कोटा

राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण

Aug 19, 2026
Rajasthan

बारां. नगर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से आयोजित युवा संगोष्ठी में राष्ट्र निर्माण, भारतीय संस्कृति, स्वदेशी चिंतन, आत्मनिर्भरता, विज्ञान एवं तकनीक तथा युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता बलिराम, अखिल भारतीय सद्भावना प्रमुख ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, संस्कृति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को आधार बनाकर देश को आत्मनिर्भर और विश्व कल्याण का मार्गदर्शक बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, परंपरा और जीवन-दृष्टि से है। भारतीय चिंतन “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना पर आधारित है। प्रकृति, प्राणी मात्र और मानव कल्याण के प्रति संवेदनशीलता भारतीय संस्कृति की विशेषता रही है। संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना एवं राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी गौरवशाली परंपराओं को समझते हुए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीक को अपनाएं तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग, आत्मनिर्भरता, सामाजिक जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध से देश को और मजबूत बनाया जा सकता है।

Updated on:
19 Aug 2026 06:00 am
Published on:
19 Aug 2026 06:00 am