स्वस्थ युवा, सशक्त राष्ट्र, यह हमारा ध्येय वाक्य होना चाहिए, क्योंकि कोई भी राष्ट्र सशक्त तभी बन सकता है जब वहां के युवा शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ हों। युवा स्वस्थ रहें, इसका ध्यान माता-पिता बचपन या किशोरावस्था से ही रखें।
स्वस्थ युवा, सशक्त राष्ट्र, यह हमारा ध्येय वाक्य होना चाहिए, क्योंकि कोई भी राष्ट्र सशक्त तभी बन सकता है जब वहां के युवा शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ हों। युवा स्वस्थ रहें, इसका ध्यान माता-पिता बचपन या किशोरावस्था से ही रखें।
बेहतर खानपान हों
बच्चों के अंदर स्वस्थ खानपान की आदत बनाएंं। उन्हें बाजार में उपलब्ध खाने के पैकेट लेबल भी जरूर पढऩा सिखाएं, ताकि उन्हें पता चले कि वे क्या खा रहे हैं।
छोटे काम खुद ही करें
बच्चों को समझाएं कि पूरे समय एक जगह बैठकर टीवी देखने से स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव पड़ता है। उन्हें पौधों में पानी देने और घर के दूसरे कार्य भी करवाएं।
खेल को आदत बनाएं
कम उम्र में ही टहलना, जॉगिंग, तैराकी, व्यायाम या योग जैसे शारीरिक अभ्यास बच्चों की दिनचर्या में शामिल करवाएं। शारीरिक-मानसिक लाभ मिलता है।
हाइडे्रशन रखें
बच्चों के अंदर स्वस्थ हाइड्रेशन की आदत विकसित कराएं। पानी पीने की आदत बेहतर होगी तो उससे भी वे बीमारियों से दूर रहेंगे।
पॉजेटिव की कोशिश करें
बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं और छोटी-छोटी चीजों से ही हतोत्साहित हो जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि उनसे बात करें। उनकी उपलब्धियों और प्रयासों को सराहें।
दिनचर्या सही रखें
बच्चों में यदि कम उम्र में ही जल्दी सोने व उठने की आदत हो तो वे ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। माता-पिता बच्चों के लिए नियमित समय पर सोने-उठने का पैटर्न सेट करें।
नशे से दूर रहें
बच्चों को किशोरावस्था में नशे से दूर रखना बेहद जरूरी है। उन्हें इनके दुष्प्रभावों के बारे में बताएं। अगर घर को कोई नशा कर रहे है तो बच्चों के सामने न करें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।