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जल संकट से जूझते देवास ने कैसे बदली अपनी किस्मत? खेत-तालाब और वर्षाजल संचयन की प्रेरक कहानी

Dewas Water Conservation Model : जानिए कैसे मध्य प्रदेश के देवास जिले ने पानी की ट्रेन से जल क्रांति तक का सफर तय किया और 'भगीरथ कृषक अभियान' के जरिए देश के सामने जल संरक्षण का एक अनूठा मॉडल पेश किया।
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Aug 14, 2026
water Crisis
water Crisis : कैसे एक किसान ने बदल दी जिले की तस्वीर, PC- AI

एक समय था जब मध्य प्रदेश का देवास जिला पानी के गंभीर संकट के लिए जाना जाता था। हालात इतने खराब हो गए थे कि शहर की प्यास बुझाने के लिए रेलवे से पानी की ट्रेनें मंगानी पड़ती थीं। खेत सूख रहे थे, भूजल लगातार नीचे जा रहा था और किसान एक फसल के भरोसे जीवन गुजार रहे थे। लेकिन आज वही देवास देश में जल संरक्षण के सफल मॉडल के रूप में जाना जाता है।

यह बदलाव किसी बड़ी नदी परियोजना या अरबों रुपये की योजना से नहीं आया, बल्कि किसानों, वैज्ञानिकों और प्रशासन के साझा प्रयासों से संभव हुआ। देवास की यह कहानी बताती है कि यदि वर्षा जल को सही तरीके से संजोया जाए तो जल संकट को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।

जब पानी के लिए ट्रेन चलानी पड़ी

2000 के दशक की शुरुआत में देवास की स्थिति बेहद चिंताजनक थी। जिले में औसतन 1,066 मिलीमीटर वर्षा होती थी, लेकिन बारिश का अधिकांश पानी बहकर निकल जाता था। भूजल स्तर कई क्षेत्रों में 600 फीट तक नीचे पहुंच गया था। कुएं और हैंडपंप सूखने लगे थे और किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया था।

स्थिति इतनी गंभीर हुई कि देवास शहर में पेयजल की आपूर्ति के लिए दूसरे शहरों से पानी ट्रेन के जरिए लाना पड़ा। यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी और प्रशासन को नए समाधान तलाशने के लिए मजबूर कर दिया।

एक किसान के सुझाव से शुरू हुई जल क्रांति

वर्ष 2006 में हरनवाड़ा गांव के किसान रघुनाथ सिंह तोमर ने तत्कालीन जिलाधिकारी उमाकांत उमराव को एक अनुभव बताया। उन्होंने अपने खेत में एक छोटा तालाब बनाकर वर्षा जल संग्रहित किया था। इस तालाब में जमा पानी से वे लगभग 15 एकड़ भूमि की सिंचाई कर पा रहे थे।

यह विचार प्रशासन को पसंद आया और यहीं से ‘भगीरथ कृषक अभियान’ की शुरुआत हुई। किसानों को अपने खेतों में छोटे-छोटे तालाब बनाने के लिए प्रेरित किया गया। धीरे-धीरे यह पहल पूरे जिले में फैल गई और देखते ही देखते यह एक जनआंदोलन बन गया।

10 हजार से अधिक खेत-तालाबों ने बदली तस्वीर

भगीरथ कृषक अभियान के तहत किसानों ने अपने खेतों में तालाब बनाकर वर्षा जल संग्रह करना शुरू किया। कुछ वर्षों में ही इसका असर दिखाई देने लगा।

आज देवास जिले में 10,000 से अधिक खेत-तालाब बनाए जा चुके हैं। इन तालाबों ने न केवल वर्षा जल को रोकने में मदद की, बल्कि भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) को भी बढ़ावा दिया।

इसका परिणाम यह हुआ कि जिले में सिंचित क्षेत्र, जो 2000 के दशक के मध्य में लगभग 1 लाख हेक्टेयर था, बढ़कर 4 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया। जहां पहले किसान केवल एक फसल लेते थे, वहीं अब कई क्षेत्रों में दो और तीन फसलें भी ली जा रही हैं।

खेत-तालाब से कैसे मिला फायदा?

