ग्वालियर

डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र पर ग्वालियर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रद्द किया सरकारी फरमान

Doctors Retirement Age: मध्य प्रदेश में 20 साल क्लिनिकल सेवा दे चुके डॉक्टरों को 65 साल की उम्र तक काम करने का अधिकार है। ग्वालियर हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट का आदेश निरस्त किया।
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Oct 21, 2026
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Doctors Retirement Age: डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र पर ग्वालियर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (फोटो सोर्स- Patrika)

Gwalior High Court:ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने स्वास्थ्य विभाग के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए डॉक्टर (Doctors Retirement Age) की सेवानिवृत्ति के आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने ने स्पष्ट किया कि 20 साल की क्लिनिकल सेवा पूरी करने वाले चिकित्सा अधिकारी 65 वर्ष की आयु तक अपनी सेवाएं जारी रखने के हकदार हैं। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत ने याचिकाकर्ता डॉ. शिवराम सिंह कुशवाह की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें 65 साल की उम्र तक सेवा में बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

यहां समझे पूरा मामला

याचिकाकर्ता डॉ. कुशवाह की प्राथमिक नियुक्ति 1 अक्टूबर 2003 को मेडिकल ऑफिसर के पद पर हुई थी और 6 अक्टूबर 2007 को उनका नियमितीकरण हुआ। इसके बाद 10 फरवरी 2023 को वे पदोन्नत होकर चीफ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर बने। इस प्रकार उन्होंने 20 वर्ष की क्लिनिकल सेवा पूरी कर ली थी। इसके बावजूद शासन ने 4 जून 2026 को आदेश जारी कर उन्हें सेवानिवृत्त करने का निर्णय लिया था, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

शासन ने चुनौती दी, कोर्ट ने कोर्ट ने डॉक्टर के पक्ष में सुनाया फैसला

शासन की ओर से याचिका का विरोध किया, लेकिन वे यह साबित नहीं कर सके कि वर्तमान मामला पूर्व में तय किए गए मामलों से किस प्रकार भिन्न है। पूर्व के आदेशों में स्पष्ट किया गया था कि मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम, 1988 के तहत सहायक सर्जन और जिला स्वास्थ्य अधिकारी के पद मेडिकल व क्लिनिकल संवर्ग में आते हैं। प्रशासनिक पद पर पदोन्नति के बाद भी यदि किसी डॉक्टर ने 20 साल क्लिनिकल सेवा दी है, तो उसे 65 वर्ष की आयु तक कार्य करने की पात्रता है।

समान मामलों की नजीर पर मिला न्याय

याचिकाकर्ता के वकील राज बहादुर सिंह तोमर ने तर्क दिया कि यह विवाद पूर्व में डॉ. भूरे सिंह सात्य बनाम मध्य प्रदेश शासन सहित कई मामलों में तय हो चुका है। शासकीय अधिवक्ता राज्य शासन की ओर से इस मामले में कोई अलग तथ्य पेश नहीं कर सके। कोर्ट ने माना कि जब याचिकाकर्ता 65 वर्ष की आयु तक कार्य करने के लिए तैयार हैं और आवश्यक पात्रता पूरी करते हैं, तो उन्हें इस लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने 4 जून 2026 के विवादित आदेश को निरस्त कर दिया।

Updated on:
21 Oct 2026 07:28 am
Published on:
21 Oct 2026 07:28 am