
Tamil Nadu Politics: तमिलनाडु की राजनीति में सीएम विजय और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। शनिवार को डीएमके कार्यकारिणी की बैठक हुई। इसमें एमके स्टालिन ने सीएम विजय पर विधानसभा के कामकाज को लेकर साधा। उन्होंने सीएम पर आरोप लगाते हुए कहा कि विजय विधानसभा को सिनेमा का सेट समझ रहे हैं और पंच डायलॉग बोलने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
इस दौरान स्टालिन ने विजय पर योजनाओं का नाम बदलने का भी आरोप लगाया। स्टालिन ने कहा कि सीएम विजय डीएमके सरकार के दौरान शुरू की गई योजनाओं के नाम बदलने में व्यस्त हैं।
उन्होंने कहा कि वह विधानसभा को सिनेमा सेट की तरह देखते हैं और वहां पंच डायलॉग बोलते हैं। हमारे लिए जीत या हार मायने नहीं रखती, हम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से गहराई से जुड़े रहने वाले लोग हैं।
दरअसल, जून में विधानसभा में डीएमके विधायकों के वॉकआउट के दौरान विजय के भाषण का एक हिस्सा काफी चर्चा में रहा था। डीएमके विधायकों के सदन से बाहर चले जाने के बावजूद विजय ने अपना भाषण जारी रखा था।
भाषण के अंत में सीएम विजय ने तत्कालीन मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के एक चर्चित अंदाज की नकल करते हुए हाथ से सब खत्म होने का इशारा किया था।
उन्होंने स्पीकर से इसकी अनुमति भी मांगी थी। विजय ने कहा था कि जिस व्यक्ति के लिए वह यह इशारा करना चाहते थे, वह तो सदन से बाहर जा चुका है, लेकिन क्या वह फिर भी ऐसा कर सकते हैं। अनुमति मिलने के बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए हाथ से नाटकीय अंदाज में इशारा किया था। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था।
डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने पार्टी की चुनावी हार को भविष्य की रणनीति तैयार करने के अवसर के तौर पर देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए यह समय आत्ममंथन करने और आगे की दिशा तय करने का है।
स्टालिन ने कहा कि इस हार को पार्टी के भविष्य की योजना बनाने के लिए मिले अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि डीएमके के संगठनात्मक ढांचे में बड़े और महत्वपूर्ण बदलाव किए जा सकते हैं।
बता दें कि इससे पहले शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने दावा किया कि डीएमके के सभी 59 विधायकों ने मुख्यमंत्री विजय की ओर से दिए गए मुफ्त कार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है।
उदयनिधि ने कहा कि जब टीवीके सरकार लगातार यह कह रही है कि सत्ता संभालने के समय राज्य आर्थिक संकट में था और सरकार पर कर्ज है, तो ऐसे में डीएमके विधायक इस प्रस्ताव का लाभ नहीं लेंगे।