10 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

नेशनल टेक्नोलॉजी डे -तकनीक में बढ़ती महिलाओं की भागीदारी

11 मई को मनाया जाने वाला नेशनल टेक्नोलॉजी डे केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस बदलते भारत की कहानी भी है जहां अब बेटियाँ प्रयोगशालाओं, अंतरिक्ष अभियानों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चिकित्सा अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों का नेतृत्व कर रही हैं। आज की छात्राएं केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ‘कक्षा से नवाचार’ की यात्रा तय कर देश के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Rakhi Hajela

May 10, 2026

NationalTechnologyDay

NationalTechnologyDay

लेखक- प्रो. हेमंत पारीक


कुछ दशक पहले तक विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र को पुरुष प्रधान माना जाता था। इंजीनियरिंग कॉलेजों, अनुसंधान प्रयोगशालाओं और तकनीकी कंपनियों में महिलाओं की संख्या बहुत कम दिखाई देती थी। परंतु आज भारत तेजी से बदल रहा है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में विज्ञान पढऩे वाली छात्राओं की संख्या निरंतर बढ़ रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत विश्व में महिला एसटीईएम(साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, मैथमैटिक्स) स्नातकों की बड़ी हिस्सेदारी रखने वाले देशों में शामिल है।
भारत की यह नई तस्वीर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। आज महिलाएं अंतरिक्ष विज्ञान से लेकर जैव प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। रितु खारिढाल जैसी वैज्ञानिकों ने चंद्रयान और मंगलयान अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय महिलाएं वैश्विक विज्ञान जगत में नेतृत्व करने की क्षमता रखती हैं। टेसी थॉमस को ‘मिसाइल वूमन ऑफ इंडिया’ कहा जाता है, जिन्होंने रक्षा अनुसंधान में भारत को नई ऊंचाइयाँ दीं। वहीं गगनदीप कंग ने चिकित्सा अनुसंधान और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
आज का भारत केवल ‘डिग्री प्राप्त करने’ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ‘समस्या का समाधान खोजने’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यही नवाचार की वास्तविक भावना है। गांवों में जल संरक्षण हेतु तकनीकी उपकरण विकसित करने वाली छात्राएं हों, कृषि में ड्रोन तकनीक का प्रयोग करने वाली युवा इंजीनियर हों या स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मोबाइल ऐप बनाने वाली बेटियां, हर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, डेटा विज्ञान और हरित ऊर्जा जैसे नए क्षेत्रों में भी महिलाएं प्रभावशाली नेतृत्व प्रस्तुत कर रही हैं। कई तकनीकी कंपनियां अब महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम चला रही हैं। वहीं देश के प्रमुख संस्थान छात्राओं को विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़ाने हेतु विशेष छात्रवृत्तियां और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रारंभ कर रहे हैं।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 की थीम ‘वूमेन इन सांइस: कैटेलाइसिंग विकसित भारत’ भी इसी सोच को दर्शाती है कि विकसित भारत का सपना महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता। विज्ञान और तकनीक केवल मशीनों का विकास नहीं करते, बल्कि समाज को नई दिशा भी देते हैं। जब महिलाएं इन क्षेत्रों में नेतृत्व करती हैं, तो संवेदनशीलता, सामाजिक समझ और मानव कल्याण की भावना भी तकनीकी विकास का हिस्सा बनती है।विशेष रूप से महिला महाविद्यालयों की भूमिका आज अत्यंत महत्तवपूर्ण हो गई है। ऐसे संस्थान केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे आत्मविश्वास, नेतृत्व और नवाचार की प्रयोगशालाएं बनते जा रहे हैं। यदि छात्राओं को उचित मार्गदर्शन, प्रयोगशाला सुविधाएं डिजिटल प्रशिक्षण और प्रेरणादायक वातावरण मिले, तो वे देश की तकनीकी क्रांति की सबसे मजबूत शक्ति बन सकती हैं।
आज आवश्यकता केवल यह कहने की नहीं है कि ‘बेटियां आगे बढ़ें’ बल्कि उन्हें अवसर, संसाधन और विश्वास देने की है। विज्ञान और तकनीक का भविष्य तभी उज्ज्वल होगा जब उसमें महिलाओं की बराबर भागीदारी होगी।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस हमें यही संदेश देता है कि भारत का भविष्य केवल तकनीकी रूप से शक्तिशाली नहीं, बल्कि समावेशी और संवेदनशील भी होना चाहिए। जब कक्षा में बैठी एक छात्रा अपने विचार को नवाचार में बदलती है, तभी वास्तव में राष्ट्र प्रगति करता है। इसलिए आज का समय यह कहने का है —‘महिलाएं केवल तकनीक का उपयोग नहीं कर रहीं, बल्कि वे भारत के तकनीकी भविष्य का निर्माण कर रही हैं।’ कम से कम पांच मुख्य हेडिंग लिखो इसके