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सेहतमंद दिल के लिए बदलें तेल: जानिए कौन सा कुकिंग ऑयल घटाएगा बैड कोलेस्ट्रॉल

बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और दिल को सुरक्षित रखने के लिए जानें 9 बेहतरीन कुकिंग ऑयल्स, उनके पोषक तत्व और सही इस्तेमाल का तरीका।
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Aug 23, 2026
OIL
कोलेस्ट्रॉल करें छूमंतर (AI)

बदलती जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और प्रोसेस्ड फूड की अधिकता के कारण आज 'हाई कोलेस्ट्रॉल' एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। कोलेस्ट्रॉल मोम जैसा एक चिपचिपा पदार्थ है, जो हमारे लिवर द्वारा बनाया जाता है और कोशिकाओं के निर्माण के लिए जरूरी होता है। जब रक्त में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (LDL) की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह धमनियों (arteries) में जमने लगता है। इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। हमारे दैनिक आहार में कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली चीज है कुकिंग ऑयल। सही कुकिंग ऑयल का चुनाव न केवल एलडीएल को कम करता है, बल्कि गुड कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल (HDL) को भी बढ़ाता है।

तेल में मौजूद फैट्स को समझना क्यों जरूरी है?

कुकिंग ऑयल मुख्य रूप से तीन प्रकार के फैटी एसिड्स से बने होते हैं:

मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स (MUFA): यह दिल के लिए सबसे फायदेमंद फैट माना जाता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को सुरक्षित रखता है।

पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स (PUFA): इसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड्स शामिल होते हैं। यह कुल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में मदद करता है।

सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट: सैचुरेटेड फैट का सीमित सेवन ठीक है, लेकिन इसकी अधिकता और ट्रांस फैट का सेवन सीधे तौर पर बैड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए हमेशा ऐसे तेलों का चयन करना चाहिए जिनमें MUFA और PUFA की मात्रा अधिक और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम हो।

कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने वाले 9 बेहतरीन कुकिंग ऑयल्स

ऑलिव ऑयल (जैतून का तेल)

ऑलिव ऑयल को दिल की सेहत के लिए 'गोल्ड स्टैंडर्ड' माना जाता है।

पोषक तत्व: यह 70-80% तक मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स (ओलिक एसिड) और शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स (जैसे पॉलीफेनोल्स) से भरपूर होता है।

फायदा: यह एलडीएल के ऑक्सीकरण को रोकता है, जिससे धमनियों में सूजन और ब्लॉकेज का खतरा कम होता है।

इस्तेमाल का तरीका: एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल का स्मोक पॉइंट कम होता है, इसलिए इसे सलाद ड्रेसिंग, पास्ता, या धीमी आंच पर हल्की सिकाई के लिए इस्तेमाल करें। रेगुलर या पोमेस ऑलिव ऑयल का उपयोग हल्की कुकिंग में किया जा सकता है।

सरसों का तेल (Mustard Oil)

पारंपरिक भारतीय रसोई का मुख्य हिस्सा, कच्ची घानी सरसों का तेल दिल के लिए बेहद गुणकारी है।

पोषक तत्व: इसमें लगभग 60% MUFA, 21% PUFA और प्राकृतिक रूप से ओमेगा-3 फैटी एसिड (अल्फा-लिनोलेनिक एसिड) पाया जाता है।

फायदा: इसका ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का अनुपात दिल की धमनियों में प्लाक जमने से रोकता है और ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त रखता है।

इस्तेमाल का तरीका: इसका स्मोक पॉइंट काफी हाई (लगभग 250°C) होता है, जिससे यह भारतीय तड़का, सूखी सब्जियां और पारंपरिक ग्रेवी के लिए सबसे मुफीद है।

राइस ब्रैन ऑयल (चावल की भूसी का तेल)

राइस ब्रैन ऑयल हाल के वर्षों में हार्ट-हेल्दी ऑयल के रूप में तेजी से उभरा है।

पोषक तत्व: इसमें 'ओरिजेनॉल' (Oryzanol) नामक एक विशेष एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो केवल इसी तेल में मौजूद होता है।

फायदा: ओरिजेनॉल आंतों में आहार से मिलने वाले कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है।

इस्तेमाल का तरीका: इसका हाई स्मोक पॉइंट इसे डीप फ्राइंग, रोस्टिंग और तेज आंच पर की जाने वाली भारतीय कुकिंग के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनाता है।

एवोकाडो ऑयल

एवोकाडो के गूदे से निकाला जाने वाला यह तेल अपने बेहतरीन न्यूट्रिशनल प्रोफाइल के लिए जाना जाता है।

पोषक तत्व: ऑलिव ऑयल की तरह ही यह भी लगभग 70% ओलिक एसिड (MUFA) और विटामिन E से समृद्ध होता है।

फायदा: यह एचडीएल और एलडीएल के अनुपात को संतुलित करता है और सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को सामान्य रखने में मदद करता है।

इस्तेमाल का तरीका: इसका स्मोक पॉइंट बहुत अधिक (270°C तक) होता है, जिससे इसे बेकिंग, ग्रिलिंग और स्टिर-फ्राई जैसी सभी प्रकार की कुकिंग में बिना पोषण गंवाए इस्तेमाल किया जा सकता है।

तिल का तेल (Sesame Oil)

आयुर्वेद में तिल के तेल को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है।

पोषक तत्व: इसमें 'सेसमोल' (Sesamol) और 'सेसमिन' (Sesamin) नामक एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ-साथ बैलेंस्ड MUFA और PUFA होते हैं।

