मधुमेह, हृदय और गुर्दा रोगों के बाद अब कैंसर ने जैसलमेर में गंभीर स्वास्थ्य चिंता पैदा कर दी है। जिले में पुरुषों में मुख और फेफड़े, महिलाओं में स्तन और गर्भाशय कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, तंबाकू और गुटखा के बढ़ते सेवन और शराब से जोड़कर देख रहे हैं।
मधुमेह, हृदय और गुर्दा रोगों के बाद अब कैंसर ने जैसलमेर में गंभीर स्वास्थ्य चिंता पैदा कर दी है। जिले में पुरुषों में मुख और फेफड़े, महिलाओं में स्तन और गर्भाशय कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, तंबाकू और गुटखा के बढ़ते सेवन और शराब से जोड़कर देख रहे हैं। खुले में धूम्रपान और पेसिव स्मोकिंग भी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पर रोक होने के बावजूद नियमों का पालन नहीं किया जा रहा। वैश्विक स्तर पर तंबाकू बड़ी जानलेवा चुनौती बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि एक सिगरेट व्यक्ति का जीवन 11 मिनट घटा देती है। हर घंटे भारत में 137 लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण दम तोड़ रहे हैं, वहीं विश्व में हर 6 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है।
जिला कैंसर नोडल अधिकारी डॉ. डूंगरसिंह तंवर के अनुसार, भारत में हर साल 13 से 14 लाख नए कैंसर रोगी सामने आते हैं और जीवनकाल में पांच में से एक व्यक्ति को कैंसर होने का खतरा रहता है। वे कहते हैं कि तंबाकू, असंतुलित आहार और निष्क्रिय जीवनशैली रोकथाम में बड़ी बाधा हैं। 30 से 50 प्रतिशत तक कैंसर की रोकथाम संभव है यदि स्वास्थ्य जांच, व्यायाम, संतुलित आहार और शराब पर नियंत्रण रखा जाए।
जिला अस्पताल में वर्ष 2017 से कैंसर केयर यूनिट संचालित है, जिसमें कीमोथैरेपी और फॉलो-अप सेवा उपलब्ध है। वर्तमान में प्रतिमाह 20-25 मरीजों को कीमोथैरेपी दी जा रही है, 80-100 मरीज ओपीडी में और 40-50 आईपीडी में आ रहे हैं। अब तक 962 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। राजकीय जवाहिर अस्पताल के पीएमओ डॉ. रविंद्र सांखला का कहना है कि कैंसर से बचाव में परिजन और समाज का सहयोग बेहद जरूरी है। रोगी को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाना अत्यावश्यक है।