
चित्र देखो कहानी लिखो—90
पत्रिका के परिवार परिशिष्ट में 05 अगस्त को चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता—90 के लिए कई सारे बच्चों ने कहानियां लिख भेजी हैं। इनमें से छह कहानियां परिवार परिशिष्ट के 19 अगस्त के अंक में प्रकाशित की जा रही हैं। शेष कहानियां को यहां पब्लिश किया जा रहा है।
खुशियों की पिकनिक
लक्ष मीणा, 8 वर्ष
एक दिन राहुल और रिया अपने परिवार के साथ पार्क में पिकनिक मनाने गए। मौसम सुहावना था। हरे-भरे पेड़, मुस्कुराता सूरज और रंग-बिरंगे फूल वातावरण को सुंदर बना रहे थे। दोनों ने सैंडविच, तरबूज और नींबू का शरबत बड़े चाव से खाया। तभी एक रंगीन तितली उड़ती हुई आई, जिसे देखकर दोनों बहुत खुश हुए। उन्होंने खेल खेले, खूब हंसी-मजाक किया और प्रकृति का आनंद लिया। घर लौटने से पहले उन्होंने सारा कचरा डस्टबिन में डाल दिया। सभी ने उनकी समझदारी की प्रशंसा की। यह पिकनिक उनके लिए हमेशा यादगार बन गई।
मिराया और मेरी यादगार पिकनिक
ख्यांश खत्री, 08 वर्ष
एक सुहानी सुबह मैं और मेरी छोटी बहन मिराया अपने परिवार के साथ पार्क में पिकनिक मनाने गए। हरी-भरी घास, चमकता सूरज और ठंडी हवा देखकर हम दोनों बहुत खुश हुए। हमने रंग-बिरंगी चादर बिछाई और टोकरी से स्वादिष्ट खाना निकाला। मैंने सैंडविच खाया और मेरी बहन मिराया ने मीठा और रसदार तरबूज बड़े चाव से खाया। तभी एक छोटी चींटी खाने की ओर बढ़ने लगी। मैंने उसे हटाने के बजाय थोड़ा-सा फल उसके लिए अलग रख दिया। मैंने अपनी छोटी बहन को भी समझाया कि हमें सभी जीवों के प्रति दया रखनी चाहिए। खाना खाने के बाद हम दोनों ने आसपास फैला कचरा उठाकर डस्टबिन में डाल दिया। घर लौटते समय हमने निश्चय किया कि हम हमेशा प्रकृति की रक्षा करेंगे, सफाई रखेंगे और हर पिकनिक को यादगार बनाएंगे।
मयंक और फलक की पिकनिक
उत्कर्ष प्रताप सिंह, 8 वर्ष
एक दिन मयंक और उसकी दोस्त फलक अपने परिवार के साथ पिकनिक मनाने एक सुंदर बगीचे में गए। वहां चारों ओर हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल और ठंडी हवा चल रही थी। आसमान में सूरज मुस्कुरा रहा था। दोनों बहुत खुश थे। उन्होंने एक चादर बिछाई। मयंक सैंडविच खाने लगा और फलक मीठा तरबूज खाने लगी। दोनों बातें करते-करते हंस रहे थे। उन्होंने जूस भी पिया और खूब मजे किए। खाना खाने के बाद दोनों बगीचे में घूमने लगे। उन्होंने तितलियों को उड़ते देखा और चींटियों को मेहनत से काम करते देखा। दोनों ने सोचा कि हमें हमेशा प्रकृति से प्यार करना चाहिए। जाते समय उन्होंने अपना सारा कूड़ा डस्टबिन में डाल दिया। यह देखकर उनके माता-पिता बहुत खुश हुए। घर लौटते समय मयंक और फलक ने कहा कि वे फिर से पिकनिक पर आएँगे और हमेशा पार्क को साफ़ रखेंगे।
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तितलियां, चींटियां और हम
यदुराज सिंह देवड़ा, 8 वर्ष
एक सुहावने रविवार की सुबह यदुराज और वेदिका अपने घर के पास वाले खूबसूरत पार्क में पिकनिक मनाने गए। आसमान में सूरज खिलखिला रहा था और हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। पार्क में पहुंचकर दोनों ने हरी घास पर अपनी रंग-बिरंगी चादर बिछाई और पीछे अपना छोटा सा टेंट लगा लिया। वेदिका अपने साथ स्वादिष्ट ताज़ा तरबूज, फल और ब्रेड लेकर आई थी, जबकि यदुराज घर से ठंडी नींबू-पानी की शिकंजी और मज़ेदार सैंडविच बनवाकर लाया था। चादर पर बैठकर दोनों ने पिकनिक की टोकरी खोली। यदुराज मज़े से बड़े चाव के साथ सैंडविच खाने लगा, वहीं वेदिका तरबूज का मीठा टुकड़ा खाकर खुश हो रही थी। पिकनिक का मज़ा तब और बढ़ गया जब उनके आसपास सुंदर तितलियां मंडराने लगीं और छोटी-छोटी चींटियां भी भोजन की खुशबू से वहां पहुंच गईं। फूलों की महक और पक्षियों की चहचहाहट के बीच दोनों ने खूब बातें कीं और ठंडी शिकंजी की चुस्कियां लीं। खुले आसमान के नीचे बिताया गया यह पल यदुराज और वेदिका के लिए बहुत खास बन गया। हंसी-खुशी और स्वादिष्ट व्यंजनों से भरा यह दिन दोनों की दोस्ती को और भी गहरा कर गया।
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पिकनिक का आनंद
ख्वाहिश राठौड़, 8 वर्ष
