
चेन्नई। गुडलूर के ओ-वैली में नरभक्षी घोषित किए गए एक बाघ को पकड़ने के लिए राज्य वन विभाग ने अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है। यह बाघ 9 अगस्त को एम. बालकृष्णन (54) और 21 अगस्त को के. रविकुमार (51) की मौत के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। विभाग ने बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 82 कैमरा ट्रैप लगाए हैं और आसपास के क्षेत्र में 11 पिंजरे स्थापित किए हैं।
वन अधिकारी पी. देवराज ने बताया कि अभियान में मुदुमलै टाइगर रिजर्व और सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व के दो अनुभवी पशु चिकित्सकों को शामिल किया गया है। दोनों बाघ की गतिविधियों और उसके संभावित मार्गों का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ओ-वैली की कठिन भौगोलिक स्थिति अभियान के लिए चुनौती बनी हुई है। खराब मौसम ने भी अभियान को प्रभावित किया है। कोहरे के कारण दृश्यता 20 फीट से भी कम हो गई है। ऐसे में करीब 3 किलोमीटर के क्षेत्र में रणनीतिक रूप से पिंजरे लगाए गए हैं। इन पिंजरों में जीवित चारा रखा गया है।
अभियान के लिए गुडलूर वन विभाग के तीन पिंजरों के अलावा मुदुमलै टाइगर रिजर्व, नीलगिरि वन विभाग, केरल के वायनाड और कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व से भी पिंजरे लाए गए हैं। बाघ की पहचान के लिए अभी कोई विशेष कोड नहीं दिया गया है। फिलहाल उसे नर बाघ के रूप में संदर्भित किया जा रहा है। वन विभाग की टीम में डीएफओ, दो सहायक वन संरक्षक और छह वन परिक्षेत्र अधिकारियों सहित कुल 80 वनकर्मी तैनात हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश पर विभाग का विशेष बल भी मौके पर पहुंच चुका है। तीन थर्मल ड्रोन से हवाई निगरानी की जा रही है। एक अधिकारी ने बताया कि अधिकांश कर्मचारी रात में लौरिस्टन में नहीं रुकेंगे, ताकि बाघ को बिना किसी बाधा के क्षेत्र में आने का मौका मिल सके। अधिकारियों का कहना है कि बाघ को जल्द से जल्द पकड़ने की पूरी कोशिश की जा रही है, ताकि स्थानीय लोगों में व्याप्त डर को खत्म किया जा सके।
वहीं नीलगिरि जिले के गुडलूर विधानसभा क्षेत्र में बाघ के हमले में दो लोगों की मौत के बाद प्रमुख राजनीतिक दलों और व्यापारियों ने 27 और 28 अगस्त को दो दिवसीय बंद का आह्वान किया है। यह बंद वन विभाग से क्षेत्र में वन्यजीवों के हमले रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग को लेकर बुलाया गया है। डीएमके के गुडलूर विधायक के कार्यालय में आयोजित बैठक में भाजपा, कांग्रेस, वीसीके, सीपीआई, सीपीएम, एनटीके, डीएमडीके और एसडीपीआई सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इन दलों ने व्यापारियों, ऑटो और टैक्सी चालकों से बंद को सफल बनाने में सहयोग मांगा।