
चाहे नवरात्रि हो, करवा चौथ हो या धनतेरस, त्योहारों पर अक्सर भारतीय परिवार सोना खरीदते हैं। कोई गहने खरीदता है तो कोई गोल्ड कॉइन्स खरीदता है। लेकिन अगर आपका मकसद सोना पहनना नहीं, बल्कि निवेश करके पैसा बढ़ाना है, तो खरीदने का तरीका बहुत मायने रखता है। गहनों पर मेकिंग चार्ज लगता है। सोने को बैंक लॉकर में रख रहे हैं, तो उसका खर्चा अलग, ये सब खर्चे आपके मुनाफे को कम कर सकते हैं।
सेबी रजिस्टर्ड निवेश सलाहकार डॉ रवि सिंह के अनुसार, निवेशकों को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि इस्तेमाल के लिए सोना खरीदना और इन्वेस्टमेंट के मकसद से सोना खरीदना, दोनों अलग बातें हैं। आइए सोना खरीदने के कुछ प्रमुख तरीकों के बारे में जानते हैं।
धनतेरस पर सोने के गहने खरीदने का अपना महत्व है। लेकिन निवेश के नजरिए से देखें, तो मेकिंग चार्ज और वेस्टेज के कारण इनकी लागत बढ़ जाती है। गहने खरीदते समय आप सिर्फ सोने की कीमत नहीं चुकाते, बल्कि इन्हें बनाने और तैयार करने का खर्च भी देते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन अतिरिक्त खर्चों के कारण लागत काफी बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यक्ति 100 रुपये खर्च करता है, तो इन लागतों को ध्यान में रखने पर उसे करीब 70 रुपये मूल्य का सोना मिल सकता है। यह एक उदाहरण है, वास्तविक अंतर गहने और जौहरी की शर्तों पर निर्भर करेगा। कई ज्वैलर्स 12% मेकिंग चार्ज लेते हैं, तो कुछ 30% तक भी मेकिंग चार्जेज ले सकते हैं।
मुश्किल सिर्फ खरीदते समय नहीं आती। जब आप गहने बेचने जाते हैं, तो जौहरी की पॉलिसी और दूसरी कटौतियों के कारण पूरी रकम वापस मिलना जरूरी नहीं है। इस तरह सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद आपका वास्तविक मुनाफा घट सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि गहने खरीदना गलत है। अगर आप करवा चौथ या धनतेरस पर पहनने के लिए गहने खरीद रहे हैं, तो यह आपकी जरूरत और पसंद का मामला है। लेकिन केवल निवेश के लिए गहने खरीदने से पहले दूसरे विकल्पों की लागत भी जरूर देखनी चाहिए।
अगर आप सोने को अपने पास रखना चाहते हैं, लेकिन गहनों पर अतिरिक्त खर्च नहीं करना चाहते, तो सोने के सिक्के और बार एक विकल्प हो सकते हैं। इनमें आम तौर पर गहनों जैसे मेकिंग चार्जेज नहीं लगते, हालांकि सिक्के या बार खरीदते समय भी प्रीमियम और दूसरे शुल्क लग सकते हैं। डॉ रवि के अनुसार, गहनों की तुलना में सिक्कों और बार में निवेश करने पर बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना हो सकती है, क्योंकि इनमें गहने बनाने का खर्च नहीं जुड़ता। लेकिन एक चुनौती और आती है। सोने को सुरक्षित रखना। घर में सोना रखने पर चोरी का जोखिम रहता है, जबकि बैंक लॉकर लेने पर उसका किराया देना पड़ सकता है।
अगर आप सोने की कीमतों में होने वाले बदलाव का फायदा लेना चाहते हैं, लेकिन घर में सोना रखने का झंझट नहीं चाहते, तो गोल्ड ETF पर विचार कर सकते हैं। ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड शेयर बाजार में खरीदे और बेचे जाते हैं। गोल्ड ईटीएफ का उद्देश्य सोने की कीमतों की परफॉर्मेंस के अनुरूप रिटर्न देना होता है। इसमें निवेशक को अपने पास सोने के सिक्के या बार रखने की जरूरत नहीं पड़ती। यहां आपको गहनों की तरह मेकिंग चार्ज नहीं देना पड़ता और सोने की सुरक्षा की अलग व्यवस्था भी नहीं करनी होती।
गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने के लिए आम तौर पर डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट की जरूरत होती है। निवेशक गोल्ड ईटीएफ के यूनिट शेयर बाजार में खरीद या बेच सकते हैं। हालांकि, ब्रोकरेज, फंड का खर्च और दूसरे लागू शुल्कों को ध्यान में रखना चाहिए। ध्यान रखें कि गोल्ड ईटीएफ में रिटर्न की गारंटी नहीं होती। सोने की कीमत गिरने पर निवेश का मूल्य भी घट सकता है। इसलिए सिर्फ पिछले कुछ महीनों में सोने की तेजी देखकर पैसा लगाना सही रणनीति नहीं है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश से पहले इन बातों पर ध्यान दें:
जो निवेशक सीधे शेयर बाजार में गोल्ड ईटीएफ की यूनिट नहीं खरीदना चाहते, उनके लिए गोल्ड फंड ऑफ फंड्स यानी गोल्ड FoF एक विकल्प है। गोल्ड FoF आम तौर पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं। यानी आप म्यूचुअल फंड के जरिए सोने की कीमतों से जुड़ा निवेश कर सकते हैं। इसमें सीधे सोने के गहने, सिक्के या बार खरीदने की जरूरत नहीं होती।
इसका एक फायदा यह है कि निवेशक म्यूचुअल फंड के सामान्य निवेश माध्यमों से इसमें पैसा लगा सकते हैं। कुछ योजनाओं में एकमुश्त निवेश के साथ सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की सुविधा भी मिलती है। हालांकि, न्यूनतम निवेश और उपलब्ध सुविधाएं संबंधित फंड की शर्तों पर निर्भर करती हैं। गोल्ड FoF चुनते समय यह देखना जरूरी है कि फंड का अपना खर्च कितना है और जिस ईटीएफ में वह निवेश करता है, उसका खर्च कितना है। दोनों स्तरों के खर्च से निवेशक का अंतिम रिटर्न प्रभावित हो सकता है। यहां निवेश से पहले इन बातों का ध्यान रखें:
डॉ रवि के अनुसार, अगर आप पहली बार सोने में निवेश करने जा रहे हैं, तो सबसे पहले अपना उद्देश्य तय करें। अगर सोना पहनने के लिए चाहिए, तो गहने खरीदना आपकी जरूरत के मुताबिक हो सकता है। लेकिन अगर मकसद निवेश है, तो गोल्ड ETF और गोल्ड FoF जैसे विकल्पों की लागत की तुलना करना उपयोगी रहेगा। नए निवेशकों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)