एक दिन रविवार की सुबह बहुत सुहावनी थी। सूरज हल्की धूप बिखेर रहा था और मौसम बहुत अच्छा था। रोहन और उसकी बहन रिया अपने माता-पिता के साथ पार्क में पिकनिक मनाने गए। उन्होंने एक बड़े पेड़ के नीचे चादर बिछाई और अपना टेंट भी लगाया। टोकरी में स्वादिष्ट सैंडविच, तरबूज, खरबूजा और ठंडा नींबू पानी रखा था। दोनों भाई-बहन खुशी-खुशी खाना खाने लगे। खाते समय उन्होंने ध्यान रखा कि कोई भी कचरा इधर-उधर न फेंकें। उन्होंने फल के छिलके और अन्य कचरा एक थैले में इकट्ठा किया। भोजन के बाद दोनों ने पार्क में खेला, फूलों को देखा और तितलियों का आनंद लिया। उन्होंने पेड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाया और किसी जानवर या कीड़े को परेशान भी नहीं किया। शाम होने पर उन्होंने अपना सारा सामान समेटा और पार्क को पहले की तरह साफ़ छोड़ दिया। वहां मौजूद लोगों ने उनकी स्वच्छता और अच्छे व्यवहार की प्रशंसा की। घर लौटते समय दोनों बच्चों ने निश्चय किया कि वे हमेशा प्रकृति की रक्षा करेंगे और जहां भी जाएँगे, सफाई का विशेष ध्यान रखेंगे।
जंगल में पिकनिक
प्रज्ञान पटेल, 9 वर्ष
राजू और रिया जंगल में पिकनिक मनाने गए। वहां उन्होंने एक टैंट हाउस बनाया। उन्होंने अपनी रंग-बिरंगी चादर को हरे भरे मैदान में बिछाया और उस पर अपने खिलोने, खाना और फल रखे जैसे तरबूज,गाजर और अमरुद। उन्होने जंगल की सैर की और प्रकृति के सुन्दर नजारे का आनन्द लिया और प्रकृति को और करीब से जाना, जब वे थक गए तब वे टेंट मे जाकर आराम करने लगे। हमें भी कभी—कभी ऐसे भी प्रकृति का आनंद लेना चाहिए।
पिकनिक का यादगार दिन
जयंश चौधरी, उम्र 08 वर्ष
एक सुहानी सुबह प्रिशा और उसका छोटा भाई जयंश अपने माता-पिता के साथ पास के सुंदर पार्क में पिकनिक मनाने गए। चारों ओर हरियाली, रंग-बिरंगे फूल, चहचहाते पक्षी और हल्की ठंडी हवा वातावरण को और भी मनमोहक बना रहे थे। उन्होंने पेड़ की छाया में चटाई बिछाई और टोकरी से स्वादिष्ट सैंडविच, तरबूज, खरबूजा और नींबू का शरबत निकाला। जयंश बड़े चाव से सैंडविच खाने लगा, जबकि प्रिशा मीठे तरबूज का आनंद ले रही थी। तभी एक छोटी-सी तितली उनके पास आकर मंडराने लगी। दोनों उसे देखकर बहुत खुश हुए और कुछ देर तक उसे निहारते रहे। भोजन करने के बाद उन्होंने पार्क में खेलकूद की, पेड़ों और फूलों को ध्यान से देखा तथा प्रकृति की सुंदरता का आनंद लिया। घर लौटने से पहले प्रिशा ने कहा, "हमें यह जगह बिल्कुल साफ़ छोड़नी चाहिए।" जयंश ने तुरंत उसकी बात मानी। दोनों ने मिलकर कूड़ा कूड़ेदान में डाला और अपनी चटाई समेट ली। यह देखकर उनके माता-पिता बहुत प्रसन्न हुए और उनकी जिम्मेदारी की सराहना की। उस दिन प्रिशा और जयंश ने समझा कि पिकनिक का असली आनंद केवल स्वादिष्ट भोजन में नहीं, बल्कि प्रकृति की रक्षा करने, स्वच्छता बनाए रखने और परिवार के साथ बिताए गए खुशहाल पलों में होता है।
सच्ची दोस्ती और पिकनिक का मज़ा
लक्ष्य सोनी, 10 वर्ष
एक सुंदर और सुहावना दिन था। आसमान में धूप खिली हुई थी और छोटे-छोटे प्यारे बादल थे। ऐसे खूबसूरत मौसम को देखकर लक्ष्य और हिमांशी ने तय किया कि वे आज घर के पास वाले हरे-भरे मैदान में पिकनिक मनाने जाएंगे। दोनों ने मिलकर पिकनिक की तैयारी शुरू कर दी। मां ने उनके लिए स्वादिष्ट सैंडविच बनाए और एक बड़ी सी टोकरी में ताज़ी ब्रेड और फल रख दिए। लक्ष्य ने पीने के लिए नींबू पानी का एक बड़ा जग तैयार किया। हिमांशी को तरबूज बहुत पसंद था, इसलिए उसने एक बड़ा और मीठा तरबूज भी साथ रख लिया। मैदान में पहुंचकर दोनों ने सबसे पहले पेड़ों के पास अपना एक लाल रंग का छोटा सा तंबू लगाया। तंबू लगाने के बाद उन्होंने घास पर एक चटाई बिछाई और सारा खाने-पीने का सामान सजा दिया। चारों तरफ फैली हरियाली और ताज़ी हवा में बैठकर खाने का मज़ा ही कुछ और था।दोनों ने पेट भरकर खाना खाया, ठंडी हवा का आनंद लिया और खूब सारी बातें कीं। प्रकृति के बीच बिताए इस समय ने उनके मन को बेहद सुकून और खुशी दी।गैजेट्स और बंद कमरों से बाहर निकलकर प्रकृति की गोद में समय बिताने से हमारे मन को सच्चा सुकून और ताजगी मिलती है।
पिकनिक की सीख
अन्वी, 8 वर्ष
