राष्ट्रीय

Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD पर उठे सवाल! HC ने MCD की कार्रवाई पर तुरंत सुनवाई से किया इनकार

Satya Niketan Hostel Collapse : सत्य निकेतन हादसे के बाद नगर निगम की कार्रवाई अब न्यायिक सवालों के घेरे में है। अदालत ने कहा कि किसी संरचना को गिराने से पहले जरूरी तकनीकी ऑडिट होना चाहिए—और सिर्फ आशंका के आधार पर याचिका दायर नहीं की जा सकती।
2 min read
Sep 14, 2026
Delhi Building Collapse
Delhi Building Collapse : मलबा अभी हटा भी नहीं था... फिर क्यों गिराई जा रही थी इमारत? दिल्ली HC में उठा बड़ा सवाल (फोटो सोर्स: ANI)

Delhi HC on Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने के हादसे के बाद अब मलबे और आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट में उस याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया गया, जिसमें ढही इमारत से सटे भवन को गिराने के MCD के फैसले पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता की ओर से बेसमेंट में मलबा हटाए जाने से पहले कार्रवाई किए जाने पर गंभीर आशंका जताई गई।

Delhi HC on Building Collapse: मलबे के बीच कार्रवाई पर उठे सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष सोमवार को मामले को तत्काल सुनवाई के लिए रखने का अनुरोध किया गया। वकील ने अदालत को बताया कि नगर निगम ने सत्य निकेतन में पिछले सप्ताह ढही इमारत से सटे भवन को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी, जबकि हादसे वाली इमारत के बेसमेंट से मलबा अभी पूरी तरह नहीं हटाया गया था।

याचिका की ओर से यह आशंका भी जताई गई कि मलबे के नीचे अब भी कोई व्यक्ति फंसा हो सकता है। इसी आधार पर मामले को जल्द सुने जाने की मांग की गई। हालांकि, अदालत ने तत्काल सूचीबद्ध करने की अनुमति नहीं दी।

HC ने पूछा- कार्रवाई से पहले ऑडिट हुआ था?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कार्रवाई की प्रक्रिया पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि किसी बगल की इमारत को ध्वस्त करने का फैसला लेने से पहले अधिकारियों ने उसका ऑडिट जरूर कराया होगा। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वह केवल अनुमान या आशंका के आधार पर याचिका दायर न करें।

अदालत की टिप्पणी का संकेत साफ था यदि किसी इमारत को असुरक्षित मानकर गिराया गया है, तो उसके पीछे तकनीकी जांच और ठोस आधार होना चाहिए। ऐसे मामलों में संरचनात्मक स्थिरता, आसपास की इमारतों पर प्रभाव और सुरक्षा मानकों का आकलन अहम हो जाता है।

सत्य निकेतन हादसा फिर चर्चा में

सत्य निकेतन लंबे समय से छात्रों और कामकाजी युवाओं के लिए हॉस्टल व पीजी आवास के कारण जाना जाता है। दिल्ली के घनी आबादी वाले इलाकों में निर्माणाधीन या पुरानी इमारतों की सुरक्षा पहले भी चिंता का विषय रही है। किसी भवन के ढहने के बाद आसपास की संरचनाओं को खाली कराना, उनकी स्थिति का तकनीकी निरीक्षण करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती है।

ऐसे हादसों में सबसे अहम प्राथमिकता राहत एवं बचाव कार्य, संभावित फंसे लोगों की तलाश और घटनास्थल को सुरक्षित करना होती है। इसके बाद विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाती है।

इस मामले में फिलहाल हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई का रास्ता नहीं खोला है, लेकिन MCD की कार्रवाई से जुड़े सवाल अदालत के सामने उठ चुके हैं। अब यह देखना अहम होगा कि संबंधित एजेंसियों की ओर से इमारत के सुरक्षा ऑडिट और ध्वस्तीकरण के फैसले को लेकर क्या रिकॉर्ड सामने रखा जाता है।

Updated on:
14 Sept 2026 12:46 pm
Published on:
14 Sept 2026 12:46 pm