जो लोग छह वर्ष से ज्यादा समय तक पेनकिलर और एक साल तक दिन में दो बार सूजन कम करने वाली दवाएं लेते हैं उनमें सुनने की क्षमता लगभग खत्म हो जाती है।
अमरीका के मैसाच्यूसेट्स आई एंड ईयर इंफरमैरी, हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में हुए एक शोध के दौरान एंटीबायोटिक्स दवाओं और बहरेपन में गहरा संबंध पाया गया। जिसका कारण इन दवाओं से दुष्प्रभाव के रूप में अंदरुनी कान की सुरक्षा व तेज आवाज से बचाव करने वाले छोटे-छोटे बालों का क्षतिग्रस्त होना और कान में रक्तसंचार घटना है। उनके अनुसार जो लोग छह वर्ष से ज्यादा समय तक पेनकिलर और एक साल तक दिन में दो बार सूजन कम करने वाली दवाएं लेते हैं उनमें सुनने की क्षमता लगभग खत्म हो जाती है। खासतौर पर बिना डॉक्टरी सलाह व बताई गई सीमा से ज्यादा डोज लेने वाले लोगों में ये समस्या ज्यादा मिला होती है।
पेन किलर दवाओं के ज्यादा सेवन करने से किडनी खराब होने की संभावना ज्यादा रहती है। इन दवाओं के ज्यादा सेवन से किडनी धीरे-धीरे डैमेज होने लगती है और सही तरीके से काम करना बंद कर देती है। किडनी खराब होने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है।