सीएम योगी और डीजीपी ओपी सिंह प्रदेश में अपराध का ग्राफ घटने का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे न केवल प्रशासन बल्कि शासन में भी हड़कंप मच गया है।
लखनऊ. सीएम योगी और डीजीपी ओपी सिंह प्रदेश में अपराध का ग्राफ घटने का दावा कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिससे न केवल प्रशासन बल्कि शासन में भी हड़कंप मच गया है। इनमें सबसे ज्यादा मामले सिपाहियों के साथ हो रही बदसलूकी को लेकर हैं, जिसके कारण कभी किसी अफसर ने, तो कहीं किसी सिपाही ने आत्महत्या का प्रयास किया है। कई मामलों में पुलिस वालों पर ही आरोप भी लगे हैं। इनमें हाल ही का विवेक तिवारी हत्याकांड अभी भी चर्चा में बना हुआ। यह वजह हो या न हो, लेकिन यूपी डीजीपी ओपी सिंह ने पुलिस विभाग से जुड़े सभी लोगों को अनुशासन सिखाने का मन बना लिया है। वहीं फिलहाल ट्रेनी सिपाहियों को ड्यूटी पर नहीं भेजने का फैसला लिया है।
यूपी डीजीपी ने दिए निर्देश-
यूपी डीजीपी ओपी सिंह ने सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों और पीएसी के कमांडेंट को पत्र लिख कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा है कि प्रशिक्षण पूरा होने तक संतरी, मेस और बैरक की ड्यूटी से भी प्रशिक्षु सिपाहियों को मुक्त किया जाए। उनका साफ कहना है कि ट्रेनी सिपाहियों की ड्यूटी लगने से वह सही से अनुशासन नहीं सीख पाते हैं, जिस कारणउनका प्रशिक्षण प्रभावित होता है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
प्रशिक्षु सिपाहियों को करना होगा यह-
साथ ही उन्होंने प्रशिक्षु सिपाहियों के रहने व खाने पर निगरानी रखी जाएगी है और उन्हें इसके बारे में बताया भी जाएगा। डीजीपी ने प्रशिक्षु सिपाहियों को नैतिकता, सामाजिक संवेदना, अपराध पीडि़त, बुद्धिजीवियों, पर्यटकों, असहाय व्यक्तियों की मदद करने तथा थाने में आने वाले आवेदन के निस्तारण और जरूरत पड़ने पर यातायात ड्यूटी करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिए जाने पर जोर भी दिया।