
Tiranga Rally: एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने तिरंगा रैली और टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाने को लेकर उठे विवाद पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को शर्तों के साथ जमानत मिलने और छात्रों को हिरासत में लिए जाने पर भी अपनी बात कही। वारिस पठान ने कहा कि तिरंगा लहराने और तिरंगा रैली निकालने पर रोक कब से लग गई? क्या अब तिरंगा फहराना भी जुर्म हो गया है? उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों को उठाकर ले जाया गया और काफी समय तक उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल रही थी।
उन्होंने कहा कि लोगों को यह तक पता नहीं चल रहा था कि नेहा बोरा कहां हैं और अभिजीत दीपके रात में कहां हैं। बाद में दोपहर में जानकारी मिली कि उन्हें अदालत में पेश किया गया है और अब बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है। मालेगांव में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान टीपू सुल्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने के मामले पर भी वारिस पठान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि टीपू सुल्तान का नाम लेना कब से गलत हो गया? पठान ने कहा कि टीपू सुल्तान एक महान व्यक्ति थे और उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने कहा कि अगर हम उनका नाम नहीं लेंगे, तो क्या गोडसे की तस्वीर लेकर जाएंगे।
गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 16 अक्टूबर को अभिजीत दीपके को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले एहतियातन हिरासत में लिया था। पुलिस ने उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की थी। पुलिस का कहना था कि मार्च के दौरान शांति भंग होने की आशंका थी। इसके बाद दिल्ली की एसईएम अदालत ने दीपके को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी। पुलिस के अनुसार, शांति बनाए रखने के लिए निर्धारित बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इससे पहले 10 अक्टूबर 2026 को भी अभिजीत दीपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान से उतरते ही एहतियातन हिरासत में लिया गया था।