
West Bengal Durga Puja News: कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम को हुई भीषण भगदड़ ने पूरे राज्य को हिला दिया। महा सप्तमी की रात अचानक हुई मूसलाधार बारिश और संकरी गलियों में जमा भारी भीड़ ने हादसे को जन्म दिया, जिसमें करीब 19 लोगों की जान चली गई और दर्जनों घायल हो गए। इस दुखद घटना के बाद पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने साफ कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, मुख्यमंत्री ने राहत के ऐलान किए हैं, लेकिन पूजा बंद नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राजनीतिकरण से बचने की अपील की और इसे दुर्लभ दुर्घटना बताया, जो फिर भी नहीं होनी चाहिए थी
उत्तर कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में शनिवार शाम करीब साढ़े सात बजे हुई भगदड़ ने त्योहार की खुशियों को मातम में बदल दिया। गिरीश पार्क थाना क्षेत्र के संकरी राधा माधव साहा लेन में स्थित इस पुराने पंडाल में हजारों भक्त जमा थे। अचानक तेज बारिश शुरू हुई तो बाहर कतार में खड़े लोग अंदर शरण लेने दौड़े। अंदर पहले से भरी भीड़, संकरी एंट्री-एग्जिट गेट और कम रोशनी ने हालात बिगाड़ दिए। कई लोग गिर पड़े, कुछ कुचल गए। ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुईं। घायलों को कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया।
आईएएनएस के अनुसार मंत्री दिलीप घोष ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है और मुख्यमंत्री ने राहत संबंधी घोषणाएं की हैं। पूजा अभी जारी है, इसे रोकना नहीं चाहिए। ऐसे हादसे नहीं होने चाहिए, इसे ध्यान में रखना होगा। जो इसे राजनीतिक रंग देना चाहेंगे, वे देंगे। हर जगह पूजा हो रही है, पुलिस मौजूद है, पूरा सिस्टम ठीक से काम कर रहा है और लाखों लोग सड़कों पर घूम रहे हैं। ये चीजें कभी-कभार होती हैं, इसलिए इन्हें दुर्घटना कहा जाता है, लेकिन फिर भी यह नहीं होना चाहिए था।”
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हादसे को दिल दहला देने वाला बताया। उन्होंने मृतक परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा और सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया। घायलों को 5 लाख रुपये और इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संवेदना जताते हुए मृतक परिवारों को दो लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की। पुलिस ने पंडाल बंद कर दिया, फॉरेंसिक टीम और एसटीएफ मौके पर पहुंच गए। करीब एक दर्जन आयोजकों और सुरक्षा कर्मियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई है।
गवाहों के अनुसार पंडाल के संकरी द्वार और अंधेरी गलियां समस्या की जड़ थीं। कुछ लोगों ने बताया कि निजी सुरक्षा कर्मियों की सीटी या किसी घोषणा से भीड़ में अचानक हलचल मच गई। स्थानीय लोगों ने मोटरसाइकिलों पर घायलों को अस्पताल पहुंचाया क्योंकि एंबुलेंस फंस रही थीं। यह पंडाल लंबे समय से भीड़ प्रबंधन की चुनौती रहा है क्योंकि आसपास की गलियां बहुत संकरी हैं।
चोरबागान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल में मची भगदड़ में 28 साल की एक युवती की जान चली गई। मृतका के परिवार ने घटना के दौरान इंतजामों और निगरानी की कमी पर सवाल उठाए हैं।
मृतका के एक परिजन के मुताबिक, युवती अपने चाचा, चाची और छोटी बहन के साथ दुर्गा पूजा पंडाल गई थी। परिवार को उम्मीद थी कि वे मां दुर्गा के दर्शन कर सुरक्षित घर लौटेंगे, लेकिन बाहर निकलने के दौरान अचानक भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
परिजन ने बताया कि उनके चाचा के अनुसार, परिवार के सदस्य पंडाल से बाहर आ रहे थे, तभी अफरातफरी फैल गई। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। परिजनों का आरोप है कि वहां व्यवस्था संभालने और लोगों की आवाजाही पर नजर रखने के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।
प्रत्यक्षदर्शियों ने भी भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि श्रद्धालुओं को रास्तों और आवाजाही के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी।
राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर कुछ अन्य बड़े पंडालों को भी अस्थायी रूप से बंद कर दिया। टोल फ्री हेल्पलाइन शुरू की गई। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी घायलों के जल्द स्वस्थ होने और परिवारों को शक्ति देने की प्रार्थना की।
दुर्गा पूजा बंगाल की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान है। लाखों लोग हर साल पंडाल घूमते हैं। इस बार मौसम ने भी चुनौती दी। बारिश के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। विशेषज्ञ कहते हैं कि संकरी जगहों पर भीड़ नियंत्रण के लिए बेहतर प्लानिंग, पर्याप्त रोशनी, वॉलंटियर्स की ट्रेनिंग और एग्जिट प्लान जरूरी हैं। पिछले कुछ सालों में देशभर में त्योहारों के दौरान हुई भगदड़ों ने बार-बार यही सबक दिया है।
दिलीप घोष के बयान से साफ है कि सरकार पूजा की निरंतरता बनाए रखना चाहती है लेकिन लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई का वादा किया गया है। फिलहाल पूरा शहर दुख में डूबा है। मां दुर्गा से प्रार्थना है कि ऐसे हादसे दोबारा न हों और भक्त सुरक्षित पूजा कर सकें।