रविवार की सुबह बहुत सुहानी थी। नीला आसमान, मुस्कुराता सूरज, ठंडी हवा और पेड़ों की हरियाली देखकर मेरा मन खुशी से भर गया। इससे भी ज्यादा खुशी मुझे इस बात की थी कि आज मैं और मेरा छोटा भाई अथर्व पास के एक सुंदर उद्यान में पिकनिक मनाने जा रहे थे। हम दोनों मानो खुशी से उछल रहे थे। वहां पहुंचकर पहले तो हम दोनों ने नारंगी रंग का एक सुंदर सा टेंट लगाया। हमें ऐसा लगा मानो हम प्रकृति की गोद में एक छोटा सा घर बना रहे हों। उसके बाद जी भरकर तरह तरह के खेल खेले। थक जाने के बाद हमने उद्यान में एक रंग-बिरंगी चादर बिछाई। हम दोनों को बड़ी जोर की भूख लग आई थी। हमने टोकरी से सैंडविच, तरबूज, खरबूजा और नींबू पानी निकाला। अब हम मिलकर हंसी-खुशी स्वादिष्ट भोजन का आनंद ले रहे थे।
खाना खाते समय मेरी नज़र धीरे धीरे हमारी ओर बढ़ रही एक छोटी-सी चींटी पर पड़ी। मैंने उसके लिए तरबूज का एक छोटा-सा टुकड़ा अलग रख दिया। कुछ ही देर में वह अपने साथियों के साथ आई और भोजन लेकर चली गई। यह देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। उसी समय एक रंग-बिरंगी तितली फूलों पर मँडराने लगी। मेरा भाई खिलखिलाकर उसे पकड़ने ही वाला था कि मैंने उसे प्यार से समझाया, "भैया, प्रकृति की सुंदरता तभी बनी रहती है, जब हम उसे छेड़ते नहीं, बल्कि उसका सम्मान करते हैं।" मेरी बात उसके मन में उतर गई। हम दोनों ने चारों ओर देखा। पेड़ हमें शुद्ध हवा दे रहे थे, फूल अपनी खुशबू बिखेर रहे थे, पक्षी मधुर स्वर में गा रहे थे और छोटी-सी चींटी अपने परिवार के लिए भोजन जुटाने में लगी थी। मुझे महसूस हुआ कि प्रकृति का हर जीव और हर पौधा हमारे जीवन के लिए कितना महत्वपूर्ण है। पिकनिक समाप्त होने पर हमने अपना सारा कूड़ा एक थैले में इकट्ठा किया और डस्टबिन में डाल दिया। जाते समय मैंने पीछे मुड़कर देखा। हरा-भरा उद्यान पहले की तरह स्वच्छ और सुंदर दिखाई दे रहा था। मुझे लगा जैसे पेड़, फूल और तितलियाँ हमें धन्यवाद कह रहे हों। पिकनिक से मैंने सीखा कि प्रकृति हमारा सबसे बड़ा परिवार है। यदि हम पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और स्वच्छ वातावरण की रक्षा करेंगे, तभी धरती मुस्कुराएगी और हमारा भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। सच है, प्रकृति से प्रेम करना ही सच्ची मानवता है।
पिकनिक का यादगार दिन
जयनाम डांगी, 12 वर्ष
रविवार की सुबह बहुत सुहानी थी। आसमान में सूरज चमक रहा था और हल्के-हल्के बादल तैर रहे थे। राहुल और उसकी बहन रिया अपने माता-पिता के साथ पास के एक सुंदर पार्क में पिकनिक मनाने गए। उन्होंने हरे-भरे पेड़ों की छाया में एक रंग-बिरंगी चादर बिछाई। साथ में स्वादिष्ट सैंडविच, तरबूज, जूस और अन्य खाने की चीज़ें भी ले गए थे। राहुल खुशी-खुशी सैंडविच खाने लगा और रिया मीठे तरबूज का आनंद लेने लगी। दोनों हँसते-खेलते बातें कर रहे थे। खाने के बाद उन्होंने पार्क में दौड़ लगाई, तितलियों को देखा और सुंदर फूलों की प्रशंसा की। पेड़ों पर चिड़ियों की चहचहाहट सुनकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कुछ देर खेल भी खेले और खूब मस्ती की। पिकनिक समाप्त होने पर दोनों भाई-बहन ने अपने माता-पिता के साथ मिलकर सारी बची हुई चीज़ें समेटीं और कूड़ा कूड़ेदान में डाला। उन्होंने पार्क को बिल्कुल साफ रखा। घर लौटते समय सभी बहुत खुश थे। राहुल और रिया ने निश्चय किया कि वे हमेशा प्रकृति की रक्षा करेंगे, स्वच्छता का ध्यान रखेंगे और हर पिकनिक के बाद जगह को साफ छोड़ेंगे।
नित्या व रोहन की कैंपिंग
भावना यदु, 11 वर्ष
नित्य और रोहन कैंपिंग में गए थे, जहां उन्होंने बहुत से पेड़ पौधे देखें उन्होंने रंग—बिरंगी तितलियां देखीं। तभी रोहन को बहुत जोरों से भूख लगी। तभी नित्या अपने घर से कुछ फल और जूस लेकर आई। वह सब उन्होंने अपने बैग से निकाली और एक बड़ी सी चटाई बिछाकर दोनों बैठे और अपने फल और जूस निकाल कर बड़े मजे से स्वाद लेकर मीठे मीठे फल को खाने लगे। नित्या ने कहा यह फल तो बड़े मीठे और स्वादिष्ट है। तभी रोहन ने कहा मेरा भी ब्रेड बहुत ही स्वादिष्ट है। इस तरह उन दोनों ने कैंपिंग का मजा लिया।
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अच्छी सीख
नव्या गौतम, 13 वर्ष
