
भारत में त्योहारों की रौनक सिर्फ रोशनियों और नए लिबासों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसकी असली रूह गलियों से उठती मसालों की खुशबू और पकवानों की खनक में बसती है। रमजान के मुकद्दस महीने के इफ्तार से लेकर ईद और बकरीद (ईद-उल-अधा) के दस्तरख्वान तक, देश के कोने-कोने में पाक कला (culinary art) की सदियों पुरानी विरासत जीवंत हो उठती है।
तंदूर पर सिंकते रसीले कबाब, धीमी आंच पर दम पर पकी खुशबूदार बिरयानी, मलाईदार निहारी और चाशनी में डूबी फिरनी यह सफर सिर्फ पेट भरने का नहीं, बल्कि साझी तहजीब और स्वाद के बेमिसाल संगम का है।
पुरानी दिल्ली की तंग गलियां त्योहारों के दिनों में एक विशाल फूड फेस्टिवल में तब्दील हो जाती हैं। जामा मस्जिद के गेट नंबर 1 से शुरू होकर मटिया महल और बल्लीमारान तक की हवा में मसालों और कोयले के धुएं की मदहोश करने वाली खुशबू तैरती है।
नल्ली निहारी और खमीरी रोटी: कई घंटों तक धीमी आंच पर पकाई गई गाढ़ी ग्रेवी और मक्खन जैसी नरम नल्ली निहारी का स्वाद यहां बेजोड़ है।
सीख और बोटी कबाब: कोयले की अंगीठी पर सिंकते मटन और बीफ कबाब, जिन पर पिघलता हुआ मक्खन और चाट मसाला डाला जाता है।
शाही टुकड़ा और मुहब्बत का शरबत: देसी घी में तले ब्रेड, रबड़ी और मेवों से बना शाही टुकड़ा और तरबूज के टुकड़ों वाला ठंडा 'प्यार-मोहब्बत शरबत' इस स्वाद यात्रा को मुकम्मल बनाते हैं।
अवध की राजधानी लखनऊ में खाना बनाना केवल हुनर नहीं, एक इबादत और तहजीब का हिस्सा है। चौक, अकबरी गेट और अमीनाबाद की गलियों में त्योहारों के दौरान अवधी रवायत अपने पूरे शबाब पर होती है।
गलौटी और टुंडे कबाब: 160 से अधिक गुप्त मसालों और पपीते के पेस्ट से तैयार गलौटी कबाब इतने मुलायम होते हैं कि मुंह में रखते ही घुल जाते हैं। इसे 'उलटे तवे के पराठे' के साथ परोसा जाता है।
अवधी दम बिरयानी: हैदराबादी बिरयानी के तीखेपन के उलट, लखनऊ की बिरयानी में खड़े मसालों, केवड़े, केसर और यखनी की सौम्य खुशबू का जादू होता है।
शीरमाल और कुलचा-निहारी: केसरिया दूध में गुंथे आटे से तंदूर में सिकी शीरमाल रोटी और सुबह-सवेरे मिलने वाली कुलचा-निहारी लखनवी नाश्ते की जान है।
हैदराबाद का नाम आते ही सबसे पहले जेहन में दम बिरयानी और हलीम का ख्याल आता है। चारमीनार, टोलीचौकी और मदीना बिल्डिंग के आसपास रात भर गुलजार रहने वाले बाजार खाने के शौकीनों के लिए जन्नत से कम नहीं हैं।
हैदराबादी मटन दम बिरयानी: कच्चे गोश्त, बासमती चावल, तली हुई प्याज (बरिस्ता) और पुदीने को हांडी में आटे से सील करके दम पर पकाया जाता है। इसके साथ सर्व किया जाने वाला 'मिर्ची का सालन' और 'दही की चटनी' लाजवाब होते हैं।
हलीम: गेहूं, जौ, दालों, शुद्ध देसी घी और मटन को घंटों घोंटकर तैयार की जाने वाली यह डिश ऊर्जा और स्वाद का अद्भुत मेल है।
खुबानी का मीठा और डबल का मीठा: सूखे खुबानी को चाशनी में उबालकर कस्टर्ड या गाढ़ी मलाई के साथ परोसा जाने वाला यह डेजर्ट हर महफिल की शान है।
मुंबई की रातें कभी नहीं सोतीं, खासकर जब मोहम्मद अली रोड, मीनारा मस्जिद और बोहरी मोहल्ले में त्योहारों का बाजार सजता है। शाम ढलते ही यहां पैर रखने की जगह नहीं बचती।
