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‘जय जवान, जय किसान’ टैटू सेलिब्रेशन पर ध्रुव जुरेल का खुलासा, बोले- मेरे बैकग्राउंड में बहुत कुछ हुआ है

Dhruv Jurel on Jai Jawan Jai Kisan: कोलंबो में सोमवार को अपना शतक पूरा करने के बाद ध्रुव जुरेल ने अपना हेलमेट उतारा और अपना बल्ला उठाया। इसके बाद अपनी बाइसेप का टैटू दिखाया, जिस पर लिखा था, 'जय जवान, जय किसान।' इससे वैसे तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन जुरेल के लिए इसके मायने बहुत बड़े हैं।
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Aug 24, 2026
Dhruv Jurel on Jai Jawan Jai Kisan, IND vs SL 2nd Test,
कोलंबो में शतक जड़ने के बाद 'जय जवान, जय किसान' का टैटू दिखाते ध्रुव जुरेल। (फोटो सोर्स: एक्‍स@/BCCI)

Dhruv Jurel on Jai Jawan Jai Kisan: ध्रुव जुरेल ने कोलंबो टेस्‍ट के दूसरे दिन 99 से शतक तक पहुंचने के लिए 13 गेंदों का सामना किया। इस दौरान उनके द्वारा खेली गई हर गेंद को ड्रेसिंग रूम से कप्‍तान शुभमन गिल और हेड कोच गौतम गंभीर समेत सभी खिलाड़ी एकटक देख रहे थे। टेंशन भरे इंतजार के बाद आखिरकार असिथा फर्नांडो की गेंद पर जुरेल ने एक रन लेकर अपना दूसरा और श्रीलंका में 7वें नंबर पर उतरते पहला शतक लगाकर इतिहास रच दिया। ड्रेसिंग रूम से सभी ने उनके लिए तालियां बजाईं। वहीं, जुरेल अपना हेलमेट उतारकर बल्ला उठाते हुए जश्न मनाने के बाद अपनी आस्तीन ऊपर करके अपने बाएं बाइसेप का टैटू दिखाया, जिस पर लिखा था, 'जय जवान, जय किसान।' इसके मायने वैसे तो सभी भारतीय जानते हैं, लेकिन यह उनके लिए खास क्‍यों है? उन्‍होंने खुद बताया है।

'मेरे दादा किसान थे और मेरे पिता सैनिक'

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के एक्‍स अकाउंट से ध्रुव जुरेल का एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें वह टैटू को लेकर खुलासा कर रहे हैं। जुरेल ने बताया कि मेरे दादा किसान थे और मेरे पिता सैनिक थे। इसलिए वे मेरी जड़ें हैं, जहां से मैं आया हूं, मैं इसे भूलना नहीं चाहता, इसलिए वह सेलिब्रेशन मेरे पिता और दादा के लिए था। यह शतक मैं उन्‍हें डेडिकेट करता हूं। उन्होंने आगे कहा कि हर कोई देख सकता है कि मैं कैसे खेलता हूं, लेकिन मेरे बैकग्राउंड में बहुत कुछ हुआ है, जो उन्होंने किया है। उनके सपोर्ट के बिना कुछ भी मुमकिन नहीं होता।

अहमदाबाद में अर्धशतक के बाद मनाया था सैल्‍यूट वाला जश्‍न

बता दें कि पिछले साल अक्टूबर में जुरेल ने अहमदाबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ एक टेस्ट मैच में अर्धशतक पूरा करते हुए सैल्यूट करके जश्‍न मनाया था और अपने पिता को डेडिकेट किया था। उसी पारी में अपना पहला टेस्ट शतक पूरा करने के बाद उन्होंने उसे इंडियन आर्मी को डेडिकेट किया। जुरेल ने कहा कि फिफ्टी के बाद सैल्यूट मेरे पिता के लिए था, लेकिन शतक के लिए यह कुछ ऐसा था, जो मेरे दिमाग में बहुत लंबे समय से था। क्योंकि मैं इंडियन आर्मी के बहुत करीब रहा हूं, मैंने बचपन से अपने पिता को देखा है। हम मैदान पर जो करते हैं और वे युद्ध के मैदान में जो करते हैं, वह बहुत मुश्किल है, आप इसकी तुलना नहीं कर सकते।

'पंत के साथ मेरी बैटिंग अप्रोच आसान हो जाती है'

जुरेल ने कोलंबो में शतक के बाद कहा कि पंत के साथ मेरी बैटिंग अप्रोच आसान हो जाती है, क्योंकि जब आप एक छोर से रन बना रहे होते हैं, जैसे पंत खेल रहे हैं और सभी शॉट खेल रहे हैं, तो बॉलर सोच सकते हैं कि मैं उन्हें रन नहीं देना चाहता। इसलिए वह बस गलतियां करने की कोशिश करते हैं, जहां मैं रन बनाता हूं, इसलिए उनके साथ बैटिंग करना आसान है। उन्होंने कहा कि आखिरकार, हम एक ही देश के लिए खेल रहे हैं। चाहे वह रन बनाए, मैं रन बनाऊं, बस टीम जीतनी चाहिए और अगर वह रन बनाता है, तो मैं खुश हूं।

'मुझे इसकी आदत है'

उन्होंने आगे कहा कि मुझे इसकी आदत है, कंडीशन, वह गेम कभी-कभी, क्योंकि मैं वहां था। मैं इंडिया ए का दौरा कर रहा था, इसलिए मुझे सिचुएशन के बारे में पता है। बैटिंग करते समय मैं बस पार्टनरशिप में बैटिंग करने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि जैसा कि कोच ने कहा, कैप्टन ने कहा, वह हमेशा कहते हैं कि कंडीशन, सिचुएशन, आपसे क्या उम्मीद की जा रही है, इसका अंदाज़ा लगाने की कोशिश करो और पॉजिटिव होकर खेलो।

Updated on:
24 Aug 2026 09:39 pm
Published on:
24 Aug 2026 09:39 pm