रिया और रेयांश दोनों भाई बहन थे। रिया बड़ी थी। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ने जाते थे, लेकिन स्कूल से आते ही दोनों होमवर्क की बजाय फोन, लैपटॉप, वीडियो गेम लेकर बैठ जाते थे और कम से कम दो-तीन घंटे से पहले उठते नहीं थे। उनके मम्मी पापा परेशान हो गए थे। एक छुट्टी के दिन मम्मी—पापा ने रिया व रेयांश को सुबह जल्दी जगाया और तैयार होने के लिए कहा उनके लाख पूछने पर भी नहीं बताया सभी कार में सवार होकर शहर से दूर निकल गए। कुछ ही देर में मम्मी ने खेत के पास जगह देखकर चादर बिछा दी और खाने के सामान रख दिए और रिया रेयांश को कहा कि तुम खेल लो अब तो दोनों के मजे हो गए दो-तीन घंटे कैसे खेल में बीत गए पता ही नहीं चला। थोड़ी देर बाद पापा ने आवाज लगाकर कहा कि जल्दी आओ खाना ठंडा हो जाएगा। दोनों जल्दी-जल्दी दौड़कर आए उन्होंने खाने का आनंद लिया। शाम को जब घर आए तो उन्होंने मम्मी पापा से वायदा किया कि अब वो अपना समय सोशल मीडिया पर बिताने की बजाय खेलकूद व पढ़ाई में लगाएंगे। उस दिन के बाद सचमुच रिया और रेयांश ने एक अच्छा सबक लिया। अब मम्मी,पापा, रिया, रेयांश सभी खुश थे।
प्रकृति की गोद में दो पल
शची सोनी, 13 वर्ष
रविवार की सुहानी सुबह थी। रोहन और उसकी बहन रिया अपने परिवार के साथ पार्क में पिकनिक मनाने गए। चारों ओर हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल, तितलियां और हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। नीले आसमान में मुस्कुराता सूरज पूरे वातावरण को और भी सुंदर बना रहा था। दोनों बच्चों ने चादर बिछाई और टोकरी से सैंडविच, जूस, तरबूज और अन्य फल निकाले। रोहन सैंडविच खा रहा था और रिया बड़े चाव से तरबूज खा रही थी। दोनों प्रकृति की गोद में बैठकर बहुत खुश थे। पास में एक छोटी-सी चींटी भी घूम रही थी, जिसे देखकर बच्चे मुस्कुरा दिए। उन्होंने ध्यान रखा कि खाना इधर-उधर न गिरे और पार्क साफ़ रहे। खाना खाने के बाद दोनों ने पेड़ों की छाया में खेला, तितलियों को देखा और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लिया। उन्हें महसूस हुआ कि प्रकृति के बीच बिताए गए ये दो पल मन को शांति, खुशी और नई ऊर्जा से भर देते हैं। शाम होने पर वे अपना सारा सामान समेटकर घर लौट आए। उस दिन की पिकनिक उनके लिए एक सुंदर याद बन गई।
दोस्तों के साथ मस्ती
हीरल बरड़िया 8 वर्ष
रविवार की सुबह दो दोस्त, रोहन और मोहन, पिकनिक मनाने पार्क गए। वे अपने साथ एक रंग-बिरंगी चटाई और फलों से भरी टोकरी लेकर आए थे। टोकरी में सेब, केला, आम, संतरा, अंगूर और तरबूज थे। दोनों ने पेड़ की ठंडी छाया में चटाई बिछाई और अपनी फल पार्टी शुरू कर दी। वे फलों के बारे में मजेदार बातें करते हुए खाते जा रहे थे। तभी एक नन्हा खरगोश उछलता हुआ उनके पास आ गया। दोनों दोस्तों ने प्यार से उसे भी कुछ फल खिलाए। थोड़ी ही देर में रंग-बिरंगे पक्षी भी पेड़ पर आकर चहचहाने लगे। ऐसा लग रहा था जैसे पूरा पार्क उनकी फल पार्टी में शामिल हो गया हो। अचानक तेज हवा चली और अंगूर का गुच्छा लुढ़ककर दूर चला गया। दोनों दोस्त हंसते हुए उसके पीछे दौड़े। तभी एक शरारती बंदर आम उठाकर पेड़ पर चढ़ गया। दोनों ने उसे देखकर हंसते हुए कहा, "लगता है बंदर भी हमारी पार्टी में मेहमान बन गया!" बंदर ने आम खाया और मुस्कुराता हुआ चला गया। फल खाने के बाद दोनों ने पार्क की अच्छी तरह सफाई की, सारे छिलके कूड़ेदान में डाले और चटाई समेट ली। घर लौटते समय उन्होंने तय किया कि वे हर महीने ऐसी फल पार्टी करेंगे और अपने दोस्तों को भी बुलाएंगे।
रोहन और रानी की पिकनिक
मान्या माहेश्वरी, 7 वर्ष
एक दिन दो बच्चे जिनका नाम रोहन और रानी था। वह दोनों अपने मम्मी पापा के साथ कैम्पिंग करने गए।
मम्मी पापा उन्हें एक जगह बिठाकर कही ट्रैकिंग करने चले गए। रोहन और रानी को भूख लगी उन्होंने अपने खाने के सामान निकाले और उन्होंने देखा कि खाने की टोकरी में तरबूज, सैंडविच, बन और ज्यूस था।
वो दोनों बहुत खुश हो गए और खाने लगे वहां पर एक चींटी और तितली आ गई फिर उन्होंने तरबूज का एक टुकड़ा चींटी को भी खाने को दे दिया। वो दोनों खाना खाकर बहुत खुश थे और उन्होंने ढेर सारी मस्ती की।
