
प्रतीकात्मक तस्वीर | ChatGPT
बच्चों में प्रीडायबिटिक का खतरा बढ़ता जा रहा है। प्रीडायबिटिक की स्थिति अक्सर चुपचाप होती है, लेकिन समय रहते पहचान कर जीवनशैली में बदलाव से इसे टाला जा सकता है।
अधिकांश बच्चों में प्रीडायबिटिक स्थिति के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। हालांकि, त्वचा के कुछ हिस्सों जैसे गर्दन, बगल, कोहनी, घुटने या पेट के मोड़ों पर त्वचा का गहरा हो जाना (acanthosis nigricans) इंसुलिन प्रतिरोध का संकेत हो सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय दिशानिर्देशों (ISPAD 2024) के अनुसार, यदि बच्चा 10 वर्ष या उससे अधिक उम्र का है, और उसका BMI उम्र व लिंग के अनुसार 85वें पर्सेंटाइल से ऊपर है, तो जांच पर विचार किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि परिवार में टाइप 2 डायबिटीज का इतिहास हो, मां को गर्भावस्था में डायबिटीज हुआ हो, या बच्चा दक्षिण एशियाई पृष्ठभूमि से हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।
प्रीडायबिटिक स्थिति की पहचान के लिए तीन मुख्य रक्त परीक्षण होते हैं:
ये मानक ADA (अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन) और RSSDI‑ESI (भारतीय संदर्भ में) द्वारा भी अपनाए गए हैं।
भारत में हालिया राष्ट्रीय सर्वेक्षण (CNNS) के अनुसार, 10–19 वर्ष के बच्चों में फास्टिंग ग्लूकोज के आधार पर लगभग 10% को प्रीडायबिटिक पाया गया। राज्यों में यह दर 2% से लेकर 20% तक भिन्न थी—उदाहरण के लिए मणिपुर, केरल, सिक्किम, मिजोरम और पश्चिम बंगाल में यह 21% से अधिक था।
अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय दोनों दिशानिर्देशों में जीवनशैली में बदलाव को प्राथमिक उपाय माना गया है। इसमें शामिल हैं:
भारत में RSSDI‑ESI 2025 दिशानिर्देशों में यह सलाह दी गई है कि यदि बच्चा अधिक वजन वाला है, तो उसे वजन घटाने की बजाय ऊंचाई बढ़ने के साथ वजन को स्थिर रखने पर ध्यान देना चाहिए। यदि मोटापा अधिक है, तो धीरे-धीरे—लगभग 0.5 से 1 किलोग्राम प्रति माह—वजन घटाने का लक्ष्य रखें, और 500–1000 कैलोरी दैनिक कम करें।
यदि आपके बच्चे में निम्नलिखित में से कोई संकेत दिखे, तो डॉक्टर से संपर्क करें:
भारत में स्कूलों में “My Health World” जैसे स्वास्थ्य शिक्षा सामग्री से बच्चों और परिवारों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। यह पहल बच्चों को स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
| पहलू | सुझाव |
|---|---|
| जोखिम पहचान | BMI ≥85वें पर्सेंटाइल, पारिवारिक इतिहास, गर्भकालीन डायबिटीज |
| जांच के तरीके | FPG, OGTT, HbA1c |
| जीवनशैली उपाय | संतुलित आहार, रोजाना व्यायाम, परिवार‑केंद्रित बदलाव |
| डॉक्टर से कब मिलें | लक्षण दिखने पर, BMI बढ़ने पर, नियमित जांच के लिए |
यदि आपके बच्चे में प्रीडायबिटिक स्थिति है, तो समय रहते पहचान और जीवनशैली में बदलाव से टाइप 2 डायबिटीज की संभावना को काफी हद तक रोका जा सकता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और परिवार का सहयोग इस राह में सबसे मजबूत आधार हैं। यदि कोई लक्षण दिखें या जोखिम बढ़ता हो, तो डॉक्टर से मिलकर उचित जांच और मार्गदर्शन अवश्य लें।
मेडिकल डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी निर्णय से पहले अपने बच्चे के डॉक्टर से सलाह लें।
Updated on:
28 Aug 2026 02:44 pm
Published on:
28 Aug 2026 02:44 pm
