
Digital Arrest Cyber Fraud: अचानक एक फोन कॉल या वीडियो कॉल, जिसमें कोई स्वयं को पुलिस, CBI या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताता है, आपको ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराता है, गिरफ्तार करने की धमकी देता है और फिर शुरू करता है पैसे ऐंठने का खेल। यही तरीका मध्य प्रदेश के देवास में एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के खुलासे में सामने आया है। इस गिरोह ने 12 राज्यों में अपना नेटवर्क फैला रखा था और 12 आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है। इस लेख में हम जानेंगे डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे काम करता है, इससे कैसे बचा जा सकता है और आप क्या कदम उठा सकते हैं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग स्वयं को सरकारी या जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर डराते हैं। वे कहते हैं कि आप किसी गंभीर मामले में फंस गए हैं और तुरंत पैसे ट्रांसफर करें, अन्यथा गिरफ्तारी हो जाएगी। यह एक संगठित साइबर फ्रॉड का हिस्सा है, जिसमें ‘म्यूल’ बैंक खाते, फर्जी दस्तावेज और तकनीकी जाल का उपयोग किया जाता है।
मध्य प्रदेश के देवास में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया। इसमें आरोपी स्वयं को CBI, मुंबई क्राइम ब्रांच या दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाते थे। पुलिस ने 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया और 54 लाख रुपए से अधिक की ठगी की राशि बरामद की।
जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह E-Zero FIR, CBI, मुंबई क्राइम ब्रांच जैसे नामों का उपयोग करता था और तकनीकी जांच के माध्यम से अंतरराज्यीय नेटवर्क तक पहुंच बनाई गई।
इस तरह के फ्रॉड में अक्सर म्यूल बैंक खाते, ऐसे खाते जिनका असली मालिक किसी और को उपयोग करने देता है, का इस्तेमाल होता है। ठग इन खातों में पैसे ट्रांसफर कराते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
इसके अलावा, तकनीकी जाल जैसे फर्जी ऐप, क्लोन WhatsApp प्रोफाइल और RAT (Remote Access Trojan) जैसे मालवेयर का भी उपयोग किया जाता है। जैसे रोहतक में हुए एक मामले में देखा गया, जहां ठगों ने RAT और फर्जी बैंकिंग वेबसाइटों के माध्यम से लोगों को ठगा।
सरकार ने साइबर अपराधों से निपटने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 जैसी सुविधाएं शुरू की हैं, जिससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकते हैं और लेन-देन को रोकने में मदद मिलती है।
साथ ही, I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) में एक साइबर फ्रॉड मैनेजमेंट सेंटर बनाया गया है, जहां बैंक, भुगतान एग्रीगेटर, टेलीकॉम और पुलिस एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं।
यह स्कैम केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा है जो, 12 राज्यों में फैला हुआ है। यह दिखाता है कि ठग अब तकनीकी और मनोवैज्ञानिक दोनों तरीकों से काम कर रहे हैं।
आपकी सतर्कता, समय पर रिपोर्टिंग और बैंक/पुलिस से सहयोग इस जाल को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अगली बार जब कोई आपको 'डिजिटल अरेस्ट' का डर दिखाए, तो याद रखें, यह केवल एक फ्रॉड है और आप इससे बच सकते हैं।
फ्रॉड की इस कहानी का अगला कदम आपके हाथ में है, क्योंकि सतर्क, आपको रहना है, जागरूक आपको रहना है और जागरूक बनाना भी है कि, साइबर फ्रॉड से स्वयं को और अपने परिवार को सुरक्षित रखना जरूरी है।