
SIR Protest: दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स (IFSO) यूनिट ने उन सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ चार से ज्यादा FIR दर्ज की हैं, जो कथित तौर पर झूठी बातें फैला रहे हैं और देश का माहौल खराब कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, सीमा पार से भारत-विरोधी भावनाएं फैलाने में कई पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स भी सक्रिय पाए गए हैं। 10 अक्टूबर को, कई पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स ने कथित तौर पर विरोध प्रदर्शनों के दौरान मौत होने की झूठी खबरें फैलाई थीं। पाकिस्तान से ऑपरेट करने वाले यूजर्स भारतीय बनकर फर्जी वीडियो और गुमराह करने वाली खबरें भी फैला रहे हैं।
राहुल गांधी के नेतृत्व में सोमवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं और समर्थकों ने बाराखंबा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। विपक्ष के 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मतदाता सूची के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) से जुड़े चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती दी।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और INDIA ब्लॉक के नौ अन्य नेताओं द्वारा दायर रिट याचिका में 14 कमियां (defects) बताई हैं।
इस याचिका में भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के कुछ पहलुओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत, CPI(M) सांसद एमए बेबी, CPI नेता डी राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा सांसद महुआ माजी, NCP (SCP) सांसद सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग सांसद ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
रजिस्ट्री ने याचिकाकर्ताओं से इस बारे में भी स्पष्टीकरण मांगा है कि रिट याचिका में निजी व्यक्तियों CEC ज्ञानेश कुमार और दो ECs एसएस संधू और विवेक जोशी को प्रतिवादी (respondents) के तौर पर क्यों शामिल किया गया है।
यह आपत्ति संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर किए जाने के संदर्भ में उठाई गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे SIR के दौरान चुनाव आयोग की शक्तियों के इस्तेमाल में कथित अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। उन्होंने अन्य राहतों के अलावा, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में संशोधन से जुड़े फैसले लेने और उन्हें लागू करने के तरीके की जांच की मांग भी की है।