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फेसबुक वाली ‘विदेशी मेम’ ने ठेकेदार को लगाया चूना, लंदन बुलाने के नाम पर ठगे लाखों

mp news: पाउंड के लालच में फेसबुक वाली विदेशी महिला ने ठेकेदार से लूटे 1.23 लाख रुपए। लंदन से भारत आने का किया था वादा।

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facebook foreign woman frauds contractor 1 lakh 23 thousand in the pretext of london visit mp news

facebook foreign woman frauds contractor 1 lakh 23 thousand (फोटो- Freepik)

mp news: मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक बड़ी साइबर ठगी का मामला सामने आया है। फेसबुक पर विदेशी मेम से दोस्ती करना ग्वालियर के एक ठेकेदार एक विदेशी 'एंजेल प्रिया मेम' के जाल में ऐसा फंसा की सवा लाख रुपए की चपत लगा गया। विदेशी महिला ने पहले मीठी बातों से दोस्ती के जाल में फंसाया, फिर साथ घूमने और करोड़ों की विदेशी करेंसी का लालच देकर एयरपोर्ट क्लीयरेंस के नाम पर 1 लाख 23 हजार 600 रुपए ठग लिए। ठगी का यह खेल तब उजागर हुआ जब जालसाजों ने सवा लाख हड़पने के बाद 70 हजार रुपए की और मांग कर दी। झांसी रोड थाना पुलिस ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर हुई शिकायत के बाद अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

हरिशंकरपुरम निवासी 28 वर्षीय कमलकांत यादव (ठेकेदार) के पास 24 अप्रेल को लकी चार्ल्स नाम की फेसबुक आइडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। दोस्ती होने के बाद बातचीत व्हाट्सएप पर शिफ्ट हो गई, जहां ठग महिला ने खुद को लंदन की डॉ. पेट्रीशिया आर मेडिसन बताया। महिला ने कमलकांत का भरोसा जीतने के लिए वादा किया कि वह जल्द ही भारत घूमने आएगी और उससे मिलेगी।

करोड़ों का लालच… और ऐसे बिछाया जाल

जालसाज महिला ने कमलकांत को बताया कि उसके पास 95 हजार ब्रिटिश पाउंड (करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए) हैं, जिन्हें वह भारतीय करेंसी में बदलवाना चाहती है। 27 अप्रेल को कमलकांत के पास मुंबई एयरपोर्ट के कथित कर्मचारी का फोन आया। फोन करने वाले ने कहा कि विदेशी करेंसी के रजिस्ट्रेशन और प्रोसेस के लिए शुल्क देना होगा। विदेशी दोस्त के चक्कर में कमलकांत ने बिना सोचे-समझे अलग-अलग किस्तों में पहले 38,500 रुपए और फिर लॉन्ड्री चार्ज के नाम पर 88,600 रुपए बताए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।

जब ठनका माथा: 70 हजार की और मांग

सवा लाख रुपए ऐंठने के बाद ठगों की भूख और बढ़ गई। उन्होंने फाइल क्लीयरेंस के नाम पर 70 हजार रुपए की और डिमांड की। इतनी बड़ी रकम भेजने के बाद भी जब काम नहीं हुआ और दोबारा पैसों की मांग हुई, तब कमलकांत को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत मामले की शिकायत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर की।