इंदौर

मौत तक पहुंचाने वाले डेंगू चिकनगुनिया की दवा इसलिए नहीं मिल रही

डेंगू, चिकनगुनिया की दवा...मरीज अगर दवाओं के ट्रायल के लिए तैयार नहीं है तो उस पर किसी भी तरह की जोर जबरदस्ती नहीं हो सकती।
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Oct 14, 2017
swine flu, Dengue and chickengunia

गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज में आयोजित सेमिनार में मुंबई से आई क्लीनिकल कंसल्टेंट अनुपमा पुनीत अय्यर ने कहा

इंदौर. मेडिकल ट्रायल नई दवाओं के लिए बेहद जरूरी है लेकिन ट्रायल तय नीतियों के आधार पर किए जाएं तभी यह उचित परिणाम देते हैं। यह बात मुंबई से आई कंसल्टेंट क्लीनिकल रिसर्च अनुपमा पुनीत अय्यर ने शनिवार को गवर्मेंट डेंटल कॉलेज में ‘ एथिक्स ऑफ डेंटिस्ट्री ’ विषय आयोजित सेमिनार में कही। अय्यर ने एथिकल क्लीनिकल ट्रायल से संबंधित जानकारी देते हुए बताया ट्रायल सिर्फ उन मरीजों पर ही किया जा सकता है जिनकी पूरी तरीके से ट्रायल के लिए मंजूरी प्राप्त हो, किसी भी स्थिति में मरीज अगर दवाओं के ट्रायल के लिए तैयार नहीं है तो उस पर किसी भी तरह की जोर जबरदस्ती नहीं हो सकती। ट्रायल से पूर्व मरीज को उन पर उपयोग होने वाली दवाओं व इलाज की अन्य प्रक्रियाओं के बारे में पूर्ण जानकारी देना अनिवार्य है। साथ ही मरीज की रजामंदी का वीडियो और ऑडियो रिकॉर्ड भी होना जरूरी है। इस मौके पर क्लिनिकल ट्रायल कमेटी की सदस्यों के रूप में रिटायर्ड डीन डॉ. एमके राठौर, सोशल वर्कर डॉ. जनक पलटा(पद्मश्री), जगत नारायण जोशी, कवि डॉ. सरोज कुमार के साथ ही डॉ. संध्या जैन, डॉ. अजय परिहार और डॉ. सविता व्यास उपस्थित थे।

डेंगू चिकनगुनिया का इलाज क्यों नहीं हो पा रहा
श्रीमती अय्यर ने कहा क्लीनिकल ट्रायल देश के लिए वरदान की तरह है। आज हम दवा के रूप में जो भी ले रहे हैं यह सब एक समय में ट्रायल से होकर ही गुजरा है। किसी ने कभी सोचा है कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के लिए दवाई क्यों नहीं उपलब्ध है क्योंकि ऐसी बीमारियों के प्रति ट्रायल की कमी रही है। सरकार को और आम जनता को ट्रायल के प्रति अपना नजरिया सकारात्मक रखना चाहिए।

क्लीनिकल ट्रायल संबंधित जानकारी स्टूडेंट तक पहुंचाने के लिए की पहल

गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ डेंटिस्ट्री के प्रिंसिपल डॉ. देशराज जैन ने बताया ट्रायल की नीतियां क्या है। यह जानने का सही समय कॉलेज का दौर ही होता है। इसलिए हमने स्टूडेंट्स के लिए खास ट्रेनिंग सेशन आयोजन किया है बच्चों में अनुसंधान की प्रवृत्ति को बढ़ावा देने के लिए भी ट्रायल की नीतियों को जानना जरूरी है। सेमिनार के बाद तैयार की गई रिपोर्ट और प्राप्त किया गया सर्टिफिकेट मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फेमली वेलफेयर को भेजा जायेगा जिसके बाद गवर्मेंट कॉलेज ऑफ डेंटिस्ट्री की एथिकस कमिटी रजिस्टर हो जाएगी और यहां भी छात्र ट्रायल कर सकेंगे।

Published on:
14 Oct 2017 09:36 pm