सच्ची मित्रता का उपहार
ओमांश विजयवर्गीय, 7 वर्ष
एक सुहानी सुबह विशु और उसकी बहन क्रिधा पिकनिक मनाने एक सुंदर बगीचे में पहुँचे। वहाँ हरी घास, बड़े-बड़े पेड़, रंग-बिरंगे फूल और चहचहाते पक्षी वातावरण को मनमोहक बना रहे थे। दोनों ने चटाई बिछाई और टोकरी से सैंडविच, जूस तथा तरबूज निकालकर खाने लगे। इसी बीच उन्होंने देखा कि कुछ चींटियाँ अपने भोजन की तलाश में इधर-उधर घूम रही हैं। विशु उन्हें हटाने लगा, लेकिन क्रिधा ने उसे रोकते हुए कहा, भैया "ये भी भगवान की बनाई हुई जीव हैं। हमें इन्हें नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए।" दोनों ने खाने के बाद बचा हुआ थोड़ा-सा भोजन एक सुरक्षित स्थान पर रख दिया ताकि छोटे जीव भी अपना पेट भर सकें। जब ये बात उन्होंने माता पिता को बताई तो उन्होंने उनकी प्रशंसा की और कहा कि बच्चों में दया और करुणा का भाव ही उन्हें सच्चा इंसान बनाता है। उस दिन विशु और क्रिधा ने सीखा कि प्रकृति से प्रेम करना, छोटे-छोटे जीवों की रक्षा करना और सभी के प्रति दयालु होना ही सबसे बड़ी अच्छाई है।
भाई—बहन का खेल
अनिका गुप्ता, 7 वर्ष
आर्या और विहान दोनों भाई बहन थे। दोनों को साथ में खेलना खाना बहुत पसंद था। वे घर के पास के बगीचे में टेंट लगाकर फूल और घास के बीच में पिकनिक किया करते थे। आर्या को फल बहुत पसंद थे और विहान को बाहर का खाना खाना बहुत पसंद था। एक दिन पिकनिक पर ब्रेड और बर्गर खाने से विहान का पेट दर्द हुआ। उस दिन विहान को समझ आया कि हमें बाहर का खाना नहीं खाना चाहिए। फिर वो भी आर्या की तरह फल खाने लगा।
संडे इज फन-डे
अनिक्षा भारद्वाज, 7 वर्ष
आज संडे का दिन था। प्रिंशु और राम घर मे टीवी देखने में लगे थे। उनकी मम्मी ने उनकी टीवी बंद कर दिया। थोड़ी देर में वो दोनों बोर होने लगे। बाहर मौसम सुहाना था तो दोनों ने सोचा कि आज संडे को फन-डे बनाया जाए। प्रिंशु ने कहा- आज गार्डन में पिकनिक मनाने चलते हैं, जहां हरियाली भी हैं और झूले भी हैं । हम वहां नाश्ता भी ले चलेंगे। उन्होंने अपनी मम्मी पापा के साथ सामान पैक किया और घूमने चले गए। प्रिंशु और राम ने गार्डन में अपना टेंट हाउस लगाया और गार्डन में खूब खेले। उसके बाद उनकी मम्मी ने उन्हें नाश्ता करने बुला लिया। नाश्ते में उनकी पसंद के तरबूज, बर्गर और जूस था । दोनों बहन-भाई खेलते खेलते थक गए थे और उन्हें भूख भी लग रही थी। इसलिए वह आ गए और जल्दी-जल्दी नाश्ता करने लगे। राम खाना गिराने लगा जिससे वहां चीटियां आने लग गई। फिर प्रिंशु ने राम को समझाया कि खाना धीरे-धीरे खाना चाहिए और नीचे नहीं गिराना चाहिए। उन्होंने अपने चटाई पर से चीटियों को हटाया और उनके लिए एक तरफ कुछ बिस्कुट के टुकड़े डाल दिए। दोनों ने थोड़ी देर में नाश्ता खत्म किया और वापस खेलने लगे। इस तरह उन्होंने बिना टीवी और मोबाइल के अपना संडे को एंजॉय किया और खुशी-खुशी घर आ गए।
पिकनिक का मजा
निकांक्षा चौधरी, 7 वर्ष
एक बार हिमांशु और हिमांशी दोनों भाई-बहन पिकनिक मनाने एक सुंदर बाग में गए। वहाँ उन्होंने बहुत सारे जानवरों और सुंदर पेड़-पौधों की तस्वीरें लीं। उन्होंने एक बड़ा-सा टेंट लगाया और खूब खेल-कूद की। दोनों ने तय किया कि वे वहां तीन-चार दिन रहेंगे। कुछ देर बाद दोनों ने मिलकर स्वादिष्ट खाना बनाया और साथ बैठकर खाया। शाम होने पर वे अपने टेंट में जाकर आराम से सो गए। अगली सुबह जब वे उठे, तो तेज़ बारिश होने लगी। दोनों तुरंत टेंट के अंदर चले गए। थोड़ी देर बाद बारिश रुक गई और खिलखिलाती धूप निकल आई। बारिश के बाद पूरा बाग बहुत सुंदर और हरा-भरा दिखाई देने लगा। उन्होंने रंग-बिरंगे फूल देखे और प्रकृति का आनंद लिया। रात होने पर दोनों ने फिर से खाना पकाया, खाया और टेंट में जाकर सो गए। अगली सुबह उन्होंने अपना सामान समेटा, बाग को साफ रखा और खुशी-खुशी अपने घर लौट आए।
भाई—बहन की पिकनिक
सूर्यांश राठौड़, 10 वर्ष
