जयपुर

700 साल पुराने मानस्तंभ आज भी बने आस्था और इतिहास के साक्षी

Aug 25, 2026
Rajasthan

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
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बनेठा. क्षेत्र के सूंथड़ा स्थित मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र में मौजूद पुरातन विशाल मानस्तंभ आज भी जैन धर्मावलंबियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। अपनी प्राचीनता, धार्मिक मान्यताओं और अद्भुत शिल्पकला के कारण यहां स्थापित तीन पाषाण मानस्तंभ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। स्थानीय परंपरा एवं जनश्रुतियों के अनुसार ये मानस्तंभ करीब 700 वर्ष पुराने हैं। मान्यता है कि प्रत्येक वर्ष ये चावल के एक दाने के बराबर जमीन में धंसते जा रहे हैं। यही वजह है कि पहले दूर से दिखाई देने वाले ऊंचे मानस्तंभ अब परिसर के भीतर से ही स्पष्ट दिखाई देते हैं। वर्तमान में भी इनका काफी हिस्सा जमीन के अंदर है। इनके नीचे वास्तविक गहराई कितनी है, यह आज भी जिज्ञासा का विषय बना हुआ है।
जैन नसियां से बना विशाल तीर्थ क्षेत्र : सुखोदय अतिशय क्षेत्र के प्रवक्ता संतु जैन ने बताया कि पूर्व में यह स्थान मानस्तंभों की भव्यता के कारण जैन नसियां के नाम से जाना जाता था। 10 फरवरी 2010 को मुनि सुधासागर महाराज के सूंथड़ा में मंगल प्रवेश के बाद उन्होंने इस स्थल की आध्यात्मिक महत्ता को महसूस करते हुए इसे महत्वपूर्ण तपस्थली बताया। इसके बाद प्राचीन एवं जीर्ण-शीर्ण नसियां का विकास हुआ और यह आज विशाल मुनिसुव्रतनाथ सुखोदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध है। यहां भगवान मुनिसुव्रतनाथ के दर्शन, अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। तीर्थ क्षेत्र में विभिन्न धार्मिक आयोजनों के साथ वार्षिक मेले का भी आयोजन होता है।

Updated on:
25 Aug 2026 06:00 am
Published on:
25 Aug 2026 06:00 am