Patrika+

महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में बाधाएं: जानें अपने अधिकार और सरकारी योजनाएं

क्या आप जानते हैं कि भारत में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में कितनी चुनौतियां हैं? अगर महिलाओं को अपने अधिकारों का पूरा ज्ञान हो और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच के बीच की चुनौतियां खत्म हो जाएं तो कितना फायदा होगा?
3 min read
Sep 01, 2026
Healthcare challenges for women
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

बेहतर स्वास्थ्य हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है, लेकिन भारत में महिलाओं के लिए यह अधिकार कई बाधाओं से घिरा हुआ है। महिलाओं को इलाज के लिए पैसे जुटाना हो, अस्पताल तक पहुंचना हो या महिला डॉक्टरों से मिलना हो…ये चुनौतियां रोजमर्रा की जिंदगी में स्वास्थ्य तक पहुंच को मुश्किल बनाती हैं। हालांकि, सरकारी योजनाएं मददगार हैं, लेकिन उन्हें प्रभावी रूप से लागू करना और महिलाओं तक पहुंचाना जरूरी है। आप अपने अधिकारों को जानें, योजनाओं का लाभ उठाएं और स्वास्थ्य के लिए आवाज उठाएं। आइए समझते हैं कि महिलाओं के लिए क्या-क्या चुनौतियां हैं और उनके अधिकार क्या हैं?

सामान्य बाधाएं और उनका असर

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) 2019-21 के अनुसार, 15-49 वर्ष की आयु की लगभग 84% महिलाएं कम से कम एक स्वास्थ्य संबंधी बाधा महसूस करती हैं। इनमें सबसे बड़ी समस्या दवाइयों की उपलब्धता, डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी का उपलब्ध न होना और महिला डॉक्टर की कमी है। इसके अलावा, दूरी, परिवहन, इलाज के लिए पैसे जुटाना और अनुमति लेना जैसी बाधाएं भी आम हैं। कई बाधाएं 2016 से 2021 के बीच कुछ हद तक कम हुई हैं। उदाहरण के लिए, इलाज की लागत को समस्या बताने वाली महिलाओं की संख्या में कमी आई है, लेकिन ये सुधार सीमित हैं। इसके साथ ही कई महिलाएं अभी भी कई बाधाओं का सामना कर रही हैं।

क्षेत्रीय और सामाजिक असमानताएं

महिलाओं पर सभी बाधाओं का प्रभाव एक समान नहीं है। ग्रामीण, गरीब, कम शिक्षित, अनुसूचित जाति/जनजाति से आने वाली महिलाएं अधिक प्रभावित हैं। उदाहरण के लिए, बिना शिक्षा प्राप्त महिलाओं में घर-स्तरीय बाधाएं अधिक थीं, जबकि उच्च शिक्षा प्राप्त महिलाओं में ये कम थीं। क्षेत्रीय रूप से, उत्तर-पूर्वी राज्यों और पूर्वी भारत में दूरी और सुविधा संबंधी समस्याएं अधिक थीं, जबकि मध्य और पश्चिमी राज्यों में अनुमति और साथ जाने की समस्या प्रमुख थी।

स्वास्थ्य प्रणाली और सरकारी नीतियां

भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए कोई विशिष्ट नीति नहीं है, बल्कि यह विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से जुड़ा हुआ है। हाल ही में, सरकार ने जीवनचक्र आधारित दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें मानसिक स्वास्थ्य, पोषण और सम्मानजनक देखभाल शामिल है। आयुष्मान भारत योजना (2018) ने महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाया है।

फरवरी 2026 तक, 43.52 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए गए, जिनमें लगभग 21 करोड़ महिलाएं हैं। 36,229 अस्पताल इस योजना से जुड़े हैं, और लगभग 4.97 करोड़ महिलाओं को अस्पताल में भर्ती की सुविधा मिली है। साथ ही, 1.84 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पूरे देश में संचालित हैं। हालांकि, गाइनोकोलॉजिकल स्वास्थ्य जैसे- मासिक धर्म संबंधी विकार, बांझपन, यौन स्वास्थ्य और मेनोपॉज पर सेवाएं सीमित हैं, जबकि कैंसर और प्रजनन संबंधी संक्रमणों पर नीतियां मौजूद हैं।

आगे की चुनौतियां और भविष्य की राह

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) की रिपोर्ट (जून 2026) बताती है कि महिलाओं के स्वास्थ्य को केवल प्रजनन तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। गैर-संचारी रोग, मानसिक स्वास्थ्य, बिना पैसे का घरेलू काम, कैंसर स्क्रीनिंग की कम दर, और डिजिटल विभाजन जैसी चुनौतियां अब उभर कर सामने आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की रिपोर्ट (जुलाई 2025) ने स्पष्ट किया कि कम शिक्षित, गरीब और ग्रामीण महिलाएं यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में पीछे हैं।

महिलाओं के अधिकार और सुझाव

बेहतर स्वास्थ्य आपका अधिकार है। सरकारी योजनाओं जैसे- आयुष्मान भारत का लाभ उठाएं, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ABHA) बनवाएं और नजदीकी आरोग्य मंदिर से संपर्क करें। यदि महिला डॉक्टर नहीं हैं तो महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA) से मदद लें। यदि इलाज के दौरान असम्मानजनक व्यवहार, गैर-सहमति या गोपनीयता का उल्लंघन महसूस हो, तो यह आपके अधिकारों का उल्लंघन है। 2018 में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए मरीजों के अधिकार चार्टर में सम्मानजनक देखभाल और गोपनीयता शामिल हैं। इसके साथ ही, गैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य या अन्य गाइनोकोलॉजिकल समस्याओं के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें।

Updated on:
01 Sept 2026 03:21 pm
Published on:
01 Sept 2026 03:21 pm