एक दिन रिया अपने भाई आदित्य से कहने लगी कि आदित्य हम बहुत दिनों से पिकनिक पर नहीं गए हैं। अभी तो गर्मी की छुट्टियाँ भी चल रही हैं। तभी आदित्य ने कहा कि चलते हैं। तुम्हारी और मेरी, दोनों की पिकनिक हो जाएगी। तुम जल्दी से ड्रेस पहनकर तैयार हो जाओ। रिया तैयार होकर आदित्य के पास गई और कहा कि अब जल्दी पिकनिक मनाने चलो। फिर वह दोनों जंगल में गए। वहां पर उन्होंने एक टेंट लगाया ओर साथ लाए हुए फल खाने लगे और खूब मजा किया। वह समझ गए कि अपनो के साथ बिताए गए समय से बढ़कर ओर कोई बेहतर चीज नहीं हे जब भी समय मिले अपनो के साथ मिलकर घूमना फिरना हंसना बोलना आनंद करना चाहिए।
मौसम और पिकनिक
प्रगति औदिच्य, उम्र 12 वर्ष
एक दिन इशू और नंदू ने पिकनिक मनाने का फैसला किया। मौसम सुहाना था। दोनों बहुत खुश थे क्योंकि दोनों पहली बार पिकनिक मनाने जा रहे थे। नंदू ने एक टोकरी में खाने का सामान रखा। इशू ने अपनी पसंद की चटाई ली और अपने घर के पास पार्क की और चल पड़े, पार्क मे एक पेड़ के पास चटाई बिछाई और एक टेंट लगा दिया। चटाई पर बैठते ही भूख लगने लगी, नंदू ने एक सेंडविच खाया और इशू ने तरबूज का टुकड़ा लिया और खाते खाते बात कर रहे थे सेंडविच और तरबूज खाकर बहुत मजा आया। उनके पास सें एक तितली और एक चींटी गुजरी। इशू ने कहा— देखो नंदू यहां कितने प्यारे छोटे जीव भी पिकनिक मना रहे हैं। वे दोनों मिलकर और तरबूज खाने लगे, खूबसूरत पिकनिक का आनंद लिया। यह पिकनिक उनके लिए एक यादगार अनुभव बन गई।
रीना और राहुल की दोस्ती
दर्शिल गहलोत, 9 वर्ष
एक दिन की बात है, एक लड़की का नाम रीना था। उसका छोटा भाई राहुल था, वह बहुत बदमाश था। रीना बहुत समझदार थी। उनकी दादी जी हमेशा उनको अच्छी बातें सिखाती थीं पर राहुल उनकी बातों को मानता ही नहीं था। एक दिन पूरा परिवार पिकनिक पर गया था वहां पर भी राहुल शैतानी ही कर रहा था सबने खाना निकाला। उतने में ही एक चींटी वहां आई राहुल उसे हाथ में लेकर मारने वाला ही था, उतने में ही रीना ने उसे रोक लिया। रीना ने कहा इस छोटी-सी चींटी ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है। उसे क्यों मार रहे हो। राहुल बोला कि यह मेरे पास आई थी। मैं परेशान हो रहा हूं। इसलिए मैं इसे मारूंगा। रीना ने उसे समझाया कि हमें अपने से कमजोर प्राणियों को परेशान नहीं करना चाहिए। हमें पाप लगता है रीना की बातें सुनकर राहुल को बहुत पछतावा हुआ। उसने अपनी बहन और पूरे परिवार वालों से माफी मांगी और कहा कि वह किसी भी प्राणी को परेशान नहीं करेगा। सबने उसे माफ कर दिया।
जादुई चटाई की सैर
दिव्यम माहेश्वरी, 11 वर्ष
एक बार रोहन और पिंकी पिकनिक पर गए थे। उनके साथ उनके मम्मी पापा भी थे। वहां पर एक टेंट लगाकर चटाई बिछाई और उस पर बैठकर खाने का सामान बाहर निकालने लगे। रोहन और पिंकी ने चटाई पर बैठकर सारा सामान बाहर निकाला। तभी पिंकी ने मजाक में कहा— सोचो अगर यह रंग- बिरंगी चटाई उड़ने लगे तो कैसा लगेगा। दोनों ने अपनी आंखें बंद करके यह कल्पना थी कि वह चटाई पर बैठकर सूरज दादा के पास बादलों की सैर कर रहे हैं। दोनों ने एक मजेदार धुन बनाई और गाना गाने लगे। फिर थोड़ी ही देर में अपनी आंखें खोलते ही दोनों एक दूसरे को देखकर हंस पड़े। उनके मम्मी पापा उनको इस प्रकार हंसते हुए देख कर बहुत खुश हुए तभी और रोहन और पिंकी ने मम्मी-पापा से कहा— मम्मी हम अगली बार फिर कभी ऐसे ही सुहावने मौसम में पिकनिक मनाने आएंगे।
पिकनिक के यादगार दिन
जितेश मीणा, 11 वर्ष
एक रविवार की सुबह आरव और अमन की बगीचे में पिकनिक मनाने गए। मौसम बहुत सुहावना था। आसमान में सूरज मुस्कुरा रहा था, हल्के बादल थे और चारों ओर हरियाली फैली हुई थी। उन्होंने पेड़ की छाया में एक रंग-बिरंगी चटाई बिछाई और पास में तंबू लगाया। उनकी टोकरी में सैंडविच, तरबूज, अमरूद और अन्य स्वादिष्ट चीजें थीं। आरव सैंडविच खा रहा था जबकि अमन मीठे तरबूज का आनंद ले रही थी। दोनों मिल-बांटकर खाना खा रहे थे और खूब हँस रहे थे। पास में रंग-बिरंगी तितलियां फूलों पर मंडरा रही थीं और एक छोटी-सी चिड़िया अपना भोजन लेकर जा रही थी। बच्चों ने प्रकृति के इस सुंदर दृश्य का आनंद लिया।
खाना खाने के बाद दोनों ने पार्क में खेल खेले और पेड़ के नीचे धूप में पक्षियों की चहचहाहट सुनी और फूलों की खुशबू का आनंद लिया। जाते समय उन्होंने अपना सारा कचरा डस्टबिन में डाला और पार्क को साफ रखा।