मटन सीख और भुना गोश्त: बडे मियां और नवाबिया के रसीले सीख कबाब और पुदीने की तीखी चटनी।
संजू बाबा चिकन और नल्ली निहारी: नूर मोहम्मदी होटल का मशहूर 'चिकन संजू बाबा' (संजय दत्त की रेसिपी) और तेल तैरती पारंपरिक निहारी।
मालपुआ और मावा जलेबी: सुलेमान उस्मान का अंडा मालपुआ, जिस पर रबड़ी की मोटी परत डाली जाती है, और बुरहानपुर की मशहूर काली मावा जलेबी।
कोलकाता की नाखोदा मस्जिद के आसपास फैली जकारिया स्ट्रीट का खाना पूर्वी भारत की समृद्ध मुगलाई और अवधी मिली-जुली परंपरा को दर्शाता है।
सूतली और मझली कबाब: सूती धागे से सींक पर बांधकर सेके जाने वाले सूतली कबाब इतने नर्म होते हैं कि धागा खोलते ही बिखर जाते हैं।
कोलकाता बिरयानी: सुगंधित लंबे चावल, रसीला मटन और इसका सबसे खास हिस्सा मसालों को सोख चुका बड़ा उबला आलू और अंडा।
बकरखानी और शीरमाल: चाय के साथ खाई जाने वाली परतदार बकरखानी और मेवों से सजी शीरमाल।
उत्तर और मध्य भारत के भारी और तीखे मसालों से अलग, केरल के मालाबारी (माप्पिला) मुसलमानों के त्योहारों का खाना तटीय मसालों, नारियल और चावल के अनोखे प्रयोग के लिए जाना जाता है।
थालास्सेरी/मालाबार बिरयानी: छोटे दानों वाले खैमा चावल (Jeerakasala Rice), देसी घी और मालाबार के खास मसालों से बनी यह बिरयानी बेहद हल्की और खुशबूदार होती है।
पथिरी और मटन स्ट्यू: चावल के आटे से बनी पतली-मुलायम रोटियां (पथिरी), जिन्हें नारियल के गाढ़े दूध में बने मटन या चिकन स्ट्यू के साथ खाया जाता है।
कुलावी और उन्नक्काया: पके केले, नारियल और गुड़ से बनी पारंपरिक माप्पिला मिठाइयां, जो त्योहार के अंत को मिठास से भर देती हैं।
| शहर | प्रसिद्ध फूड स्पॉट | मस्ट-ट्राई मुख्य डिश | मस्ट-ट्राई मीठा |
| दिल्ली | जामा मस्जिद, मटिया महल | नल्ली निहारी, सीख कबाब | शाही टुकड़ा, रबड़ी-जलेबी |
| लखनऊ | अकबरी गेट, अमीनाबाद | गलौटी कबाब, अवधी दम बिरयानी | शीरमाल, शाही फिरनी |
| हैदराबाद | चारमीनार, पुराना पुल | मटन हलीम, हैदराबादी दम बिरयानी | खुबानी का मीठा, डबल का मीठा |
| मुंबई | मोहम्मद अली रोड, बोहरी मोहल्ला | भुना मटन, तवा गुर्दा-कलेजी | मलाई मालपुआ, मावा जलेबी |
| कोलकाता | जकारिया स्ट्रीट, पार्क सर्कस | सूतली कबाब, चांप, आलू बिरयानी | शाही शीरमाल, फिरनी |
| कोझिकोड/मालाबार | बीच रोड, थालास्सेरी | थालास्सेरी बिरयानी, मटन पथिरी | उन्नक्काया, मुत्तमाला |
सही समय पर पहुंचें: शाम 7 बजे से रात 11 बजे के बीच सबसे ताजा खाना और असली रौनक देखने को मिलती है।
ग्रुप में जाएं: विभिन्न व्यंजनों का लुत्फ उठाने के लिए दोस्तों या परिवार के साथ जाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा वैरायटी शेयर की जा सके।
हाइड्रेशन का ध्यान रखें: तली-भुनी और मसालेदार चीजों के बीच शिकंजी, पुदीना छाछ या रूहअफजा शरबत जरूर पीते रहें।
त्योहारों के इस मौसम में भारत की ये गलियां सिर्फ भूख मिटाने का जरिया नहीं हैं, बल्कि यह उस साझी विरासत का आईना हैं जहां हर निवाले में इतिहास, मोहब्बत और परंपरा का स्वाद घुला हुआ है।