पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।
लोकतंत्र का सबसे बड़ा हथियार है जन आंदोलन
जब लोगों में बदलाव की इच्छा तीव्र होती है और सत्ता पूरी क्षमता से इसे दबाना चाहती है, तो बदलाव की यही इच्छा धीरे-धीरे जन आंदोलन का स्वरूप ले लेती है। जन आंदोलन के आगे सत्ता को झुकना ही पड़ता हैै। देश के इतिहास में जन आंदोलनों का बड़ा महत्व रहा है। चाहे वह आजादी के लिए भारत छोड़ो आंदोलन हो, चाहे असहयोग आंदोलन। इन आंदोलनों में देश के नागरिकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और अंग्रेजों को आईना दिखाया। परिणाम यह हुआ कि देश को आजादी मिल गई। जब-जब देश में दमनकारी नीति, नियम या कानून बनाया गया, देश की जनता सड़कों पर आई। जन आंदोलन बदलाव की वह तीव्र शक्ति होती है, जिसको नजरअंदाज करना किसी भी सरकार के लिए आसान नहीं होता। जब लोकतंत्र में मीडिया सत्ता के इर्द-गिर्द घूम रहा है, तब देश की जनता के पास अपनी आवाज सत्ता के हुक्मरानों तक पहुंचाने का एक रास्ता बचता है और वह होता है आंदोलन। जन आंदोलन के जरिए सरकार को यह स्मरण कराया जाता है कि यह देश लोकतांत्रिक देश है। वर्तमान में किसान आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया है। देश के अन्नदाता आज खेतों की बजाय राजधानी की सड़कों पर हैं। अब वक्त है किसानों की बात सुनने का, तभी लोकतंत्र सशकत होगा।
-रजनीकांत बंजारे, हेरिटेज इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली
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लोकतंत्र को मजबूत बनाते जन आंदोलन
इतिहास साक्षी है कि जन आंदोलन के समक्ष बड़ी से बड़ी ताकत को झुकना पड़ा है। एक बार अगर जन आंदोलन अपना वास्तविक स्वरूप ले ले, तो फिर कितना भी बड़ा दमनकारी हो उसे झुकना पड़ता हैं, उसे नतमस्तक होना ही पड़ता है। जन आंदोलन का लक्ष्य केवल सत्ता परिवर्तन नहीं है। इसका लक्ष्य व्यवस्था परिवर्तन भी है। आंदोलन एक सतत् प्रक्रिया है, जो धीरे-धीरे व्यापक स्वरूप लेता है। इसमें बुद्धिजीवियो का समावेश होता है। लोगों की चेतना का विकास होता है। लोगों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आती है, लोग सजग होते हैं। एक वास्तविक जन आंदोलन लोकतंत्र को मजबूत करता है।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
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शांतिपूर्वक हों जन आंदोलन
लोकतंत्र में जन प्रतिनिधि शासन संचालन के लिए कई नियम-कानून बनाते हंै। जब आम जनता को लगता है कि ये नियम या कानून नुकसानदायक हैं, तो आम जनता आंदोलन का रास्ता अपनाती है। सही नीयत ओर शांति से किया गया जन आंदोलन जनता को जागरूक करता है। जनता की आवाज सरकार तक पहुंचती हैै, जिससे सरकार नियम कानूनों में संशोधन करने पर मजबूर होती है। लोकतंत्र में जन आंदोलन अंहिसात्मक और शांतिपूर्वक होने चाहिए, ताकि किसी को कोई परेशानी ना हो ।
-भारत नागर, बामला, बारां
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सरकार तक बात पहुंचाने का जरिया हैं जन आंदोलन
भारत का संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ-साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार भी प्रदान करता है। विरोध-प्रदर्शनों के जरिए नागरिक अपनी बात को सरकार तक पहुंचा सकते हैं, जिससे जन सामान्य की बदलती आकांक्षाओं को समझने में सरकार को एक आधार मिलता है। जन आंदोलन लोकतंत्र की सशक्तता के प्रतीक हैं।
-एकता, भरतपुर
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सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रखने का जरिया
लोकतंत्र का अर्थ जनता के द्वारा, जनता के लिए बनाई गई शासन प्रणाली। जब जनता असंतुष्ट होती है, तो जन आंदोलन शुरू होते हैं। जनता अपनी मांगों को आंदोलन के द्वारा सरकार के समक्ष रखती है।
-उर्मिला सिसोदिया, बेंगलुरु
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आंदोलनों से आजादी मिली
