
Gwalior High Court Reservation Merit Case: मध्य प्रदेश की ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने आरक्षण और मेरिट को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि 'अनारक्षित/ओपन कैटेगरी' सामान्य वर्ग का कोई आरक्षित कोटा नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह मेरिट आधारित पूल है, जिसमें सभी वर्गों के पात्र अभ्यर्थी शामिल हो सकते हैं। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत ने याचिकाकर्ता रेखा जाट की याचिका को स्वीकार करते हुए उनके चयन पर पुनर्विचार करने और पात्र पाए जाने पर 90 दिनों के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।
व्यापमं (अब ईएसबी) द्वारा आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा-2013 (सब-इंस्पेक्टर/सूबेदार/प्लाटून कमांडर) में ओबीसी वर्ग की अभ्यर्थी रेखा जाट शामिल हुई थीं। उन्होंने 200 में से 144 अंक हासिल किए थे। चयन सूची जारी होने पर पता चला कि ओबीसी महिला वर्ग का कट ऑफ 147 अंक रहा, जबकि सामान्य (अनारक्षित) महिला वर्ग का कट ऑफ 144 अंक था। अनारक्षित महिला वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी के बराबर अंक होने के बावजूद विभाग ने हॉरिजॉन्टल और कम्पार्टमेंट आरक्षण का हवाला देकर उन्हें केवल ओबीसी महिला वर्ग तक ही सीमित रखा और चयन से बाहर कर दिया। विभाग के 18 मार्च 2015 के आदेश को चुनौती देते हुए रेखा जाट ने एडवोकेट ऋषिकेश बोहरे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी आरक्षित वर्ग (ओबीसी/एससी/एसटी) के अभ्यर्थी ने अनारक्षित वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी के बराबर या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, तो उसे ओपन कैटेगरी में सीट मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के 7 नवंबर 2000 के सर्कुलर का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने आयु या अन्य किसी प्रकार की छूट (रिलैक्सेशन) लिए बिना सामान्य वर्ग के कट-ऑफ के बराबर अंक हासिल किए हैं, तो उसे ओपन मेरिट में आने से नहीं रोका जा सकता। शासन ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि याचिकाकर्ता ने कोई रियायत ली थी।