
जूली अनेजा
ग्वालियर। मातृत्व केवल जन्म देने से परिभाषित नहीं होता, बल्कि वह उस करुणा का नाम है, जो पराई कोख से जन्मी बच्चियों को भी अपना कलेजा बना ले। ग्वालियर की जूली अनेजा की कहानी इस मदर्स डे पर मातृत्व की एक ऐसी ही मिसाल पेश कर रही है। उनके अपने दो बेटे सात समंदर पार कनाडा में बस गए हैं, लेकिन उनके घर का आंगन सूना नहीं है। जूली आज उन अनाथ और जरूरतमंद बेटियों की यशोदा बनी हुई हैं, जिन्हें समाज ने अकेला छोड़ दिया था। मदर्स डे पर जूली अनेजा का यह ममता अवतार समाज के लिए एक बड़ा संदेश है कि मां का आंचल इतना बड़ा होता है कि उसमें पूरी दुनिया की बेसहारा बेटियां समा सकती हैं।
बचपन का सपना, भजनों ने दिया सहारा
मिडिल क्लास परिवार में जन्मी जूली के मन में बचपन से ही असहाय बच्चियों के लिए गहरी सहानुभूति थी। लेकिन शादी और बच्चों की जिम्मेदारी के बीच यह सपना कहीं दब गया था। जूली ने घर की हाउस हेल्प, कॉलोनी के चौकीदारों और झुग्गी-झोपड़ी की बच्चियों की मदद से शुरुआत की। जब पैसों की कमी आड़े आने लगी, तो उन्होंने अपने पति पर निर्भर रहने के बजाय मां सरस्वती से मिले वरदान का सहारा लिया। जूली की आवाज में वह कशिश थी कि लोग उनके भजनों के मुरीद हो गए। उन्होंने अपनी सहेलियों के साथ एक भजन मंडली बनाई। भजनों से जो भी मानदेय या राशि मिलती, उसे जूली अपने घर खर्च के बजाय हजीरा स्थित शांति निकेतन आश्रम की बच्चियों पर खर्च करने लगीं।
2018 में बदली जिंदगी : जब घर बना आश्रम
आश्रम में बच्चियों की सेवा के दौरान जूली की मुलाकात डब्ल्यूसीडी अधिकारी शालीन शर्मा से हुई। उन्होंने एक ऐसा सुझाव दिया, जिसने जूली की जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बदल दिया। अधिकारी ने कहा, "आप इन्हें अपने घर में ही क्यों नहीं रख लेतीं?" जूली ने पति को मनाया और साल 2018 में दो बच्चियों को अपने घर ले आईं। वह कारवां, जो दो से शुरू हुआ था, आज एक संस्था का रूप ले चुका है।
10 बेटियों का कन्यादान, अब तक जारी है कारवां
जूली केवल इन बच्चियों को छत नहीं देतीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाती हैं।
सफलता की गूंज : जूली द्वारा पाली गई दो बेटियां आज भोपाल और इंदौर में बड़े ब्रांड्स में सम्मानजनक पदों पर कार्यरत हैं।
पुण्य का सौभाग्य : अब तक वह 10 बच्चियों का पूरे रीति-रिवाज से कन्यादान कर चुकी हैं।
वर्तमान : आज भी उनके घर में 4 बेटियां पल रही हैं, जिनकी पढ़ाई से लेकर परवरिश तक की जिम्मेदारी जूली अकेले निभा रही हैं।
कनाडा में बेटे, पर ये बेटियां हैं जान
अजीब इत्तेफाक है कि जूली के अपने दो सगे बेटे आज करियर की ऊंचाइयों पर कनाडा में हैं। एक मां के लिए घर सूना हो सकता था, लेकिन जूली ने अपना घर उन बेटियों के नाम कर दिया, जिनका कोई नहीं था। जूली कहती हैं, "ईश्वर जब तक इस देह को स्वस्थ रखेगा, मैं इन बच्चियों की सेवा जारी रखूंगी। मेरे लिए मदर्स डे का मतलब ही इन बेटियों की मुस्कुराहट है।"
Published on:
10 May 2026 06:04 pm
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