लोकतंत्र में जनता सर्वोच्च होती है। जनता की नाराजगी जन आंदोलन का रूप लेती है। यह एक सामूहिक संघर्ष होता है। इससे समाज में परिवर्तन आते हैं। जन आंदोलनों से बड़ी से बड़ी शासन व्यवस्था हिल जाती है। गांधी जी ने असहयोग, अवज्ञा, भारत छोड़ो जैसे बड़े-बड़े आंदोलनों को नेतृत्व किया। इन आंदोलनों के कारण ही देश को स्वतंत्रता मिल पाई।
-प्रहलाद यादव, इंदौर, मध्य प्रदेश
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जरूरी हैं जन आंदोलन
लोकतन्त्र में जन आन्दोलन का बहुत महत्त्व है, क्योंकि लोकतन्त्र में ही महत्त्वपूर्ण होती है। अगर कुछ गलत होता है, तो जन आन्दोलन के जरिए सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है। भारत में बहुत बड़े-बड़े जन आन्दोलन हुए हैं और वे सफल भी हुए हैं। देश में समय-समय पर जन आंदोलन जरूरी हैं।
-भागीरथ स्वामी, लाडऩू
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जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन
लोकतंत्र में जन आंदोलन सत्ता तक जनता की आवाज पहुंचाने का माध्यम हैं। तानाशाही तरीके से जनता पर थोपे जाने वाली जनविरोधी नीतियों को रोकने के लिये लोकतंत्र में शान्तिपूर्ण जनआंदोलन महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
-यतीन्द्र पूनियां, भादरा
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आंदोलनों से जनता ही परेशान
अपनी बात शासन तक पहुंचाने के लिये लोकतंत्र में जन आंदोलन एक लोकतांत्रिक तरीका है, किंतु वर्तमान में जन आंदोलन अपनी मर्यादाओं से बाहर होते जा रहे हैं। इस कारण आमजन को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। धरना-प्रदर्शन की समय सीमा एवं स्थान निर्धारित होने से सड़कें जाम नही होंगी। लोगों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता है ।
-अनिल भार्गव, गुना, मध्यप्रदेश
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जनता का अधिकार है जन आंदोलन
लोकतंत्र में जन आंदोलन अधिकार एवं न्याय मांगने के माध्यम होते हैं। लोकतंत्र में भी आपसी हितों और नजरियों का टकराव चलता रहता है। इस द्वंद्व की अभिव्यक्ति संगठित तरीके से होती है। जिनके पास सत्ता होती है, उन्हें परस्पर विरोधी मांगों और दबाव से संतुलन बिठाना पड़ता है। आम नागरिक जन आंदोलनों के सहारे लोकतंत्र में भूमिका निभाते हैं।
-राजेश पारीक बगवाड़ा, जयपुर
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जनता की आवाज
जन आंदोलन जनता की आवाज उठाने का एक जरिया हैं। इनके माध्यम से आम जनता सत्तारूढ़ दलों की आंखें खोलनेका काम करती है। सरकार द्वारा बनाए गए कानून यदि जन विरोधी हैं तो आंदोलन उठना स्वभाविक है। सरकार को उन पर पुन: पुनर्विचार करना चाहिए।
-हरकेश दुलावा,दौसा
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जन आंदोलन सत्ता पर अंकुश का जरिया
लोकतंत्र मे जन आंदोलनों की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। अगर जन आंदोलन ना हों, तो सत्ता निरंकुश हो जाएगी। जन आंदोलन यह बताते हंै कि जनता सत्ता के सामने अपनी आवाज रखना जानती है। इतिहास में पहले भी जन आंदोलनों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बहुत से राजनीतिक दलों का तो उदय ही जन आंदोलनों से हुआ है। भारत की आजादी के लिए किया गए जन आंदोलन आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।
-शुभम आजाद, सवाई माधोपुर
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लोकतंत्र में जन आंदोलनों का क्या महत्व है?
लोकतंत्र में जन आंदोलनों का विशेष महत्त्व कहा जा सकता है। जन आंदोलन लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सार्थकता को सिद्ध करता है, क्योंकि लोकतंत्र की शुरुआत भी जन आंदोलनों से ही संभव हुई है। इसी प्रकार लोकतंत्र की रक्षा और व्यवस्था को जन कल्याणकारी और जन हितार्थ बनाने के लिए समय-समय पर जन आंदोलन की जरूरत समझी जा सकती है। जन आंदोलन और लोकतंत्र को यदि एक दूसरे का पूरक कहें, तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं है, क्योंकि जन आंदोलन ही लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करते हंै।।
-रमेश कुमार लखारा,बोरुंदा, जोधपुर