Eye Donation: मेरठ में स्पोर्ट्स कॉलोनी… एक ऐसी कॉलोनी जहां के लोगों ने नेत्रदान महादान के संकल्प को अपनी परंपरा से जोड़ लिया है। परंपरा के पालन में इस कॉलोनी में जिसकी मृत्यु होती है, अर्थी उठने से पहले उसकी आंखें दान कर दी जाती हैं। 1980 से यहां के लोग इस संकल्प को पूरा करते आ रहे हैं। अब तक यहां 150 से अधिक नेत्रदान हो चुका है और 80 फीसदी से अधिक लोगों ने नेत्रदान का संकल्प ले रखा है।
Eye Donation: विक्टोरिया पार्क के सामने स्थित स्पोर्ट्स कॉलोनी में करीब 50 मकान हैं। इनमें लगभग 200 लोग रहते हैं। अधिकतर लोग देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान से आकर यहां बसे थे। ज्यादातर परिवार खेल के सामान बनाने के कारोबार से जुड़ा है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, विक्टोरिया पार्क वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान 80 वर्षीय सुरेंद्र कुमार चड्ढा बताते हैं कि 1980 में नेत्रदान के प्रति जागरूकता के लिए पहली बार प्रयास किया गया।
स्वतंत्रता सेनानी किशन लाल खन्ना और डॉ. एसके सूरी के प्रयास से लोग नेत्रदान के लिए आगे आए। तब से यह सिलसिला चल पड़ा। सुरेंद्र कुमार अब तक अपनी मां, एक चाचा, चार भाइयों, तीन भाभी, बहन-बहनोई और दो भतीजों का मरणोपरांत नेत्रदान करा चुके हैं। सुरेंद्र कुमार और उनकी पत्नी वंदना ने देहदान का संकल्प ले रखा है। परिवार के बाकी सदस्यों ने भी नेत्रदान का संकल्प ले रखा है। इसी तरह 99 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी किशनलाल खन्ना के परिवार में उनकी पत्नी कमला खन्ना, भाई प्रेम खन्ना, इंद्रजीत खन्ना, विजय खन्ना, भतीजे राकेश खन्ना, भतीजे की पत्नी संध्या खन्ना का भी नेत्रदान हो चुका है।
कॉलोनी के ही तिलकराज कोहली के परिवार में उनका, उनकी पत्नी संयोगिता कोहली, भाई सतीश कोहली, पवन लाल कोहली और चचेरे भाई मदनलाल कोहली का भी निधन के बाद परिजनों ने नेत्रदान किया। इसके अलावा अविनाश कपूर, चंद्र मोहन सभरवाल, रीता आनंद, रमेश कपूर का भी निधन के बाद नेत्रदान किया गया। इस काम में इनका सहयोग करने वाले नेत्रदान ज्योति समिति के अध्यक्ष मनमोहन ढल बताते हैं कि लोग फोन कर टीम को नेत्रदान के लिए बुलाते हैं।