घर लौटते समय दोनों बहुत खुश थे। उन्होंने निश्चय किया कि वे हमेशा प्रकृति की रक्षा करेंगे, स्वच्छता बनाए रखेंगे और हर काम मिल-जुलकर करेंगे। यह पिकनिक उनके जीवन का एक सुंदर और यादगार अनुभव बन गई।
पिकनिक का जादुई दिन
रावी रितेश, 10 वर्ष
एक सुहानी सुबह थी। आसमान में सुनहरा सूरज मुस्कुरा रहा था और हल्के सफेद बादल तैर रहे थे। हरे मैदान में एक पीला टेंट लगा था। पास में घना हरा पेड़ अपनी ठंडी छाया बिखेर रहा था। चेकदार कपड़े पर बैठे थे दो खुश बच्चे—राज और मीरा। राज पीली टी-शर्ट और नीली शॉर्ट्स में सैंडविच का मजा ले रहा था। मीरा बैंगनी पोनीटेल बाँधे, नीली टी-शर्ट और बैंगनी स्कर्ट में तरबूज का रसीला टुकड़ा खा रही थी। बीच में विकर की टोकरी में और सैंडविच व तरबूज रखे थे। पास में नींबू जूस का जग और स्ट्रॉ वाला गिलास था। जमीन पर हरा सेब और तरबूज के टुकड़े बिखरे थे। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल खिले थे। एक तितली फूल पर मंडरा रही थी और एक चींटी धीरे-धीरे रेंग रही थी। राज बोला, “मीरा, देखो कितना सुंदर दिन है! यहां आकर लगता है जैसे हम प्रकृति के राजा-रानी बन गए हों।” मीरा हंसते हुए बोली, “हां राज! शहर के शोर से दूर यह शांति मन को सुकून देती है। मां सही कहती थीं।” दोनों ने साथ तरबूज खाया, सैंडविच बांटे और हंसी-मजाक किए। पेड़ की छाया में बैठकर बादलों के आकार पहचाने। हवा में फूलों की पंखुड़ियाँ हिलने लगीं मानो वे भी खुशी से नाच रहे हों। शाम ढलने से पहले दोनों ने वादा किया कि हर महीने ऐसे ही पिकनिक मनाएँगे। क्योंकि प्रकृति की गोद में बैठकर खाना, हंसना और बातें करना ही सबसे बड़ा उपहार है। उस दिन राज और मीरा ने सीखा कि खुशी बहुत दूर नहीं होती— वह हमारे आसपास ही छिपी होती है।
पिकनिक की मस्ती
अद्विक जैन, 8 वर्ष
एक सुहानी सुबह आरव और उसकी छोटी बहन अन्वी अपने माता-पिता के साथ पार्क में पिकनिक मनाने गए। मौसम बहुत सुंदर था। आसमान में हल्के बादल थे और सूरज मुस्कुराता हुआ दिखाई दे रहा था। हरी-भरी घास पर उन्होंने एक रंग-बिरंगी चादर बिछाई। माँ ने टोकरी में स्वादिष्ट सैंडविच, तरबूज, जूस और अन्य फल रखे थे। दोनों बच्चे खुशी-खुशी साथ बैठकर खाना खाने लगे। आरव ने सैंडविच का आनंद लिया, जबकि अन्वी बड़े चाव से तरबूज खा रही थी। उन्होंने मिल-बाँटकर खाना खाया और खूब बातें कीं। खाने के बाद दोनों ने गेंद से खेला, पेड़ों के नीचे दौड़े और फूलों के पास तितलियों को उड़ते हुए देखा। उन्होंने पार्क को साफ रखने का भी ध्यान रखा। खाने के बाद सभी कचरे को इकट्ठा करके डस्टबिन में डाल दिया। माता-पिता ने बच्चों की इस अच्छी आदत की बहुत प्रशंसा की। उन्होंने समझाया कि प्रकृति की सुंदरता बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। बच्चों ने वादा किया कि वे हमेशा स्वच्छता का ध्यान रखेंगे और किसी भी सार्वजनिक स्थान को गंदा नहीं करेंगे। शाम होने पर पूरा परिवार खुशी-खुशी घर लौट आया। यह पिकनिक उनके लिए यादगार बन गई। इस दिन बच्चों ने न केवल मौज-मस्ती की, बल्कि मिल-जुलकर रहने, भोजन साझा करने, प्रकृति से प्रेम करने और स्वच्छता बनाए रखने का महत्वपूर्ण संदेश भी सीखा।
एक सुहावना दिन
पुलकित, 13 साल
सच्ची दोस्ती और पिकनिक का मज़ाएक सुहावना दिन था। सूरज चमक रहा था और आसमान में हल्के बादल छाए हुए थे। रोहन और मिनी बहुत अच्छे दोस्त थे। उन्होंने तय किया कि आज वे घर के पास वाले सुंदर बगीचे में पिकनिक मनाने जाएंगे। वे अपने साथ एक बड़ा सा टेंट, चटाई और खाने-पीने की बहुत सारी चीज़ें लेकर आए। बगीचे के हरे-भरे मैदान में उन्होंने एक पेड़ के पास अपना टेंट लगाया। फिर उन्होंने ज़मीन पर एक रंग-बिरंगी चटाई बिछाई।मिनी अपने साथ फलों से भरी एक सुंदर टोकरी लाई थी, जिसमें ताजे तरबूज और सेब थे। रोहन स्वादिष्ट सैंडविच लेकर आया था। दोनों चटाई पर बैठ गए और मजे से खाने लगे। रोहन सैंडविच खाने में मग्न था, वहीं मिनी लाल-लाल तरबूज का टुकड़ा देखकर बहुत खुश हो रही थी। चटाई पर तरबूज के कुछ और टुकड़े और पानी का जग भी रखा था। वे दोनों आपस में बातें कर रहे थे और हंस रहे थे। तभी उनका ध्यान चटाई के कोने पर रेंगती हुई एक छोटी सी चींटी पर गया। चींटी तरबूज के एक छोटे से टुकड़े को उठाने की कोशिश कर रही थी। मिनी ने हंसते हुए कहा, "देखो रोहन, हमारी तरह इस नन्ही चींटी को भी पिकनिक मनाना पसंद है!"रोहन और मिनी ने प्रकृति के बीच बहुत अच्छा समय बिताया। ठंडी हवा चल रही थी और चारों तरफ रंग-बिरंगे फूल खिले थे। शाम होने से पहले दोनों ने अपना सामान समेटा और खुशी-खुशी अपने घर लौट आए। इस पिकनिक ने उनकी दोस्ती को और भी गहरा बना दिया।
