
Jharkhand Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में कल रात छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान गंभीर झड़प और मारपीट हुई। रांची यूनिवर्सिटी लेक के पास शांतिपूर्ण मार्च कर रहे छात्रों के साथ मारपीट और बदसलूकी की गई। इस घटना के बाद, विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रा प्रतिमा कुमारी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई, पुतला छीनने की कोशिश की गई और उनके कपड़े खींचे गए। उन्होंने कहा कि छात्र न तो उपद्रवी हैं और न ही आतंकवादी, बल्कि वे पिछले 26 दिनों से शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। फिर भी, उन्हें उपद्रवियों के हमलों और पुलिस की लाठीचार्ज का सामना करना पड़ रहा है।
घटना के बारे में बताते हुए पीड़िता प्रतिमा कुमारी ने कहा कि वह एक शांतिपूर्ण मार्च चल रहा था, तभी 20-30 युवक-युवतियों का एक समूह रांची यूनिवर्सिटी लेक के पास पहुंचा। उन्हें साथी छात्र समझकर प्रदर्शनकारियों ने मार्च में शामिल होने के लिए बुलाया, लेकिन उस समूह ने अचानक छात्रों के हाथों से पुतला छीनने की कोशिश की। जब छात्रों ने विरोध किया, तो हाथापाई हुई और एक युवक ने उनकी गर्दन पर जोर से थप्पड़ मारा। जब उन्होंने फिर से विरोध किया, तो उन्हें दूसरी बार थप्पड़ मारा गया, फिर उनका दुपट्टा छीन लिया गया और उनका फेस मास्क जमीन पर गिर गया।
गिरिडीह और हजारीबाग में छात्रों पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए छात्रा प्रतिमा कुमारी ने आरोप लगाया कि यह सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोगों की सोची-समझी साजिश थी। राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार 'मइयां सम्मान योजना' के तहत 2,500 रुपये देकर महिलाओं और छात्राओं के आत्मसम्मान और गरिमा को नहीं खरीद सकती। राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस और प्रशासन सिर्फ सत्ता में बैठे लोगों के दबाव में काम कर रहे हैं। छात्रा ने आरोप लगाया कि जब छात्रों ने हमला करने वाले युवक को पकड़ा, तो पुलिस ने उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय छात्रों पर लाठीचार्ज किया और हमलावर को सुरक्षित बचा लिया।
सरकार और पुलिस प्रशासन से न्याय की मांग करते हुए प्रतिमा कुमारी ने कहा कि वह घटना में शामिल दो- तीन आरोपियों को अच्छी तरह से पहचानती हैं।उन्होंने मांग की कि आरोपियों को उनके सामने लाया जाए और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, वरना वह पूरे मामले को लेकर पुलिस में औपचारिक FIR दर्ज कराएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 दिनों से चल रहे विरोध को कमज़ोजोर करने के लिए पहले मांगें मानने का दिखावा किया गया, फिर मामले पर कोर्ट से स्टे (रोक) लिया गया और अब लाठीचार्ज और हमलों के जरिए छात्रों को डराने धमकाने की साजिश रची जा रही है।