फायदा: यह लिपिड प्रोफाइल को सुधारने के साथ-साथ धमनियों में होने वाले ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है।

इस्तेमाल का तरीका: इसका स्वाद गहरा और नटी होता है। इसे धीमी आंच पर तड़का लगाने, साउथ इंडियन डिशेज, अचार और एशियाई व्यंजनों में इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है।

मूंगफली का तेल (Groundnut Oil)

भारतीय खानपान में मूंगफली के तेल का उपयोग सदियों से हो रहा है।

पोषक तत्व: यह लगभग 50% MUFA और 30% PUFA का संतुलित मिश्रण है। इसमें 'रेसवेराट्रोल' (Resveratrol) नामक एंटीऑक्सीडेंट भी होता है।

फायदा: रेसवेराट्रोल रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखने में मदद करता है, जिससे दिल पर दबाव नहीं पड़ता।

इस्तेमाल का तरीका: इसका स्मोक पॉइंट (लगभग 230°C) अच्छा होता है, जिससे यह रोजमर्रा की दाल, सब्जी और स्नैक्स बनाने के लिए उपयुक्त है।

कैनोला ऑयल (Canola Oil)

कैनोला ऑयल सरसों परिवार के पौधे (रेपसीड) के परिष्कृत बीजों से तैयार किया जाता है।

पोषक तत्व: दुनिया भर के खाद्य तेलों में कैनोला ऑयल में सबसे कम सैचुरेटेड फैट (सिर्फ 7%) होता है, जबकि यह ओमेगा-3 और MUFA से भरपूर होता है।

फायदा: कम सैचुरेटेड फैट के कारण यह सीधे तौर पर कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है।

इस्तेमाल का तरीका: इसका स्वाद पूरी तरह न्यूट्रल होता है। इसे बेकिंग, ग्रिलिंग या ऐसी रेसिपीज में इस्तेमाल किया जाता है जहां तेल का अपना कोई मजबूत स्वाद न चाहिए हो।

सूरजमुखी का तेल (Sunflower Oil)

सूरजमुखी का तेल हल्का और पचने में आसान होता है।

पोषक तत्व: यह पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स (खासकर लिनोलिक एसिड) और विटामिन E का बेहतरीन स्रोत है।

फायदा: विटामिन E एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो फ्री रेडिकल्स से कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को रोकता है और रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाता है।

इस्तेमाल का तरीका: इसे सामान्य तलने और रोजमर्रा की कुकिंग में सीमित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अलसी का तेल (Flaxseed Oil)

अलसी का तेल पौधों पर आधारित ओमेगा-3 फैटी एसिड (ALA) का सबसे समृद्ध प्राकृतिक स्रोत है।

पोषक तत्व: इसमें लगभग 50-60% तक अल्फा-लिनोलेनिक एसिड पाया जाता है।

फायदा: ओमेगा-3 ट्राइग्लिसराइड्स को घटाने, दिल की धड़कन को नियमित रखने और धमनियों की सूजन को शांत करने में चमत्कारी प्रभाव दिखाता है।

इस्तेमाल का तरीका: इसका स्मोक पॉइंट बहुत कम होता है और गर्म करने पर इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसलिए इसे कभी पकाना नहीं चाहिए; इसे केवल सलाद के ऊपर, दाल में ऊपर से डालकर या स्मूदी में कच्चा ही इस्तेमाल करें।

सही तेल चुनने और इस्तेमाल करने के नियम

सिर्फ अच्छा तेल खरीदना काफी नहीं है, उसका सही उपयोग करना भी उतना ही जरूरी है।

ऑयल रोटेशन (तेल बदलते रहें): किसी भी एक तेल में सभी जरूरी फैटी एसिड्स का आदर्श अनुपात नहीं होता। इसलिए हर 2-3 महीने में अपने कुकिंग ऑयल का प्रकार बदलें (जैसे सरसों के तेल के बाद राइस ब्रैन या मूंगफली का तेल), या अलग-अलग व्यंजनों के लिए अलग-अलग तेलों का प्रयोग करें।

री-हीटिंग (तेल को दोबारा गर्म न करें): एक बार तलने के लिए इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा गर्म करके इस्तेमाल करने से उसमें ट्रांस फैट्स और टॉक्सिक कंपाउंड्स (एक्रोलिन आदि) बन जाते हैं, जो दिल के लिए जहर समान हैं।

मात्रा का संतुलन: तेल चाहे कितना भी सेहतमंद हो, 1 ग्राम फैट से 9 कैलोरी ऊर्जा मिलती है। आवश्यकता से अधिक तेल वजन बढ़ाता है, जो खुद कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण बनता है। एक वयस्क के लिए रोजाना 3 से 4 छोटे चम्मच (लगभग 15-20 ml) तेल पर्याप्त है।

भंडारण (Storage): तेल को हमेशा ठंडी, सूखी और सीधी धूप से दूर वाली जगह पर रखें। रोशनी और गर्मी से तेल में रेसिडिटी (ऑक्सीडेशन) होने लगती है, जिससे उसकी गुणवत्ता घट जाती है।

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना पूरी तरह से आपकी थाली और रसोई के सही संतुलन पर निर्भर करता है। अपनी दिनचर्या में असंसाधित (Cold-Pressed/Kachhi Ghani) तेलों को प्राथमिकता दें, प्रोसेस्ड और डीप-फ्राइड भोजन से दूरी बनाएं और नियमित शारीरिक व्यायाम को अपनाएं।

Updated on:
23 Aug 2026 06:25 pm
Published on:
23 Aug 2026 06:25 pm