यदि आप राजस्थान के इन किलों को देखने का मन बना रहे हैं, लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे हैं पहले कौनसे किले देखें, तो आइए हम आपको बताते हैं इन किलों के बारे में जिनका दीदार करना आपके लिए अद्भुत अनुभव साबित हो सकता है।
Rajasthan News : राजस्थान पूरी दुनिया में अपने इतिहास के लिए ही बल्कि अपने महल और किलों के लिए भी जाना जाता है। ये किले और महल आज भी मजबूती से खड़े हैं और गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करते हैं। उनकी वास्तुकला और सुंदरता सचमुच अद्भुत है। इसलिए, राजस्थान को 'लैंड ऑफ किंग्स' भी कहा जाता है। पहाड़ पर बने ये किले मुगल साम्राज्य, पड़ोसी सल्तनत और यहां तक कि मराठा साम्राज्य की वास्तुकला को सहजता से जोड़ते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनकी अपनी एक विशिष्ट शैली बनती है। और यदि आप राजस्थान के इन किलों को देखने का मन बना रहे हैं, लेकिन यह तय नहीं कर पा रहे हैं पहले कौनसे किले देखें, तो आइए हम आपको बताते हैं इन किलों के बारे में जिनका दीदार करना आपके लिए अद्भुत अनुभव साबित हो सकता है।
1. चित्तौडग़ढ़ किला (Chittorgarh Fort, Chittorgarh)
भारत के सबसे बड़े किलों में से एक माना जाने वाला चित्तौडग़ढ़ किला मेवाड़ राजवंश की राजधानी थी, जो लगभग 700 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। 7वीं शताब्दी से इस पर मेवाड़ों का शासन था, फिर सिसौदिया राजपूतों के अधीन आ गया और अंतत: 1568 में इसे छोड़ दिया गया। चित्तौडग़ढ़ किला वास्तव में भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। इसे अक्सर वॉटर फोर्ट के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि किले के अंदर लगभग 22 जल निकाय हैं। यह किला कई लड़ाइयों का भी गवाह रहा है। आज दुनिया भर के पर्यटक इसे देखने आते हैं।
2. कुंभलगढ़ किला (Kumbhalgarh Fort, Rajsamand)
इस किले का निर्माण 15वीं सदी में किया गया था और यह उदयपुर से करीब 60 किलोमीटर दूर है। चित्तौडग़ढ़ किले के पतन के बाद उदयुर मेवाड़ों की नई राजधानी बन गया था। किले का निर्माण राणा कुंभा ने करवाया था और यह मेवाड़ों के लिए दूसरा सबसे अहम किला था। इस किले की 38 किमी लंबी दीवार वास्तव में चीन की महान दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार है। यह 13 पर्वत चोटियों से घिरा हुआ है और समुद्र तल से 1,914 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चोटियों पर बना है। इस किले में ही महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था।
3. रणथंभौर किला (Ranthambore Fort, Ranthambore National Park)
राजस्थान के सबसे लोकप्रिय किलों में से एक, रणथंभौर किला राजस्थान के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यान, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में स्थित है। जंगल में स्थित, रणथंभौर किला दसवीं शताब्दी के मध्य में बनाया गया था। हालांकि, इसके निर्माण की सही तारीख को लेकर अभी भी विवाद है।
4. गागरोन किला (Gagron Fort, Jhalawar)
काली सिंध नदी के किनारे स्थित, गागरोन किला वास्तव में तीन तरफ से पानी से घिरा हुआ है, जिसके एक तरफ आहू नदी बहती है। ऐसा कहा जाता है कि इसका निर्माण 12वीं शताब्दी में खिची चौहानों के हाथों में पडऩे से पहले डोर राजपूतों द्वारा किया गया था, जिन्हें डोडा कबीले के नाम से भी जाना जाता है। मुगलों ने कई पीढिय़ों तक किले पर शासन किया। कुल मिलाकर, किला 14 लड़ाइयों का गवाह बना और आज भी मजबूती से खड़ा है। किले के अंदर शिव, दुर्गा और गणेश को समर्पित एक मंदिर है और बाहर सूफी संत मित्तेशाह की दरगाह है, जहां मुहर्रम के दौरान विशेष रूप से लोग जियारत करने आते हैं।
5. आमेर किला (Amer Fort, Jaipur)
अंबर या आमेर किला जयपुर से सिर्फ 11 किमी दूर स्थित है, जिसे 1592 ईस्वी में कछवाहा वंश के प्रसिद्ध महाराजा मान सिंह ने बनवाया था और उनके उत्तराधिकारी महाराजा जय सिंह प्रथम ने इसका विस्तार किया था। तब से 1727 तक, महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा जयपुर की स्थापना तक किले में कई संरचनात्मक संशोधन और परिवर्धन किए गए। यह किला लाल पत्थर और संगमरमर से बना है।
6. जैसलमेर किला (Jaisalmer Fort, Jaisalmer)
भारत के सबसे बड़े किलों में से एक, जैसलमेर किला 1156 ईस्वी में राजा रावल जैसल द्वारा बनाया गया था। जैसलमेर के सुनहरे रेगिस्तानी परिदृश्य के साथ विलीन होने के कारण, इसे अक्सर सोनार किला या स्वर्ण किला माना जाता है। यह किला शहर से 76 मीटर ऊपर एक पहाड़ी पर स्थित है।