जयपुर

जयपुर नगर निगम: महापौर की कुर्सी बनी विधानसभा का ‘लॉन्चिंग पैड’, 3 मेयर बने MLA, पर पार्षदों में सिर्फ एक को मिली विधायकी

Jaipur Mayor to MLA Journey: जयपुर नगर निगम से विधानसभा तक का सियासी सफर बेहद दिलचस्प रहा है। जहां तीन महापौर विधायक बने, वहीं पार्षदों में सिर्फ सुरेंद्र पारीक ही यह मुकाम हासिल कर सके।
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Aug 25, 2026
jaipur mayor to mla journey
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जयपुर. जयपुर नगर निगम में पार्षद बनने वालों की फेहरिस्त लंबी है, लेकिन विधानसभा तक पहुंचने वालों की सूची बेहद छोटी। और इस छोटी सूची में भी एक दिलचस्प फर्क है कि महापौर रहे तीन नेताओं ने विधानसभा का टिकट पाया और जीतकर पहुंचे, जबकि पार्षद से विधायक बनने का कारनामा अब तक एक ही नेता कर सका। मोहनलाल गुप्ता, अशोक परनामी और अशोक लाहोटी के लिए महापौर की कुर्सी प्रदेश की राजनीति का लॉन्चिंग पैड बनी। वहीं सुरेंद्र पारीक ने पार्षद रहते हुए दो बार यह दूरी तय की। बाकी कई पार्षद चुनाव लड़े जरूर, लेकिन विधानसभा की चौखट पार नहीं कर सके।

तीन बार विधायक बने शहर के पहले महापौर

राजधानी के पहले महापौर मोहनलाल गुप्ता ने शहर की सरकार चलाने के बाद किशनपोल विधानसभा क्षेत्र से राज्य की राजनीति में कदम रखा और तीन बार विधायक बने। वर्ष 2003 में पहली बार विधानसभा पहुंचे और अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई। भाजपा महिला मोर्चा की मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौड़ पिछले बोर्ड में पार्षद रह चुकी हैं। सुमन शर्मा भी राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर रहीं।

दो बार बने विधायक

इसके बाद अशोक परनामी ने भी महापौर पद से आगे बढ़ते हुए विधानसभा की राजनीति में जगह बनाई। आदर्श नगर से भाजपा के टिकट पर उन्होंने 2008 और 2013 में जीत हासिल की। बाद में वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। यानी महापौर की जिम्मेदारी ने उनके लिए प्रदेश राजनीति का रास्ता और मजबूत किया।

महापौर रहते टिकट, जीते भी...रिपीट नहीं

अशोक लाहोटी इस कड़ी का अहम हिस्सा हैं। महापौर रहते हुए उन्होंने सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हालांकि, बाद में पार्टी ने उनकी टिकट को रिपीट नहीं किया।

चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली

  • शील धाभाई महापौर रहीं। भाजपा ने वर्ष 2008 में उन्हें कोटपूतली से विधानसभा चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
  • जयपुर नगर निगम में ज्योति खंडेलवाल एकमात्र कांग्रेस की महापौर रहीं। वह पहली बार सीधे चुनाव में महापौर निर्वाचित हुईं। पिछले लोकसभा चुनाव में जयपुर से कांग्रेस उम्मीदवार बनीं, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। अब वें भाजपा ज्वाइन कर चुकी हैं
  • अर्चना शर्मा पार्षद रहीं और मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से दो बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, जीत नहीं मिली। वे समाज कल्याण बोर्ड की चेयरमैन रहीं।
  • हरीश यादव ने झोटवाड़ा से विधानसभा का चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।
  • विक्रम सिंह शेखावत पहले पार्षद रहे। बाद में विद्याधर नगर विस क्षेत्र से दो बार निर्दलीय चुनाव लड़े। हालांकि, जीत नसीब नहीं हुई।

