
जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के बाद बीजेपी के लिए के लिए सबसी बड़ी चुनौती जेन जी (Gen-Z) बन गए हैं। पार्टी के भीतर इसे लेकर मंथन का दौर जारी है। बीजेपी के कुछ नेताओं ने भी माना है कि उनके पास इस पीढ़ी की आकांक्षाओं से निपटने के लिए कोई ठोस फॉर्मूला नहीं है। जेन जी को लुभाने के लिए बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक बीजेपी की सरकार ने कैश और रील्स का दांव खेला है।
बिहार सरकार ने जेन जी को लुभाने के लिए सोशल मीडिया नीति में नया संशोधन पारित किया है। इसके तहत अब क्रिएटर्स एक वीडियो से 1 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं। पात्र कंटेंट पर 1 लाख व्यूज तक के लिए अधिकतम 10 हजार रुपये तक भुगतान किया जा सकता है। इसी आधार पर 10 लाख व्यूज वाले कंटेंट पर राशि 1 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। वहीं, महाराष्ट्र में भी सरकार ने जेन जी को लुभाने के लिए कैश व रील्स का दांव चला है।
महाराष्ट्र सरकार ने 15 से 30 साल के युवाओं को जोड़ने के लिए सेव सॉइल, सेव वाटर अभियान की योजना बनाई है। देवेंद्र फडणवीस सरकार के मृदा एवं जल संरक्षण मंत्रालय ने राज्य के सभी 36 जिलों में वॉक फॉर वाटर कार्यक्रम की घोषणा की। इसमें हर प्रतिभागी को संबंधित विषय पर 30 से 60 सेकंड की इंस्टाग्राम रील बनानी होगी। चयनित कंटेंट क्रिएटर को सरकार की तरफ से इनाम मिलेगा।
फडणवीस सरकार में मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी मराठी फिल्मों को फंड करेगी, जो एडवांस्ड टेक्नोलॉजी, विजुअल इफेक्ट्स और ऐसी कहानियों के साथ बनेंगी जो युवाओं को पसंद आएं। शेलार ने कहा कि अभी त्योहार भी आने वाले हैं। त्योहार को अब राज्य महोत्सव का दर्जा मिल चुका है, इसलिए सरकार खुद आयोजक की भूमिका निभाएगी, गतिविधियां बढ़ाएगी और उनका डेटा वैज्ञानिक तरीके से जुटाकर दुनिया के सामने पेश करेगी।
वहीं, राज्य सरकार में उच्च व तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने बताया कि सरकार छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर महीने 2000 रुपये पॉकेट मनी देने पर विचार कर रही है। उनका कहना है कि छात्रों को बेझिझक सवाल पूछने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और कॉलेज कैंपस में ही स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों। साथ ही छात्रों और प्रोफेसरों के बीच नियमित बातचीत पर भी जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सभी विभागों से कह दिया है कि युवाओं की समस्याओं को अब प्राथमिकता पर रखा जाए। 1997 से 2012 के बीच जन्मे यह युवा राज्य की करीब 25 फीसदी आबादी बनाते हैं, इसलिए हर नई योजना और नीति बनाते वक्त इनकी दिलचस्पी का खास ध्यान रखने को कहा गया है। सरकार में काम करने वाले एक अधिकारी की मानें तो अब बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट के बजाय शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सामाजिक क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।