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वसुंधरा, गहलोत और अब भजनलाल सरकार- राजस्थान में ‘खोखला’ साबित हो रहा ये दावा, CAG रिपोर्ट में खुलासा

Rajasthan Fiscal Deficit Crisis: सीएजी (CAG) की ताजा रिपोर्ट में राजस्थान के वित्तीय प्रबंधन की खुली पोल। वसुंधरा, गहलोत से लेकर भजनलाल सरकार तक 12 वर्षों में लगातार बढ़ा राजकोषीय घाटा।
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Ex CM Vasundhara Raje and Ashok Gehlot, CM Bhajan Lal Sharma (File PIC)

पिछले 12 वर्षों में पहले वसुंधरा सरकार, फिर गहलोत और अब भजनलाल सरकार... राज्य में सरकारें तो बदलीं, लेकिन वित्तीय अनुशासन लगातार बेपटरी है। सरकारों ने घाटे को लगातार तय सीमा के भीतर बनाए रखने के लिए लक्ष्य तय कर उन्हें हासिल करने के प्रयासों के दावे तो किए, लेकिन हकीकत इसके विपरीत ही रही। 12 वर्षों में एक भी साल ऐसा नहीं रहा, जब राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के भीतर सिमटा हो। केंद्रीय वित्त आयोग ने भी जो लक्ष्य तय किए, राज्य का घाटा बजट अनुमान और वास्तविक स्थिति दोनों ही मामलों में उससे ऊपर रहा।

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की ताजा रिपोर्ट में स्थिति पर चिंता जाहिर करते खुलासा किया है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से 2024-25 तक एक वर्ष ही ऐसा रहा, जब राजकोषीय घाटा 3.04 प्रतिशत रहा। एक वर्ष तो यह उछलकर 9 प्रतिशत के पार तक जा पहुंचा। उसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं आ रहा। सीएजी ने इस स्थिति को लेकर राजकोषीय अनुशासन के संबंध में सरकार की नीतियों और दावों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

सीएजी ने पकड़ी कमजोरी

  • राजस्व प्राप्ति में वृद्धि हुई, लेकिन बजट अनुमान की तुलना में कम रही।
  • राज्य की वित्तीय स्थिति की केंद्र सरकार पर काफी अधिक निर्भरता रही।

सीएजी-सरकार के आंकड़े: घाटा लगातार लक्ष्य से ज्यादा रहा, 12 साल पहले पहुंचा 9.25% के रिकॉर्ड स्तर पर

इस वित्तीय स्थिति के मायने

राजस्व अधिशेष बनाए रखने का लक्ष्य था, लेकिन राजकोषीय लक्ष्य प्राप्त नहीं होने से राजस्व घाटा बना रहा। राजस्व व्यय पूरा करने के लिए लगातार उधारी पर निर्भरता रही। पिछले वर्षों में राजकोषीय घाटा 3.04 से 9.25 प्रतिशत के बीच रहा।

2011 में राजस्व घाटा शून्य करने का निर्णय

राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंध (संशोधन) अधिनियम, 2011 में तय किया कि राजस्व घाटा शून्य पर लाकर राजस्व अधिशेष की स्थिति लाई जाएगी। राजकोषीय घाटा वर्ष 2011-12 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3% या उससे नीचे लाने का निर्णय किया गया। इसके बाद राज्य में केवल वर्ष 2011-12 व 2012-13 में राजस्व अधिशेष रहा। उसके बाद लगातार घाटे की स्थिति रही।

12 वर्ष में राज्य की वित्तीय स्थिति

वर्षराजकोषीय घाटा
■ 2015-169.25
■ 2016-176.09
■ 2017-183.04
■ 2018-193.78
■ 2019-203.77
■ 2020-215.83
■ 2021-224.03
■ 2022-233.76
■ 2023-244.31
■ 2024-254.25
■ 2025-263.89 (संशोधित अनुमान)
■ 2026-273.69 (बजट अनुमान)

सरकार की आगामी तैयारी

(राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंध रिपोर्ट के अनुसार)

  • ■ 2027-28 : 3.49
  • ■ 2028-29 : 3.29(सभी आंकड़े प्रतिशत में)

समाधान: सीएजी ने कहा यह करे राजस्थान

  • वित्त विभाग त्रैमासिक राजस्व पूर्वानुमान समीक्षा तंत्र स्थापित करे, जिससे स्वयं के कर राजस्व के अनुमान प्राप्त हो सकें।
  • संशोधित बजट अनुमान के लिए विभागवार विश्लेषण किया जाए और सुधारात्मक उपायों को प्राथमिकता दी जाए।
  • राज्य का स्वयं का कर राजस्व एवं जीएसडीपी अनुपात बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार हो, जिससे वार्षिक लक्ष्य तय हों।
  • ओपीएस के तहत पेंशन भुगतान के लिए विशेष फंड बनाया जाए।
  • विभागवार अनुदान ट्रैकिंग के लिए डैशबोर्ड तैयार हो।
  • राजस्व व्यय के प्रमुख मदों के लिए परिणाम आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।
  • ब्याज का बोझ कम करने के लिए ऋण का नए सिरे से प्रबंधन किया जाए।
  • सभी तरह के सेश की राशि तय सरकारी खातों में समय पर जमा हो।
  • राज्य सरकार उधारी की राशि से पूंजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण करे, न कि राजस्व खर्च की पूर्ति की जाए।