राजधानी के दोनों नगर निगम पार्किंग शुल्क भी अलग-अलग वसूल रहे हैं। स्थिति यह है कि हैरिटेज निगम ज्यादा और ग्रेटर निगम कम राशि वसूल रहा है। परकोटा क्षेत्र की पार्किंग में वाहन खड़ा करना महंगा है। वहीं, बाहर के पार्किंग स्थलों में पार्किंग दर कम है। ग्रेटर निगम ने मालवीय नगर पुलिया के पास […]
राजधानी के दोनों नगर निगम पार्किंग शुल्क भी अलग-अलग वसूल रहे हैं। स्थिति यह है कि हैरिटेज निगम ज्यादा और ग्रेटर निगम कम राशि वसूल रहा है। परकोटा क्षेत्र की पार्किंग में वाहन खड़ा करना महंगा है। वहीं, बाहर के पार्किंग स्थलों में पार्किंग दर कम है।
ग्रेटर निगम ने मालवीय नगर पुलिया के पास जिस पार्किंग की निविदा निकाली, उसमें दो पहिया वाहन के 10 से लेकर 30 रुपए, चार पहिया वाहन के 20 से लेकर 50 रुपए निर्धारित किए। वहीं, हैरिटेज निगम ने किशनपोल बाजार की निविदा जारी की है और बोली की दर 28 लाख रुपए निर्धारित की है। दो घंटे ही गाड़ी खड़ी कर सकेंगे। इसके लिए दो पहिया के 10 और चार पहिया के 50 रुपए निर्धारित किए हैं। इसके अलावा जौहरी बाजार में जो पार्किंग हैरिटेज निगम संचालित करवा रहा है, वहां भी यह किराया निर्धारित है। हालांकि, दो घंटे के बाद चार पहिया वाहन प्रति घंटा 100 रुपए शुल्क का प्रावधान किया है।
पत्रिका व्यू
मनमानी की शर्तें...आखिर क्यों?
पार्किंग में माफिया राज बढ़ रहा है। उससे राजस्व शाखा के अधिकारी भी अछूते नहीं हैं। मालवीय नगर पुलिया के पास जो पार्किंग पहले तीन लोग संचालित करते थे, उसको एक कर दिया गया। शर्तें इतनी कठिन कर दी कि हर कोई टेंडर में हिस्सा ही नहीं ले सके। यही हाल हैरिटेज निगम ने जौहरी बाजार में किया। आखिर निगम मनमानी की शर्तें कब तक बनाते रहेंगे? कब तक शहरवासियों से पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली होती रहेगी। शहरी सरकारों को एक पार्किंग शुल्क तय करना चाहिए ताकि शहरवासी असमंजस में न पड़ें।