
Rahul Gandhi:सु्प्रीम कोर्ट परिसर में एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का देने के मामले में सु्प्रीम कोर्ट ने आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने ANI की रिपोर्ट का हवाला देकर कहा था कि लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कोर्ट परिसर में एक महिला पत्रकार को धक्का दिया था। वह महिला तीन महीने की गर्भवती है और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में जगह-जगह प्रदर्शन किए गए है। इस दौरान महिला पत्रकारों से बदसलूकी के भी मामले सामने आए। महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके बाद सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इस याचिका की सुनवाई के दौरान महिला इस याचिका में मांग की गई कि एक अलग कमेटी बने जो इन आरोपों की जांच करे और पत्रकारों की सुरक्षा के गाइडलाइंस बनाएं।
सुनवाई के दौरान इसी मामले पर काउंटर पॉइंट के रूप में वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने ANI का रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने एक तीन महीने की गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा।
उन्होंने तर्क दिया कि पत्रकारों की सुरक्षा होनी चाहिए, चाहे वे किसी के भी बारे में रिपोर्ट कर रहे हों। भाटिया ने यह आरोप भी लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों के साथ बदसलूकी की गई और उन्हें गलत तरीके से छुआ गया।
इसके बाद वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने इस पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि अदालत में राजनीति लाई जा रही है। इसके बाद CJI सूर्यकांत ने इस मामले पर जांच के आदेश जारी किए हैं। इसके साथ ही महिला जजों या अधिकारियों वाली कमेटी बनाने पर सहमति जताई है। साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के गाइडलाइंस बनाने की बात भी कही।
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के आसपास हुए विरोध प्रदर्शनों और जुलूसों को लेकर आपराधिक अवमानना (criminal contempt) की कार्यवाही शुरू करने से इनकार कर दिया। वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर के भीतर हुई घटनाएं अस्वीकार्य हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 200 वकीलों ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें न्यायपालिका को डराने-धमकाने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है।
गौराव भाटिया के इस तर्क पर CJI सूर्यकांत ने जवाब दिया कि न्यायपालिका को कोई नहीं डरा सकता। CJI ने आगे कहा कि अदालत को इस बात की जानकारी है कि अदालत कक्ष के अंदर और बाहर क्या बयान दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम कोई अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं। हमें पता है कि वे बाहर क्या बयान दे रहे हैं और अदालत में क्या कह रहे हैं। हमें सब कुछ पता है।