प्रकृति की गोद में अनोखा पिकनिक
मीनाक्षी 11 साल
एक सुहावना दिन था। नीले आसमान में सूरज चमक रहा था और ठंडी हवा चल रही थी। रोहन और उसकी छोटी बहन रिया अपनी गर्मियों की छुट्टियों का आनंद लेने के लिए बहुत उत्सुक थे। उनके माता-पिता ने उन्हें पास के एक खूबसूरत बगीचे में पिकनिक पर ले जाने का फैसला किया। बगीचे में पहुंचकर दोनों ने हरी-भरी घास पर एक रंग-बिरंगी चटाई बिछाई। उनके पीछे एक छोटा सा लाल तंबू भी लगा था। रोहन और रिया भूख लगने पर चटाई पर बैठ गए। रोहन चटखारे लेकर अपना पसंदीदा सैंडविच खाने लगा, जबकि रिया तरबूज के मीठे और रसीले टुकड़ों का मजा ले रही थी। पास ही में खाने-पीने की चीजों से भरी एक सुंदर टोकरी और नींबू पानी का ठंडा जग रखा था। तभी रिया का ध्यान चटाई के पास रेंगते हुए एक छोटे से कीड़े (कैटरपिलर) पर गया। पास ही एक रंग-बिरंगी तितली भी फूलों पर मंडरा रही थी। रोहन ने रिया से कहा, "देखो रिया, प्रकृति में हर जीव का अपना एक महत्व है। हमें इन छोटे जीवों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।" रिया ने मुस्कुराते हुए हामी भरी। खाना खाने के बाद दोनों ने बगीचे में बिखरा सारा कचरा समेटा और उसे कूड़ेदान में डाला। उन्होंने सीखा कि प्रकृति हमें इतनी खुशी देती है, इसलिए इसे साफ रखना हमारा भी फर्ज है। शाम को दोनों भाई-बहन ढेर सारी खूबसूरत यादें और चेहरे पर मुस्कान लेकर अपने घर लौट आए। सीख: हमें प्रकृति और पर्यावरण से प्यार करना चाहिए और उसे हमेशा साफ-सुथरा रखना चाहिए।
संडे की मजेदार पिकनिक
नमन तंवर, 12 वर्ष
रोहन और रिया दोनों भाई बहन थे। रविवार का दिन था और मौसम बहुत सुहाना था। आसमान में चमकदार सूरज मुस्कुरा रहा था और ठंडी ठंडी हवा चल रही थी। दोनों ने अपनी छुट्टियों को खास बनाने के लिए घर के पास वाले सुंदर पार्क में पिकनिक मनाने की योजना बनाई। उन्होंने अपने साथ एक बड़ा और सुंदर नारंगी रंग का तंबू लिया और उसे हरी भरी घास पर लगा दिया रिया ने जमीन पर बैठने के लिए एक रंग बिरंगी चटाई बिछाई रोहन अपने साथ खाने पीने की चीजों से भरी एक सुंदर टोकरी लेकर आया था। चटाई पर बैठकर दोनों ने मिलकर अपनी पसंदीदा चीज खाने की तैयारी की रोहन बड़े चाव से स्वादिष्ट सेंडविच खाने लगा। जबकि रिया ने ताज और मीठा तरबूज खाना शुरू किया पास ही में नींबू पानी का ठंडा गिलास और स्वादिष्ट बिस्किट भी रखे थे। तभी चटाई के पास एक छोटी सी चींटी और रंग बिरंगी तितली भी आ गई मानो वह भी उनकी इस खुशियों भरी पिकनिक का हिस्सा बनना चाहती थी। आसपास खेले सुंदर फूलों और ऊंचे पेड़ों के बीच दोनों भाई बहनों ने खूब बातें की और प्रकृति का आनंद लिया इस पिकनिक से उन्होंने शिखा की आपस में मिल बैठकर खाने से प्यार बढ़ता है और प्रकृति के बीच समय बिताने से हमारा मन हमेशा खुश रहता है शाम होने से पहले दोनों ने अपनी सारी चीज समिति और एक सुखद याद के साथ खुशी-खुशी अपने घर लौट आए ।
पिकनिक का मज़ेदार दिन
विदिशा सुथार, 7 वर्ष
रवि और रानी बहुत अच्छे दोस्त थे। एक रविवार को वे अपने परिवार के साथ हरे-भरे पार्क में पिकनिक मनाने गए। वहाँ ठंडी हवा चल रही थी, पेड़ लहरा रहे थे और प्यारे-प्यारे फूल खिले हुए थे। दोनों ने चटाई बिछाई और टोकरी से स्वादिष्ट खाना निकाला। रवि ने सैंडविच खाया और रानी ने मीठा तरबूज खाया। दोनों ने नींबू का रस भी पिया। खाना खाते-खाते उनके पास एक सुंदर तितली उड़कर आई। वे तितली के पीछे दौड़े और खूब हंसे। कुछ देर बाद उन्होंने मिलकर अपना सारा कचरा डस्टबिन में डाला और पार्क को साफ रखा। फिर दोनों ने पेड़ों को पानी दिया और प्रकृति की सुंदरता का आनंद लिया। शाम होने पर वे खुश-खुश घर लौटे। उस दिन उन्होंने सीखा कि मिल-जुलकर रहना, प्रकृति का सम्मान करना और साफ-सफाई रखना हर बच्चे की जिम्मेदारी है।