आयुर्वेद में ऋृतचर्या के हिसाब से रहने की सलाह दी जाती है। गर्मियों के लिए कहा गया है कि...
आयुर्वेद में ऋृतचर्या के हिसाब से रहने की सलाह दी जाती है। गर्मियों के लिए कहा गया है कि व्यक्ति को ताकत से कम एक्सरसाइज करना चाहिए जिसे अर्धबल के रूप में दर्शाया गया है। अगर आप रोजाना एक घंटे एक्सरसाइज करते हैं तो इसे आधे घंटे करना होगा। बहुत अधिक एक्सरसाइज करने से शरीर से पसीना अधिक निकलेगा तो शरीर में जरूरी तत्वों की कमी होगी जिससे व्यक्ति को चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, उल्टी दस्त, पेट में मरोड़ के साथ दर्द जैसी तकलीफें हो सकती हैं। ऐसे में जितनी शारीरिक क्षमता है उससे कम ही वर्कआउट करना चाहिए जिससे शरीर में ताकत बनी रहे और तापमान बढऩे पर शरीर में अचानक से कोई परेशानी शुरू न हो।
गर्मियों में दिन में सोना पूरी तरह से मना है
गर्मियों में दिन में सोने की सलाह नहीं दी जाती है। सोने से कफ बढ़ता है। शरीर में कफ की मात्रा बढऩे से मधुमेह, मोटापा और शरीर में सूजन जैसी तकलीफ होती है। शरीर में कफ की मात्रा अधिक बढऩे की वजह से अलग-अलग तरह के कैंसर और ट्यूमर का कारण भी बनता है। गर्मियों में सोने वाले लोगों को किसी तरह की तकलीफ होती है तो व्यक्ति की उम्र, उसकी परेशानी, उसकी दिनचर्या और उसकी स्थिति जांचने के बाद दवा तय करते हैं। कफ कम होने के साथ ही व्यक्ति की परेशानी धीरे-धीरे कम होने लगती है और वे कुछ दिन के भीतर ही बेहतर महसूस करता है।
सिर्फ ये लोग दिन में सो सकते हैं
गर्मी के मौसम में कुछ चुनिंदा लोगों को सोने की सलाह दी जाती है। इसमें 0 से 16 वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं व 60 की उम्र से अधिक लोग दोपहर में दो घंटे के लिए सो सकते हैं। इन्हें सोने के लिए इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी शारीरिक शक्ति अन्य की तुलना में कमजोर होती है। जब दो घंटे की नींद लेंगे तो शरीर में उर्जा बनी रहेगी और हर समय उर्जावान और तरोताजा रहेंगे।
गर्मियों में फायदेमंद रसायन द्रव्य
जो लोग बहुत अधिक भागदौड़ करते हैं उनके लिए गर्मियों में रसायन द्रव्य फायदेमंद होता है। हालांकि रसायन द्रव्य व्यक्ति के वात्त, पित्त और कफ की प्रकृति जानने के बाद देने का नियम है। इसमें आंवला, यष्टिमधु, मुलेठी, पुर्ननवा, शंखपुष्पी, ब्राम्ही दी जाती है। ये औषधियां आमतौर पर 60 की उम्र से अधिक लोगों को भी देते हैं जिससे गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाया जा सके।
डॉ. भारती कुमार मंगलम, हेड प्रसूति विभाग, एनआईए, जयपुर