सरकार डस्ट को 'बजरीÓ बनाने की तलाश रही विकल्प, छोड़ी नदियों से बजरी खनन की उम्मीद, खनिजों के डस्ट को महीन कर बजरी की जगह करेंगे इस्तेमाल
जयपुर . प्रदेश में बजरी समस्या के गहराने और इसके चुनावी मुद्दा बनने की आशंका के बीच सरकार अब इसके विकल्प तलाशने में लग गई है। इसी कड़ी में सरकार प्रदेश में मिलने वाले खनिजों के डस्ट को महीन कर इसे बजरी का विकल्प बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। इसके लिए राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने एक समिति का गठन कर उसे 24 मई तक अपनी रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद पर्यावरण मंजूरी में बजरी खनन उलझने से सरकार की चुनावी वर्ष में मुश्किलें बढ़ गई है। बजरी के दर आसमान पर है और मकान बनाना आम आदमी के लिए महंगा हो गया है। वहीं सरकार की कई अहम परियोजनाओं का काम अटक गया है। ऐसे में सरकार ने नदी से बजरी खनन की उम्मीद छोड़ अब खनिजों और खनिज सवंद्र्धन उद्योगों से निकलने वाले अवशेषों से 'बजरीÓ बनाने पर विचार कर रही है। इसके लिए सरकार ने राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल और खनन व भूविज्ञान विभाग के अधिकारियों की एक समिति बनाई है। इस समिति को 24 मई तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। वहीं इस कार्य से जुडऩे वाले स्टोन क्रेशर संचालकों को सरकार खनिजों के अवशिष्टों को खपाने के लिए 5 से 10 रुपए प्रति टन सब्सिडी देने पर विचार हो रहा है।
समिति यह करेगी
-ऐसे क्या-क्या तरीके हो सकते हैं, जिससे प्रदेश में पाए जाने वाले खनिजों से ही बजरी बना
-इससे उभरकर सामने आने वाली पर्यावरणीय समस्याओं को कौन से तरीके अपनाकर दूर रखा जा सकता है
-समिति की सिफारिशों को लेकर एक कार्यशाला इसी माह में प्रस्तावित है, जहां विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे। इसमें खान, क्रशर, ग्राइंडिंग उद्योग, प्लांट सप्लायर्स सहित कई संबंधित क्षेत्रों के उद्यमी उपस्थित रहेंगे।
इन खनिजों से बन सकती है बजरी
ग्रेनाइट, सैंडस्टोन, बसाल्ट, क्वार्टजाइट, पीगामीटिज, चारनोकाइट, खोंडालाइटस सहित अन्य खनिज।
यह है तकनीकी अड़चन
खनिजों के अवशेषों को बारीक बनाना होगा। बजरी के कणों में उच्च क्रेशिंग से मजबूती लानी होगी और इसके कणों को समतल रखना होगा। ऐसी बजरी की गुणवत्ता को बनाए रखने पर ही लोग पसंद करेंगे, जिसके लिए बीआईएस द्वारा स्थापित मानक संबंधी गुणवत्ता की निगरानी के लिए समुचित संख्या में लैब भी तैयार करनी होगी।
इसमें नीतिगत अड़चन
सूत्रों ने बताया कि खनिजों से निकलने वाले अवशिष्ट मुख्यतया पत्थर खनन के स्थान पर धूल, स्टोन कटिंग यूनिट में कटिंग वेस्ट और खदान के मुहाने पर भारी मात्रा में उपलब्ध हैं। इसके उपयोग के लिए सरकार को पर्यावरणीय स्वीकृति में संशोधन करने की आवश्यकता होगी। आबादी को ध्यान में रखते हुए अभी स्टोन क्रेशर यूनिट को 1500 मीटर दूर रखा जाता है। खनिजों के अवशिष्टों को खपाने के लिए अभी कोई अनुदान या वित्तीय सहायता नहीं मिलती है, जबकि खनन विभाग द्वारा 5-10रुपए प्रति टन की सब्सिडी दी जा सकती है।
रिपोर्ट सौंपनी है
खनिजों से बजरी बनाने की योजना पर काम चल रहा है। इसकी तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने एक समिति बनाई है। जल्द ही इसकी रिपोर्ट सौंपनी है।
अजय कुमार गुप्ता, सदस्य सचिव, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल