10 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘पाकिस्तान’ से मिल रहे थे निर्देश, ग्वालियर में हाई-टेक कंट्रोल रूम से हो रहा था साइबर फ्रॉड

MP News: क्राइम ब्रांच को मुखबिर से सूचना मिली थी कि होटल एचजी के एक कमरे से संदिग्ध गतिविधियां चल रही है। जब पुलिस ने दबिश दी, तो वहां का नजारा किसी हाई-टेक कंट्रोल रूम जैसा था।

2 min read
Google source verification
cyber gang

cyber gang प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source- freepik)

MP News: शहर के पॉश इलाके कैलाश विहार स्थित होटल एचजी से क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार पाकिस्तान से जुड़े हैं। गिरोह न केवल बैंकिंग फ्रॉड को अंजाम दे रहा था, बल्कि मनी ट्रेल को उलझाने में भी माहिर था। पुलिस ने होटल के एक कमरे से एजेंटों को दबोचा है, जो नर्सिंग की पढ़ाई करते हुए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय अपराध में मोहरे बने हुए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन एजेंटों के मोबाइल पर 92 कंट्री कोड वाले पाकिस्तानी व्हाट्सएप नंबरों से सीधे निर्देश मिल रहे थे।

क्राइम ब्रांच को मुखबिर से सूचना मिली थी कि होटल एचजी के एक कमरे से संदिग्ध गतिविधियां चल रही है। जब पुलिस ने दबिश दी, तो वहां का नजारा किसी हाई-टेक कंट्रोल रूम जैसा था। आरोपी पिछले 10 दिनों से वहीं डेरा डाले हुए थे। जांच में पता चला कि ये एजेंट स्थानीय लोगों को चंद रुपयों का लालच देकर उनके बैंक खाते (जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है) खरीदते थे और उनका पूरा एक्सेस पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को सौंप देते थे। ठगी की रकम इन खातों में आते ही, उसे डार्क वेब या क्रिप्टो करेंसी के जरिए पलक झपकते ही ठिकाने लगा दिया जाता था।

नर्सिंग के छात्र बने ठग

पकड़े गए चारों आरोपी नर्सिंग के छात्र हैं। ग्वालियर के डीडी नगर निवासी अंकित गुर्जर, मुरैना के सौरभ श्रीवास, राजस्थान के धौलपुर निवासी अजय शर्मा और सौरभ सेजवार की दोस्ती पढ़ाई के दौरान हुई। मुरैना के ही सौरभश्रीवास के माध्यम से ये सभी इस दलदल में फंसे। जिस नंबर से उन्हें निर्देश मिल रहे वह एजेंट के मोबाइल में बड़े भैया के नाम से सेव था। पुलिस के मुताबिक, यह बड़ा भैया ही इस गिरोह का पाकिस्तानी मास्टरमाइंड हो सकता है, जिसकी तलाश जारी है।

यह एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है। आरोपियों के पास से मिले पाकिस्तानी व्हाट्सएप चैट और एटीएम कार्ड बड़े वित्तीय अपराध की ओर इशारा कर रहे हैं। हम ट्रांजेक्शन की कड़ियां जोड़ रहे हैं और जल्द ही मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त में होगा। यह गिरोह बैंकिंग फ्रॉड के साथ-साथ मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े रैकेट में शामिल है।- धर्मवीर सिंह, एसएसपी, ग्वालियर

म्यूल अकाउंट का खेल एक खाता, लाखों की ठगी

साइबर ठग अपनी पहचान छुपाने के लिए खुद के बैंक खातों का इस्तेमाल नहीं करते। वे भोले-भाले लोगों को कुछ हजार रुपयों का लालच देकर उनके खाते, चेकबुक और एटीएम कार्ड अपने कब्जे में ले लेते हैं। इन खातों में ठगी का पैसा मंगाया जाता है, जिसे बाद में अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए गायब कर दिया जाता है। पकड़े गए आरोपियों के पास से 9 विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड, दर्जनों मोबाइल और लैपटॉप जब्त किए गए है।