
गुढ़ाचंद्रजी. कस्बे के माली मोहल्ले में कुंड वाला प्राचीन शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ कलात्मक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी महत्वपूर्ण है। सावन के महीने में मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा है। शिव भक्त बिल्व पत्र अर्पित करने के साथ रुद्राभिषेक, सहस्र घट, जलाभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन कर रहे हैं। बुजुर्गों के अनुसार गुढ़ाचंद्रजी रियासतकालीन कस्बा है। बताया जाता है कि चंद्रजी राजा ने कस्बे में किले, गढ़, बावड़ी और कुंड का निर्माण करवाया था। इसी कुंड के ऊपर भगवान भोलेनाथ का मंदिर बनवाया गया, जिसमें प्राचीन शिवलिंग विराजमान है। मंदिर के समीप रहने वाले रामस्वरूप सैनी और गिर्राज सैनी ने बताया कि करीब तीन दशक पहले तक कुंड में पानी भरा रहता था। उस समय लोग कुंड में स्नान करने के बाद भगवान भोलेनाथ को जल अर्पित करते थे। मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती थी। वर्तमान में भी श्रद्धालु हैंडपंप के पानी से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं। महाशिवरात्रि पर भी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।