
आज यानी 8 नवंबर 2026 को पूरे देश में दीपावली का पर्व मनाया जा रहा है। इस खास मौके पर घर-आंगन दीपों से जगमग होता है। दिवाली के अवसर पर घरों की चौखट पर एक अलग किस्म का दीया भी जलता है, जिसे लोग 'डायन दीया' कहते हैं।
पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह करीब 11:27 बजे शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर के आसपास समाप्त होगी। प्रदोष काल में अमावस्या होने से दीपावली 8 नवंबर को मनाई जा रही है। लक्ष्मी पूजा का मुहूर्त शाम 5:54 से रात 7:50 बजे तक बताया गया है। हालांकि, मुहूर्त शहर के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है।
लोकमान्यता है कि रावण वध के बाद श्रीराम 14 वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर स्वागत किया। दीपावली का अर्थ भी 'दीपों की पंक्ति' है।
यह साधारण दीया नहीं, कुम्हारों की बनाई मिट्टी की शिल्पकृति है। मिट्टी की इस खास आकृति के सिर पर पांच छोटे दीये होते हैं। इसमें एक स्त्री-आकृति के सिर पर 5 दीये रखे होते हैं। मान्यता है कि यह घर को बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है। कुम्हारों के अनुसार, दीपावली के दिन इसकी बिक्री बढ़ जाती है। उनके पुरखे बताते थे कि चौखट पर 'डायन दीया' जलाने से बुरी शक्ति या नकारात्मक ऊर्जा का घर में प्रवेश नहीं होता है।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, 5 दीये पंचतत्व यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश के प्रतीक माने जाते हैं। उनका कहना है कि दीप प्रज्ज्वलित करने से घर में सकारात्मकता आती है और लक्ष्मी के आगमन की मान्यता जुड़ी है।
ग्रामीण मान्यता में दीपावली की अमावस्या को सबसे अंधेरी रात माना जाता है। लोक विश्वास है कि इस रात बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियां ज्यादा सक्रिय रहती हैं। इसलिए मुख्य चौखट पर 'डायन दीया' रखा जाता है। लोगों का कहना है कि 'डायन दीया' आस्था से जुड़ा है और इसे घर का सुरक्षा कवच माना जाता है।
घर की चौखट पर जलाया जाने वाला 'डायन दीया' यम के दीपक से अलग है। यम दीपक धनतेरस (इस वर्ष 6 नवंबर) की शाम को दक्षिण दिशा में जलाने की परंपरा है, जबकि डायन दीया दीपावली की शाम चौखट के बाहर रखा जाता है।
दीपावली से जुड़े ऐसे लोकाचार अलग-अलग इलाकों में भिन्न हैं। बिहार के कोसी-मिथिलांचल में हुक्का-पाती की परंपरा है, जिसे घर की दरिद्रता दूर करने से जोड़ा जाता है। झारखंड के कई पारंपरिक और आदिवासी समुदायों में करंज तेल का दीया शुभ माना जाता है। डायन दीया लोक आस्था से जुड़ी परंपरा है, जिसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। पर्व का मूल संदेश अंधकार पर प्रकाश की जीत है।