  • खेत-तालाबों ने कई स्तरों पर बदलाव किया।
  • बारिश का पानी खेतों में ही रुकने लगा।
  • भूजल स्तर में सुधार हुआ।
  • सिंचाई के लिए सालभर पानी उपलब्ध रहने लगा।
  • फसल उत्पादन बढ़ा।
  • किसानों की आय में वृद्धि हुई।
  • बागवानी और फल उत्पादन को बढ़ावा मिला।

देवास के कई क्षेत्रों में अब संतरे के बाग भी दिखाई देते हैं, जो कभी पानी की कमी के कारण संभव नहीं माने जाते थे।

रूफ वाटर हार्वेस्टिंग ने निभाई अहम भूमिका

देवास मॉडल सिर्फ खेत-तालाबों तक सीमित नहीं था। इसका दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ था रूफ वाटर हार्वेस्टिंग यानी छतों से वर्षा जल संग्रह। भूजल विशेषज्ञ सुनील चतुर्वेदी ने 1998 में एक सरल और कम लागत वाली तकनीक विकसित की। इसमें घरों की छत पर गिरने वाले वर्षा जल को पीवीसी पाइप के माध्यम से सीधे कुएं, बावड़ी या हैंडपंप से जुड़े रिचार्ज ढांचे तक पहुंचाया जाता था।

इससे दो बड़े फायदे हुए:

  • भूजल स्तर तेजी से बढ़ा।
  • भूमिगत जल की गुणवत्ता में सुधार हुआ।

वर्ष 1999 में देवास में देश का पहला भूजल संवर्धन मिशन शुरू किया गया, जिसने बाद में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान

  • देवास के जल संरक्षण मॉडल को केवल देश में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया।
  • केंद्रीय भूजल बोर्ड ने इस मॉडल की प्रशंसा की।
  • वर्ष 2000 में इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में सम्मान मिला।
  • 2002 में केंद्र सरकार ने नए भवनों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए।
  • संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2011-12 में ‘Water for Life’ श्रेणी में देवास मॉडल को तीसरा स्थान दिया।
  • यह सम्मान इस बात का प्रमाण था कि स्थानीय स्तर पर किया गया प्रयास वैश्विक उदाहरण बन सकता है।

देवास मॉडल की सफलता का असली कारण

कई योजनाएं केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित रह जाती हैं, लेकिन देवास मॉडल की सफलता का कारण था लोगों की भागीदारी। इस अभियान में -

  • किसानों ने अपनी जमीन पर तालाब बनाए।
  • प्रशासन ने तकनीकी मार्गदर्शन दिया।
  • विशेषज्ञों ने जल संरक्षण की तकनीकें विकसित कीं।
  • समुदाय ने इसे आंदोलन का रूप दिया।
  • यही वजह है कि यह मॉडल आज भी सफल माना जाता है।

आज के किसानों के लिए क्या सबक?

देवास की कहानी केवल इतिहास नहीं है, बल्कि आज के जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका भी है।

किसान क्या कर सकते हैं?

  • खेतों में छोटे या मध्यम आकार के तालाब बनाएं।
  • वर्षा जल को बहने देने के बजाय संग्रहित करें।
  • घरों और पंचायत भवनों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाएं।
  • गांव स्तर पर जल प्रबंधन समिति बनाएं।
  • कृषि और जल संसाधन विभाग से तकनीकी सलाह लें।
  • भूजल दोहन के साथ-साथ भूजल रिचार्ज पर भी ध्यान दें।
Updated on:
14 Aug 2026 02:41 pm
Published on:
14 Aug 2026 02:41 pm