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कब होगा BJP मंत्रिमंडल विस्तार; किन मंत्रियों की कुर्सी पर संकट और किन पर पार्टी का फोकस? कौन से नाम चल रहे आगे

BJP Cabinet Expansion Latest Update: बीजेपी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। जानिए किन नेताओं पर पार्टी का फोकस है। पढ़िए लेटेस्ट अपडेट।

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लखनऊ

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Harshul Mehra

May 06, 2026

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उत्तर प्रदेश BJP मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़ा अपडेट।

BJP Cabinet Expansion Latest Update: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब उत्तर प्रदेश पर पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है। पार्टी की प्राथमिकता प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव को जल्द पूरा करने की है। सूत्रों के अनुसार, बंगाल में सरकार गठन की प्रक्रिया पूरी होते ही यूपी में इन महत्वपूर्ण फैसलों को अमल में लाया जाएगा।

मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन बदलाव की संभावित तारीखें

पार्टी सूत्रों का कहना है कि 10 मई तक उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार किया जा सकता है। इसके बाद 15 मई तक प्रदेश संगठन और क्षेत्रीय पदाधिकारियों की नई सूची जारी होने की संभावना है। इन बदलावों को आगामी चुनावों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है।

किन चेहरों को मिल सकता है मौका

मंत्रिमंडल विस्तार में इस बार कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, उम्रदराज मंत्रियों की कुर्सी पर संकट हो सकता है और उनकी जगह नए और युवा चेहरों को मौका दिया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ मौजूदा मंत्रियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर हटाया या उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है।

दिल्ली से लखनऊ तक चला मंथन

इन फैसलों को लेकर पिछले महीने भर से लखनऊ और दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) के अलावा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और केंद्रीय नेताओं के बीच कई अहम बैठकें हुईं। बताया जा रहा है कि इन बैठकों में अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है।

जातीय समीकरण साधने पर जोर

मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भाजपा ओबीसी और दलित समुदाय को प्राथमिकता देने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके साथ ही ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज से भी एक-दो प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है, ताकि सभी वर्गों का संतुलन बना रहे।

एक दर्जन से अधिक नामों पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक दर्जन से अधिक संभावित नामों पर चर्चा हो चुकी है। हालांकि अभी तक किसी नाम को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। खाली पदों को भरने के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी देने का विकल्प भी विचाराधीन है।

सहयोगी दलों को भी मिलेगा प्रतिनिधित्व?

BJP अपने सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने की योजना बना रही है। सूत्रों के मुताबिक, अपना दल, सुभासपा और निषाद पार्टी से एक-एक विधायक को मंत्री पद दिया जा सकता है। इन नामों का चयन संबंधित दलों के नेतृत्व द्वारा किया जाएगा।

कौन से नाम चल रहे आगे और क्यों?

नामक्षेत्र / पहचानमंत्री बनाए जाने की संभावित वजह
कृष्णा पासवानफतेहपुर से तीन बार की विधायकमहिला और दलित (पासी) कोटा संतुलित करने के लिए, पासी वोट बैंक को साधने की कोशिश
आशा मौर्यमहमूदाबाद की विधायकओबीसी (मौर्य) प्रतिनिधित्व बढ़ाने और सामाजिक संतुलन साधने के लिए
सुरेंद्र दिलेरखैर (अलीगढ़) सुरक्षित सीट के विधायकवाल्मीकि समाज का प्रतिनिधित्व, अनूप प्रधान के लोकसभा जाने के बाद खाली जगह भरने के लिए
भूपेंद्र सिंह चौधरीपूर्व प्रदेश अध्यक्षसंगठनात्मक अनुभव और मजबूत ओबीसी नेतृत्व के चलते लगभग तय माना जा रहा नाम
हंसराज विश्वकर्मावाराणसी क्षेत्र सेओबीसी (विश्वकर्मा) समाज को साधने और पीएम के संसदीय क्षेत्र से जुड़ाव
महेंद्र सिंहपूर्व मंत्रीक्षत्रिय कोटे को मजबूत करने और अनुभव का लाभ लेने के लिए
संतोष सिंहराजनीतिक दावेदारक्षत्रिय प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति
मनोज पांडेयरायबरेली (पूर्व सपा, अब भाजपा)कांग्रेस गढ़ में पकड़ मजबूत करना, सपा छोड़ भाजपा में आने का राजनीतिक लाभ
श्रीकांत शर्माब्राह्मण नेताब्राह्मण संतुलन, साथ ही संगठन और मंत्री पद दोनों विकल्पों में चर्चा

महिला नेताओं को प्राथमिकता

इस बार मंत्रिमंडल विस्तार में महिला नेताओं को भी प्रमुखता देने की तैयारी है। खासकर दलित और ओबीसी वर्ग की महिला विधायकों को मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, तीन से चार महिला नेताओं के नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

विभागों में फेरबदल और पदोन्नति की संभावना

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही विभागों में फेरबदल भी किया जा सकता है। कुछ राज्यमंत्रियों को पदोन्नत कर कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। इस बदलाव के जरिए पार्टी प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक संतुलन दोनों को साधने की कोशिश करेगी।

आगामी चुनावों की रणनीति का हिस्सा

यह पूरा कवायद आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। भाजपा चाहती है कि संगठन और सरकार दोनों स्तर पर मजबूत संदेश जाए, जिससे पार्टी की स्थिति और मजबूत हो सके। अब सभी की नजर इस बात पर है कि अंतिम सूची में किन चेहरों को जगह मिलती है और किन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाता है।