
चीनी (Sugar) के बाद अब प्याज (Onions) की कीमतें बढऩे लगी तो सरकार एक्शन में आ गई। केंद्र सरकार (Central Government) ने महाराष्ट्र के नासिक से देश के बड़े खपत वाले केंद्रों तक प्याज का स्टॉक पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ (Kanda Express) चलाई है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने सोमवार को बताया कि रेलवे के रैकों में जो स्टॉक लादा जा रहा है, वो बुधवार तक केंद्रों तक पहुंच जाएगा। खरे ने बताया, "शुरुआत में प्याज की सप्लाई पांच प्रमुख खपत केंद्रों में की जाएगी। ये चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी हैं। बाद में बाजार की ज़रूरतों के आधार पर और जगहों को इसमें शामिल किया जाएगा।"
खरे ने आगे बताया कि एनसीसीएफ और नाफेड एजेंसियों के माध्यम से खुदरा बाजार में प्याज 35 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा। खरे ने कहा कि सरकार के पास चालू वर्ष के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है। यह मांग को पूरा करने के लिए काफी है और आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता संतोषजनक बनी रहेगी।
खरे ने आगे बताया कि सरकार प्याज की आपूर्ति को सामान्य रखने के साथ ही कीमतों पर भी कड़ी नजर रख रही है। नासिक की मंडी में कीमतें दिल्ली की तुलना में ज़्यादा हैं, यानी यहाँ गुटबाजी और सट्टेबाजी हो रही है।
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 24 अगस्त को 43.53 रुपए प्रति किलो रही। एक साल पहले यह 27.37 रुपए थी। यानी कीमत में 59% की बढ़ोतरी हुई। थोक भाव भी 21.23 रुपए से बढकऱ 35.58 रुपए किलो हो गया है। बड़े शहरों में प्याज की कीमतें और ज़्यादा हैं। सोमवार को चेन्नई में प्याज 60 रुपए, दिल्ली में 55 रुपए और कोलकाता में 53 रुपए किलो तक बिका।
प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का एक रणनीतिक भंडार है। इसे मुख्य रूप से आपूर्ति कम होने पर कीमतों में अचानक उछाल से बाजार को बचाने के लिए बनाया गया है। इसे मुख्य रूप से 'मूल्य स्थिरीकरण कोष' के तहत नाफेड और एनसीसीएफ (उपभोक्ता सहकारी समितियों के शीर्ष संगठन) जैसी एजेंसियों के ज़रिए खरीदा जाता है।