नवजात शिशु को गोद में लेने या खिलाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए। वैसे तो डॉक्टर सिर से पैर तक का परीक्षण कर लेते हैं फिर भी परिजनों को शिशु में कुछ भी असामान्य दिखे तो तुरंत अलर्ट हो जाएं।
बच्चे का पेट इसलिए फूलता है
इसमें डॉक्टर शिशु के पूरे शरीर की जांच करके देखते हैं कि किसी तरह की शारीरिक संरचना संबंधी कोई परेशानी या विकृति तो नहीं है। अच्छी बात यह है कि यह जांच डॉक्टर ही नहीं बल्कि अटेंडेंट भी कर सकते हैं। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात मल मार्ग की जांच होती है। कई बार 2-3 दिन के बाद पता चलता है कि शिशु के मल द्वार ही नहीं है और इस वजह से उसके पेट फूलने या उल्टी होने की शिकायत हो रही है। नवजात में पीलिया की समस्या भी होती है लेकिन जन्म के 24 घंटे में पीलिया के लक्षण दिखते हैं तो इसे असामान्य माना जाता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह तुरंत लेनी चाहिए।
लड़कियों में ब्लीडिंग
अक्सर लड़कियों में जन्म के दो-तीन बाद जननांगों से रक्तस्राव की शिकायत देखने में आती है। इस स्थिति में माता-पिता घबरा जाते हैं कि ऐसा क्यों हो रहा है। यह समस्या हार्मोन के असंतुलन से होती है क्योंकि मां के गर्भ से बाहर आने के बाद फीमेल बेबी का शरीर जरूरी हार्मोन्स का लेवल बरकरार नहीं रख पाता है। इस वजह से ब्लीडिंग होती है जिससे घबराने की जरूरत नहीं होती है। यह स्वत: ही ठीक हो जाता है।
फोड़े-फुंसी की समस्या
शिशु की त्वचा बेहद नाजुक होती है और उसके साथ साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखने से फोड़े-फुंसी की परेशानी हो सकती है। शिशु को गोद में लेने या खिलाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए। बच्चे को जिस कपड़े या स्पॉन्ज से पौंछ रहे हैं यदि वह संक्रमणरहित नहीं है तो उसे छोटी-छोटी फुंसियों की समस्या हो सकती है। इन फुंसियों को स्प्रिट के फोहे से साफ कर लें। हालांकि यहां भी तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि यह संक्रमण शरीर में भी फैल सकता है।
शिशु के सिर में सूजन आना
कई बार जन्म के तुरंत बाद शिशु के सिर में सूजन आ जाती है जिसका संबंध उसके लिवर से होता है। लिवर के सही ढंग से काम नहीं करने के कारण सिर में खून जमा होने से यह सूजन आती है। यह मस्तिष्क की परतों के बीच खून जमने से होता है। इसमें भूलकर भी बच्चे के सिर की मालिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि इससे खून ज्यादा तेजी से एकत्र हो सकता है। इसमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। यह सूजन धीरे-धीरे स्वत: ही ठीक हो जाती है।
पीठ पर लहसुन बनना
शिशु की पीठ पर बड़े-बड़े नीले रंग के निशान हो जाते हैं जिन्हें मंगोलियन स्पॉट्स (आम बोलचाल में लहसुन) बोलते हैं। यह भी सामान्य प्रकिया के तहत होता है, चिंता या घबराने की जरूरत नहीं होती है।