3.73 लाख मतदाता 60 पार

18 हजार 85 पार को होम वोटिंग सुविधा नहीं

लोकसभा चुनाव में 85 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, गंभीर बीमारी से ग्रसित मतदाताओं और दिव्यांग मतदाताओं को घर से मतदान की सुविधा मिली थी। अब जयपुर नगर निगम चुनाव में ऐसे मतदाताओं को मतदान केंद्र पर पहुंचकर ही वोट डालना होगा। जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 3.73 लाख मतदाता 60 उम्र पार हैं, इनमें करीब 18 हजार मतदाता ऐसे हैं जो 85 उम्र से अधिक हैं।

महिला 1.84 लाख जयपुर नगर निगम में कुल 3 लाख 73 हजार 28 बुजुर्ग मतदाता हैं। पुरुष बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या 1 लाख 88 हजार 400 और महिला बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या 1 लाख 84 हजार 628 है। यानी बुजुर्गों की संख्या भी चुनावी लिहाज से बड़ा वोट बैंक है।

औसतन हर वार्ड में 2,487 बुजुर्ग: बुजुर्ग मतदाताओं का औसत करीब 2,487 प्रति वार्ड है। ऐसे वार्डों में मतदान के दिन बूथ तक पहुंचने की सुविधा और परिवहन महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

वार्ड 90 में सबसे ज्यादा वार्डवार आंकड़ों में बुजुर्ग मतदाताओं की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया है। वार्ड 90 में सबसे ज्यादा 5,124 बुजुर्ग मतदाता हैं। इसके बाद वार्ड 100 में 4,219, वार्ड 99 में 4,216 और वार्ड 101 में 4,022 बुजुर्ग मतदाता हैं। तीन हजार से अधिक बुजुर्ग मतदाताओं वाले 38 वार्ड हैं। इसके उलट वार्ड 93 में सबसे कम सिर्फ 815 बुजुर्ग मतदाता हैं।

वोटर लिंक...चंदे का क्यूआर कोड चुनाव साइबर ठगों का नया जाल

नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनाव के बीच राजस्थान पुलिस ने फर्जी लिंक, ओटीपी, क्यूआर कोड, फिशिंग ई-मेल और डीपफेक सामग्री को लेकर एडवाइजरी जारी की है। साइबर ठग वॉट्सऐप या एसएमएस पर ‘वोटर लिस्ट में अपना नाम देखें’ या ‘आपका मतदान केंद्र बदल गया है’ जैसे संदेश भेजकर फर्जी लिंक पर क्लिक करा सकते हैं। वोटर कार्ड अपडेट, सत्यापन या चुनावी प्रक्रिया के नाम पर फोन करने वाला व्यक्ति खुद को अधिकारी बताए, तब भी ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी या यूपीआई पिन साझा न करें। प्रत्याशी और कार्यकर्ता टू-स्टेप वेरिफिकेशन सक्रिय रखें और मजबूत पासवर्ड इस्तेमाल करें। चुनावी चंदे के नाम पर मिले यूपीआई लिंक या क्यूआर कोड की जांच करें।

हेल्पलाइन नंबर: ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें। साइबर हेल्पडेस्क 9256001930 और 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है।

दो वार्ड समूहों के नामांकन केंद्र बदले

जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक ने दो वार्ड समूहों वार्ड 31-40 और वार्ड 111-120 के नामांकन केंद्र बदल दिए हैं। वार्ड 31 से 40 के प्रत्याशियों के लिए रिटर्निंग ऑफिसर का कार्यालय अब शहीद मेजर दिग्विजय सिंह सुमाल राजकीय विद्यालय, खातीपुरा में संचालित होगा। पहले यह श्रीमती कमला देवी बुधिया राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, हीरापुरा चौराहा में निर्धारित था। वार्ड 111 से 120 के प्रत्याशियों को नगर निगम पार्ट-2, जलेबी चौक (हवामहल के पीछे) स्थित कार्यालय जाना होगा। पूर्व में नगर निगम किशनपोल जोन उपायुक्त कार्यालय, घाटगेट को नामांकन केंद्र बनाया गया था।

Updated on:
25 Aug 2026 08:08 am
Published on:
25 Aug 2026 08:05 am