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‘शाही महलों’ में मजदूरों का बसेरा: शाहजहां महल में सुलग रहे चूल्हे, जहांगीर महल बना रैनबसेरा!

कहते हैं कि स्मारकों में इतिहास बोलता है, लेकिन ग्वालियर दुर्ग स्थित जहांगीर और शाहजहां महल में इन दिनों इतिहास नहीं, बल्कि मजदूरों की रसोई का तड़का और बच्चों का शोर सुनाई दे रहा है। मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के सख्त नियम जो कहते हैं कि सूर्यास्त के बाद स्मारकों में परिंदा भी पर नहीं मार सकता, उन्हें ठेंगे पर रखकर आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) ने इस ऐतिहासिक धरोहर को रिहायशी कॉलोनी में तब्दील कर दिया है।

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जहांगीर महल में रखी लकड़िया व पानी की टंकी।

ग्वालियर. कहते हैं कि स्मारकों में इतिहास बोलता है, लेकिन ग्वालियर दुर्ग स्थित जहांगीर और शाहजहां महल में इन दिनों इतिहास नहीं, बल्कि मजदूरों की रसोई का तड़का और बच्चों का शोर सुनाई दे रहा है। मध्य प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग के सख्त नियम जो कहते हैं कि सूर्यास्त के बाद स्मारकों में परिंदा भी पर नहीं मार सकता, उन्हें ठेंगे पर रखकर आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम (एकेसीएसएफ) ने इस ऐतिहासिक धरोहर को रिहायशी कॉलोनी में तब्दील कर दिया है। पिछले कुछ समय से एजेंसी के कर्मचारी यहां दुर्ग के अलग-अलग हिस्सों में रिनोवेशन का कार्य कर रहे हैं। स्मारकों को संवारने का जिम्मा उठाने वाला फोरम खुद ही स्मारक की मर्यादा को धुएं में उड़ा रहा है। अब देखना यह है कि राज्य पुरातत्व विभाग इन शाही मेहमानों को महल से बाहर करता है या नियमों की बलि चढ़ती रहेगी।

प्रतिबंध केवल कागजों पर, महल में पिकनिक सा नजारा

विभागीय आदेशों के अनुसार, संरक्षित स्मारकों में रात के समय किसी भी श्रमिक या कर्मचारी का ठहरना पूर्णत: वर्जित है। यहां भोजन भी नहीं पकाया जा सकता। इसके बावजूद जहांगीर और शाहजहां महल के भीतर 40 से अधिक कर्मचारी न केवल रात गुजार रहे हैं, बल्कि सपरिवार डेरा जमाए हुए हैं। जिस महल की दीवारों को सहेजने के लिए करोड़ों का बजट खर्च हो रहा है, उसी के भीतर लकडिय़ों के चूल्हे सुलग रहे हैं। चूल्हे से निकलता धुआं और नमी प्राचीन पत्थरों की उम्र घटा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में हैं।

अवैध आवासीय परिसर बना जहांगीर व शाहजहां महल

हैरत की बात यह है कि किले पर सुरक्षा का भारी-भरकम लवाजमा होने के बावजूद आगा खान कल्चरल सर्विसेज फोरम के कर्मचारी यहां बेखौफ रह रहे हैं।
-परिवार सहित डेरा : महल के कमरों को बेडरूम बना लिया गया।
-धुएं की मार : रसोई गैस के बजाय लकड़ियों का इस्तेमाल हो रहा है, जिससे कालिख की परतें बेशकीमती नक्काशी को धूमिल कर रही हैं।
-सुरक्षा पर सवाल : रात के समय बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी से स्मारक की सुरक्षा व उसकी गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच के लिए आदेश देंगे

मेरे पास ऐसी कोई बात अभी तक नहीं आई है लेकिन आपने अवगत कराया तो इसकी जांच के लिए आदेश देंगे। इसके लिए आप स्थानीय प्रभारी उप संचालक पीसी महोबिया से भी बात कर सकते हैं।
-डॉ. मनीषा शर्मा, पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय मप्र कार्यालय प्रमुख