं। प्रशिक्षित एवं डिग्रीधारी युवा अब योगा एवं मेडिटेशन में कॅरियर भी बनाने लगे हैं।
जॉगिंग और मॉर्निंग वॉक पर युवाओं को देखा जा सकता है। इसके साथ ही घरों में 40 पार के पुरुष और 30 पार की युवतियां ऑनलाइन देख कर योग, मेडिटेशन कर रहे हैं। सम्पन्न परिवारों में अब घरों में ही जॉगिंग मशीन, जिम के उपकरण भी रखे जाने लगे हैं।
- 100 से अधिक जिम शहर में
- 10 प्रोफेशनल योगा सेंटर- 20 निशुल्क योग शिविर
- 70 फीसदी 35 साल से कम आयु के लोग, जो जिम जाते हैं- योगा में युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी लगभग आधी-आधी