
बर्थ टूरिज्म की बढ़ती प्रवृत्ति न केवल परिवारों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक नई चुनौती पेश कर रही है। बर्थ टूरिज्म यानी 'जन्म पर्यटन' का अर्थ है कि जब कोई गर्भवती महिला एक देश से दूसरे देश में केवल इसलिए यात्रा करती है कि वहां जन्म लेने वाले बच्चे को उस देश की नागरिकता मिल जाए। यह विषय भारत के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है, क्योंकि यह वैश्विक नागरिकता, सुरक्षा, स्वास्थ्य और नैतिकता से जुड़े जटिल प्रश्न खड़े करता है।
भारत में बर्थ टूरिज्म का स्तर फिलहाल बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन वैश्विक प्रवृत्तियां और भारत से जुड़ी कुछ गतिविधियां चिंता का विषय हैं। अमेरिका में हाल ही में कांग्रेस ने इस पर जांच शुरू की है। विशेष रूप से चीन और रूस से आने वाली महिलाओं को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं का हवाला देते हुए जांच की जा रही है। हालांकि, भारतीय मूल के डॉक्टरों या एजेंसियों की भूमिका अपेक्षाकृत सीमित पाई गई है।
भारत से जुड़ी कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि भारतीय परिवार भी अमेरिका, कनाडा या यूके जैसे देशों में जन्म के लिए यात्रा कर रहे हैं, ताकि उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और वैश्विक अवसर मिल सकें। लेकिन यह प्रक्रिया महंगी होती है। अमेरिका में इसका खर्च 20 से 40 लाख रुपये तक हो सकता है, जबकि कनाडा में 10–25 लाख रुपये तक।
भारत में चिकित्सा पर्यटन और विशेष रूप से सहायक प्रजनन तकनीकों (ART) का तेजी से विस्तार हुआ है। IVF और अन्य ART प्रक्रियाओं में अनैतिक प्रथाओं, वित्तीय शोषण और नियामक ढांचे की कमी को लेकर चिंता जताई गई है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने हाल ही में एक विशेषज्ञ समिति गठित की है, ताकि IVF क्लीनिकों और ART केंद्रों की बेहतर निगरानी हो सके।
भारत में बर्थ टूरिज्म से जुड़ी नैतिक चिंताएं भी गहरी हैं। एक शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ हॉस्पिटैलिटी प्रदाता और स्वास्थ्य संस्थान 'बर्थ टूरिज्म' पैकेज बेचते हैं, जिनमें नागरिकता का वादा शामिल हो सकता है। जिससे जन्म को एक बाजारू वस्तु बना दिया जाता है। इस प्रकार की गतिविधियां चिकित्सा पर्यटन की नैतिकता और भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके अलावा, सहायक प्रजनन तकनीकों और वाणिज्यिक सरोगेसी के क्षेत्र में भारत पहले से ही विवादों में रहा है। कई मामलों में विदेशी दंपती भारत आते थे, लेकिन बाद में वीजा, नागरिकता और बच्चे की देखभाल को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाते थे। इससे भारत में इस क्षेत्र में बेहतर नियमों और पारदर्शिता की आवश्यकता उजागर हुई है। भारत ने 2004 में जन्म के आधार पर नागरिकता की व्यवस्था को समाप्त कर दिया था, ताकि अवैध प्रवास और नागरिकता के दुरुपयोग को रोका जा सके। यह कदम बर्थ टूरिज्म की संभावनाओं को सीमित करने की दिशा में था।
भारत पर असर और संभावनाएं: भारत में बर्थ टूरिज्म का सीधा प्रभाव फिलहाल सीमित है, लेकिन इसके बढ़ने की स्थिति में यह कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है: